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लॉकडाउन के दौरान गर्भवतियां ज्यादा तनाव की शिकार

कोरोना काल में बंदी के चलते घर में रह रहे लोगों के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसका खासा प्रभाव गर्भवती महिलाओं में देखने को मिला है। एक शोध में दावा किया गया है कि कोरोना काल में गर्भवती...

लॉकडाउन के दौरान गर्भवतियां ज्यादा तनाव की शिकार
Pratima Jaiswalएजेंसी,कोलचेस्टरThu, 03 Feb 2022 08:20 AM

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कोरोना काल में बंदी के चलते घर में रह रहे लोगों के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसका खासा प्रभाव गर्भवती महिलाओं में देखने को मिला है। एक शोध में दावा किया गया है कि कोरोना काल में गर्भवती महिलाएं अवसाद का शिकार हुईं। यह अध्ययन बीएमसी जर्नल में प्रकाशित हुआ।
अध्ययन के लेखक डॉ. सिल्विया रिगाटो का कहना है कि कोरोना महामारी ने दुनियाभर में लोगों को घरों में कैद कर दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए ये कदम कारगर साबित हुए। वहीं, दूसरी ओर कोरोना काल में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में नकारात्मक प्रभाव पड़ा। संक्रमण काल के दौरान गर्भधारण करने वाली महिलाओं में अवसाद या चिंता की समस्याएं देखी गईं।
संक्रमण काल में अवसाद दर में वृद्धि
संक्रमण काल में गर्भधारण करने वाली 30 फीसदी महिलाओं को अध्ययन में शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं में अवसाद दर 17 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी हो गई। वहीं, चिंता की दर 37 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गई।
नकारात्मक जवाब देने वाली महिलाओं में चिंता अधिक
डॉ. रिगाटो ने बताया कि अध्ययन में गर्भवती महिलाओं से कोरोना के प्रभाव को लेकर सवाल किए गए। इस दौरान जिन महिलाओं ने कोरोना के प्रभाव को लेकर नकारात्मक जवाब दिए उनमें चिंता की समस्या अधिक पाई गई। इसके अलावा जिन महिलाओं ने सकरात्मक जवाब दिया उनमें यह समस्या कम पाई गई।

जन्म के बाद बच्चे से जुड़ाव कम रहा
रिगाटो ने बताया कि अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच किए गए अध्ययन में पता चला कि कोरोना काल में अधिकांश लोगों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ीं। अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया, उनका जुड़ाव बच्चे से कम महसूस किया गया।

दवाओं का इस्तेमाल न करें
कोरोना के दौरान गर्भवतियों के अवसादग्रस्त होने के कई मामले सामने आए। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें महिलाएं अपने आने वाले बच्चों को लेकर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने महामारी के बीच अवसाद की शिकार महिलाओं को दवाओं का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान गर्भवती महिलाएं मानसिक तनाव से गुजर रहीं थीं।

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