लाइफ से नेगेटिविटी हो जाएगी गायब बस इन 6 आदतों से कर लें दोस्ती

लाइव हिन्दुस्तान टीम , नई दिल्ली Last Modified: Mon, Mar 23 2020. 13:05 PM IST
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जन्म से ही कोई खुशमिजाज नहीं होता। खुशमिजाज लोग धीरे-धीरे यह कला सीखते हैं। कैसे हर हाल में सकारात्मकता को तलाशें, बता रही हैं  डॉ. मोनिका शर्मा। जिंदगी में अगर आपको कमियां ही कमियां दिखती हैं, तो इसका मतलब है कि आप खुशियों से खुद दूरी बना रही हैं। यह समझना  बेहद जरूरी है कि किसी की जिंदगी परफेक्ट नहीं होती। जो आपके पास नहीं है, उसकी जगह जो कुछ मौजूद है, आपके हिस्से है, उसे देखने-जीने का नजरिया आपके सुख को कई गुणा बढ़ा सकता है। यूं भी सुख जीवन के कई अनदेखे-अनजाने पहलुओं से भी जुड़ा होता है, इसलिए जिंदगी को कमियों के साथ नहीं, बल्कि उसकी संपूर्णता के साथ देखने की कोशिश करें। उस सुख को भी अपनी खुशियों में जोड़ लीजिए, जो सिर्फ सुविधाओं की भीड़ से नहीं मिलता।

संवेदनशील होने का सुख- 
जो है, जितना है, उसे लेकर मन में संतुष्टि हो तो सोच और व्यवहार दोनों ही मोर्चों पर आप संवेदनशील बनते हैं।  किसी से कोई ईष्र्या नहीं। कोई प्रतिस्पर्धा नहीं। अपनी सोच और समझ से आगे बढ़ते रहने के चलते आप बेहतरी की ओर ही बढ़ते हैं।  दूसरों के प्रति संवेदनशील होना खुद अपने आपको को भी दिली खुशी देता है। यूं भी किसी के मन को ठेस पहुंचाकर खुद खुश नहीं रहा जा सकता है। देखने में आता है कि जो लोग खुद अपनी जिंदगी में हरदम  खामियां ही देखते हैं, उनके व्यवहार में दूसरों के प्रति भी कटुता आ जाती है। अपनी चाहतों, जरूरतों और जिंदगी की हकीकत की मिली-जुली तसवीर में जो खुशियों के रंग नहीं भरते वे संवेदनशील होने के सुख को नहीं जी पाते। जबकि संवेदनशीलता का भाव सराहना, सहजता और सहानुभूति का पूरा पैकेज है। 

शुक्रगुजार होने का सुख- 
आपकी खुशियों में सुख के और रंग भी जुड़  जाएंगे, जब आप जो हैं उसके लिए आभारी होने का भाव रखने लगेंगी। जीवन में मिली अच्छी चीजों और स्नेह भरे रिश्तों के लिए शुक्रगुजार होना सीखिए। यहां तक कि अपने आलोचकों और नाकामयाबियों को भी शुक्रिया कहिए, क्योंकि जीवन से जुड़ी हर खट्टी-मीठी बात इस सफर को खास बनाती है। खुद को बेहतर बनाने में मदद करती है। हां, इन चीजों से जुड़ी बातों में सिर्फ कमियां देखना सही नहीं है। हर उतार-चढ़ाव को धन्यवाद देना सीखें, जो आगे बढ़ते हुए आपको मिले हैं। यह सोच तकलीफों में भी आपको खुशियां  तलाशना सिखा देगी। जिंदगी में मिली नेमतों के प्रति शुक्रगुजार होने का सुख खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है। 

सुकून का सुख- 
जिंदगी को जब कमियों के साथ नहीं, बल्कि उसकी संपूर्णता के साथ देखा जाता है, तो दिलो-दिमाग को सुकून मिलता है। आज के दौर की भागमभाग में जब सुकून कहीं खो सा गया है, ऐसे में मन का चैन खुद के हिस्से करना बड़ी बात है। पर, सच यह भी है कि इस सुकून को संतुष्टि के बिना नहीं पाया जा सकता। जिंदगी को कम आंकते हुए कभी भी मन से सहज नहीं रहा जा सकता। अपनी जिंदगी में खामियां निकालने से पहले यह सोचिए कि हो सकता है कि किसी और के पास इतना सब भी ना  हो। किसी और के जीवन का  सफर आपसे कहीं ज्यादा मुश्किल रहा हो। खुश रहने और खुशियों को कई गुना बढ़ाने का यह फॉर्मूला हमेशा मन को शांत और सहज       रखता है।

अपनों के साथ का सुख- 
जिंदगी के हर पहलू को लेकर नाखुश रहना रिश्तों से जुड़ी खुशियों को जीने में भी बाधा बनता है। अपनों के साथ को जीना है, तो जो आपको मिला है, उसे लेकर मन में तसल्ली होना जरूरी है। यह समझना जरूरी है कि सिर्फ कमियों के बारे  में सोचकर अपनों से स्नेह ना तो पाया जा सकता है और ना ही उनके साथ प्यार से जिया जा सकता है। अपनों के साथ से मिलने वाले संबल  को जी भरकर जीना है, तो जिंदगी को पूर्णता के साथ देखिए,  जिसमें कुछ छूटा है तो बहुत कुछ आपके साथ भी है। यही सोच खुशी की वो राह है, जिस पर चलते हुए अपनों से जुड़ी खुशियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसा करने से आपको वह सुख महसूस होगा, जो कमियों के बारे में सोचते हुए कभी नहीं मिल सकता। 

ठहराव का सुख- 
जिंदगी में गति ही नहीं, ठहराव भी जरूरी है। जिंदगी एक  सफर के समान है। इसके खूबसूरत पड़ावों को जीने के लिए जरा रुकना भी होता है, ठहरकर सोचना और समझना भी होता है कि सफर कितना खूबसूरत चल रहा है। सब कुछ पा लेने के इरादे से जिंदगी की रफ्तार तो बनी रहती है, पर कई सुंदर पड़ाव का आनंद ले पाना संभव नहीं हो पाता।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मन को चैन-सुकून ही ना हो, जिंदगी में ठहराव ही ना हो, तो सारी सफलता बेमानी है। तेज रफ्तार में जिंदगी से जुड़ा बहुत कुछ डगमगा जाता है, लेकिन ठहराव, जो पाया है उसे जीने का मौका देता है। जिंदगी में यह स्थायित्व तभी संभव है, जब खुद की जिंदगी को लेकर मन में संतुष्टि का भाव हो। ऐसे सुखद ठहराव को जीने के लिए अपनी झोली में आई खुशियों को देखें ना कि कमियों को। जिंदगी को पूर्णता के साथ देखने की यह नई शुरुआत सचमुच आपकी खुशियों को कई गुना बढ़ाने वाली साबित होगी।

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