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सेहत-करियर नहीं, ऑफिस की चिंता है ज्यादा खतरनाक, दोगुनी रफ्तार से पैदा होते हैं स्ट्रेस हार्मोन

एजेंसी,लंदनPublished By: Manju Mamgain
Sat, 24 Oct 2020 09:47 PM
सेहत-करियर नहीं, ऑफिस की चिंता है ज्यादा खतरनाक, दोगुनी रफ्तार से पैदा होते हैं स्ट्रेस हार्मोन

ऑफिस के काम का तनाव सेहत या करियर की चिंता से ज्यादा जानलेवा है। एक स्विस अध्ययन में इसमें मनोवैज्ञानिक फिक्र के मुकाबले दोगुनी मात्रा में स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव होने की बात सामने आई है। चूंकि, कोरोनाकाल में ‘वर्क फ्रॉम होम’ की मजबूरी के चलते कर्मचारी तय घंटों से ज्यादा काम कर रहे और उन्हें एकाग्रता व उत्पादकता में कमी की शिकायत से जूझना पड़ रहा है, इसलिए तनाव घटाने के उपाय करने पर ज्यादा जोर देना जरूरी है।

स्वास्थ्य संस्था ‘स्टिफटंग जेसनदित्जवोदेरंग श्वेज’ के शोधकर्ताओं ने पाया कि एक-तिहाई कर्मचारी काम को लेकर अक्सर तनावग्रस्त महसूस करते हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें डायिबटीज, हृदयरोग सहित विभिन्न बीमारियों से जूझना पड़ सकता है। रैफल वेबल के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 900 प्रतिभागियों को ऑफिस के तीन अलग-अलग माहौल में बैठाया। सभी वर्कस्टेशन पर टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर और लार के नमूने जुटाने वाली जांच किट उपलब्ध कराई गई।

प्रतिभागियों को टाइपिंग से लेकर क्लाइंट के साथ मीटिंग की व्यवस्था करने जैसे काम सौंपे गए। पहले समूह का काम सिर्फ यहीं तक सीमित रखा गया, जबकि दूसरे समूह को क्लाइंट के साथ चैटिंग करके उसकी जरूरतें समझने और बॉस की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब खंगालने की भी जिम्मेदारी दी गई। वहीं, तीसरे समूह के पास एचआर विभाग के दो अधिकारी भेजे गए, जो प्रमोशन के लिए पांच उपयुक्त कर्मचारियों की तलाश में जुटे थे। 

पूरे अध्ययन में प्रतिभागियों के दिल की धड़कन पर करीबी नजर रखी गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले समूह के मुकाबले दूसरे ग्रुप के प्रतिभागियों की हृदयगति तो तेज थी ही, साथ ही उनमें ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन भी दोगुना हुआ। तीसरे समूह के प्रतिभागियों का हाल तो और भी बुरा था। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल साइकोन्यूरोएंडोक्रायनोलॉजी’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

‘वर्क फ्रॉम होम’ बेहद चुनौतीपूर्ण
-59% कर्मचारियों ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ में ऑफिस से कहीं ज्यादा काम करने की बात कही
-91% ने अतिरिक्त काम के बदले कोई भत्ता या छुट्टी न दिए जाने पर नाखुशी जाहिर की
-87% का मानना है कि नियोक्ताओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए पारदर्शी नीति बनानी चाहिए

शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर असर
-56% में पीठ-कमर-कंधे में दर्द, 52% में अनिद्रा और 38% में सिरदर्द की समस्या पनपी
-54% घर में रहते हुए भी बीवी-बच्चों, अभिभावकों के साथ अच्छे पल बिताने को तरसे
-33% को लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में छुट्टी नहीं मिलने से बेचैनी की शिकायत हुई
(स्रोत : योर एमिगोज फाउंडेशन का सर्वे)

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