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लोग अक्सर प्लेन में सफर करते हुए लगते हैं रोने, जानें क्यों

सांकेतिक तस्वीर

हवाई जहाज में रोने के लिए बच्चे सिर्फ बदनाम हैं। वास्तव में हवाई जहाज में बड़े भी खूब रोते हैं, लेकिन किसी को पता नहीं लगने देते। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि मनोवैज्ञानिकों का खुद मानना है कि प्लेन में लोगों के रोने के पीछे एक बड़ा कारण है। आइए उस कारण के बारे में जानते हैं।

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मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि वातावरण में बदलाव होने की वजह से कुछ लोग घबराने लगते हैं। इस घबराहट में उन्हें लगने लगता है कि वह इस दुनिया में काफी अकेले हैं या उन्हें कुछ हो जाएगा तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसी घबराहट के बाद उनकी आंखों से आंसू की कुछ बूंदें गिरने लगती हैं। ऐसी घबराहट एयरपोर्ट के अंदर घुसने से ही शुरू होने लगती है, जिसके बाद दिमाग को कुछ खतरे के संकेत मिलने लगते हैं और आप भावुक हो जाते हैं।

कुछ मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि प्लेन की ऊंचाई के कारण लोगों की भावनात्मक स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्ग्नाइजेशन के अनुसार प्लेन के केबिन में वायु का दवाब 6,000 से 8,000 फीट समुंद्री ऊंचाई पर होता है, जिसके बाद डिहाइड्रेशन की वजह से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होता है। ये डिहाइड्रेशन व्यक्ति के व्यवहार और दिमाग पर भी असर करता है।

इस संदर्भ में एक सर्वे भी किया गया है कि जिसमें पाया है कि जब व्यक्ति प्लेन में कोई फिल्म देखता है तो वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है और रोने लगता है। लेकिन वही फिल्में अगर जमीन पर दिखाई जाएं तो उसे कोई भी भावनात्मक बदलाव नहीं होता। प्लेन में इस समस्या से बचने के लिए आप ऐसे कार्यों में दिमाग को व्यस्त रखें, जिसमें नकारात्मक चीजें सोचने का समय ना मिलें।

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  • Web Title:people are more likely to cry in planes psychologist reveals