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सियार या सियानापन : पढ़ें ये दिलचस्प कहानी

बहुत पहले किसी सियार के पैर में एक कांटा चुभ गया। वह रोने-चिल्लाने लगा। उसने वहां से जा रही एक बूढ़ी महिला से पैर का कांटा निकालने का आग्रह किया। महिला ने कांटा निकाल दिया। सियार ने धन्यवाद किया और जाने लगा। तभी वह तुरंत लौटकर आया और महिला से पूछा, ‘मेरा कांटा कहां है?' महिला ने कहा, ‘नहीं पता।' यह सुनकर सियार रोने लगा, ‘मुझे कांटे की जरूरत थी।' महिला दुखी हुई और उसने सियार को बदले में एक अंडा दे दिया। 

सियार अंडे को लेकर रात में पास के गांव में एक घर में पहुंचा। उसने आदमी से रात में वहां ठहरने की इजाजत मांगी। आदमी ने हां कर दी। उसने अंडा एक प्लेट में रख दिया। रात में सियार ने उठकर उस अंडे को खा लिया। सुबह उठकर वह रोने लगा, ‘मेरा अंडा कहां है? जरूर तुम ने खा लिया।' आदमी को दुख हुआ, उसने सियार को एक मुर्गीदी। मुर्गी लेकर सियार एक महिला के घर पहुंचा। वहां सियार ने मुर्गी को बकरियों के बाड़े में रख दिया। रात में सियार फिर उठा और मुर्गी को खा गया। सुबह उठकर फिर रोने लगा। महिला ने भी दुखी होकर उसे बकरी का एक छोटा बच्चा दे दिया। वहां से निकलकर सियार पास के गांव में एक आदमी के यहां ठहरा। आदमी ने बकरी का बच्चा अपने बेटे के पलंग के पैर से बांध दिया। रात को सियार फिर उठा और बकरी के बच्चे को खा लिया। सुबह उठकर फिर रोने लगा, ‘जरूर तुम लोग उसे खा गए हो।' 

आदमी ने कहा कि वह उसे बदले में एक बड़ी बकरी देगा। सियार ने कहा, ‘उसे बड़ी बकरी नहीं चाहिए। वह बकरी का बच्चा उसके बेटे के समान था, उसे भी उस आदमी का बच्चा चाहिए। आखिरकार, आदमी ने हामी भरते हुए सियार को कुछदेर दरवाजे के पास रुकने के लिए कहा। थोड़ी देर में आदमी एक बड़ा बैग लाया और सियार को दे दिया। सियार बैग घसीटता हुआ ले जाने लगा। वह खुश था कि बच्चा बहुत तगड़ा है। कुछदूर जाकर उसने बैग खोला। बैग खुलते ही उसमें से दो जंगली कुत्ते निकले और सियार पर झपट पड़े। नाशुक्राना रवैया और धूर्तता से देर तक किसी का भला नहीं होता। 

(स्त्रोत - सोशल मीडिया से)

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  • Web Title:siyar ka siyanapan : read this interesting story