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जीवन शैलीडेंगू-मलेरिया से लोहा लेगी अब जीएम मच्छरों की फौज

एजेंसियां,फ्लोरिडाPublished By: Manju Mamgain
Wed, 05 May 2021 11:21 AM
डेंगू-मलेरिया से लोहा लेगी अब जीएम मच्छरों की फौज

अमेरिका में डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों से अब मच्छर ही लोहा लेते नजर आएंगे। जी हां, ब्रिटेन की मशहूर बायोटेक्नोलॉजी फर्म ‘ऑक्सीटेक’ ने फ्लोरिडा में ऐसे जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) मच्छर छोड़े हैं, जो ‘एडीस एजिप्टी’ नस्ल के मच्छरों की आबादी पर लगाम लगाने में मददगार साबित होंगे। ये मच्छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जीका और पीतज्वर जैसी बीमारियों का सबब बनते हैं।

‘ऑक्सीटेक’ ब्राजील, पनामा, केमैन द्वीप और मलेशिया जैसे देशों में पहले ही जीएम मच्छरों की आजमाइश कर चुकी है। हालांकि, फ्लोरिडा के आकाश में ऐसे मच्छर छोड़ने की सरकारी स्वीकृति और जनसहयोग हासिल करने के लिए उसे दस साल संघर्ष करना पड़ा। फ्लोरिडा कीज मॉस्किटो कंट्रोल डिस्ट्रिक्ट (एफकेएमसीडी) के मुताबिक दक्षिणी फ्लोरिडा में स्थित कीज द्वीप समूह में मच्छरों की कुल आबादी में ‘एडीस एजिप्टी’ की हिस्सेदारी चार फीसदी के करीब है। हालांकि, क्षेत्र में होने वाली हर मच्छर जनित बीमारियों के पीछे इसी नस्ल का हाथ है।

ऐसे करेंगे खात्मा
-‘ऑक्सीटेक’ कीज द्वीप समूह में ‘एडीस एजिप्टी’ नस्ल के ऐसे नर मच्छर छोड़ेगी, जो मादा कीट को अविकसित ‘लारवा’ चरण में ही खत्म करने वाले जीन से लैस होंगे।
-मादा मच्छर के साथ सहवास के दौरान जेनेटिकली मॉडिफाइड नर मच्छर इस प्रक्रिया से उत्पन्न अविकसित मादा लारवा में उसे नष्ट करने वाले जीन के वाहक बनेंगे।
-चूंकि, डेंगू-चिकनगुनिया आदि के लिए मादा ‘एडीस एजिप्टी’ जिम्मेदार है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी आबादी घटने से इन बीमारियों का प्रकोप भी कम होगा।

दो चरणों में प्रयोग
-अप्रैल के अंत में 06 इलाकों में जेनेटिकली मॉडिफाइड नर ‘एडीस एजिप्टी’ के अंडों से लैस बक्से रखे गए।
-मध्य मई से 12 हफ्तों तक हर सप्ताह बक्से से औसतन 12 हजार मच्छर निकलकर कीज में फैलने लगेंगे।
-‘ऑक्सीटेक’ की 16 हफ्ते तक साल के अंत में दूसरे चरण के तहत 02 करोड़ जीएम मच्छर छोड़ने की योजना है।

दो मायनों में फायदेमंद
1.नर ‘एडीस एजिप्टी’ किसी को काटते नहीं, मादा मच्छरों की उत्पत्ति रोककर धीरे-धीरे पूरी नस्ल को खत्म कर देंगे।
2.हानिकारक कीटनाशकों का सुरक्षित विकल्प साबित होंगे, अत्यधिक इस्तेमाल से मच्छरों में प्रतिरोधक क्षमता पैदा हुई।

पहचान बेहद आसान
-‘ऑक्सीटेक’ ने जीएम मच्छरों में एक खास जीन प्रतिरोपित किया है, जिससे वे पीली रोशनी में हरे रंग में जगमगाने लगते हैं। इससे शोधकर्ताओं के लिए यह जानना आसान होगा कि जीएम मच्छर बक्से से निकलकर कितनी दूरी तक उड़ते हैं? वे कितने दिनों तक जीवित रहते हैं? मादा मच्छरों को कितना आकर्षित कर पाते हैं? उनकी आबादी में कितनी कमी लाने में सक्षम हैं? जीएम मच्छर से उत्पन्न सभी मादा लारवा नष्ट होते हैं या नहीं? प्रयोग से मिले नतीजों के आधार पर जीएम मच्छरों को पूरे अमेरिका में छोड़ने का फैसला किया जाएगा।

लोकेशन गुप्त रखी
-जीएम मच्छरों के काटने और स्थानीय परिस्थितिकी को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते लोग ‘ऑक्सीटेक’ के प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मच्छरों पर कीटनाशक छिड़ककर उन्हें मारने की धमकी भी दी है। ऐसे में कंपनी ने जीएम मच्छरों के अंडों से लैस बक्सों को ऐसे प्रतिष्ठानों में छोड़ा है, जो बेहद सुरक्षित हैं। उसने बक्सों की लोकेशन भी गुप्त रखी है।

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