More than one and a half million Indians are doing office work from home - डेढ़ करोड़ से ज्यादा भारतीय घर से कर रहे दफ्तर का काम DA Image
12 नबम्बर, 2019|4:27|IST

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डेढ़ करोड़ से ज्यादा भारतीय घर से कर रहे दफ्तर का काम

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने घर से बैठकर दफ्तर का काम करने का सुझाव दिया है। दिल्ली-एनसीआर में यह फार्मूला कामयाब हो सकता है। ‘फ्रीलांसर इनकम अराउंड द वर्ल्ड रिपोर्ट-2018’ के मुताबिक, भारत में 1.5 करोड़ के करीब लोग ‘वर्क फ्रॉम होम’ सुविधा ले रहे हैं। एनसीआर की कई कंपनियां घर से दफ्तर का काम करने की सुविधा देती हैं।

1996 में अमेरिका ने की थी शुरुआत-
अमेरिका ने वर्ष 1996 में स्वच्छ हवा (संशोधित) कानून लाकर देश की बड़ी कंपनियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया था। 

-05 में से दुनिया का एक कर्मचारी घर से काम करता है
-07% अमेरिकी कंपनियां घर से काम की सुविधा देती हैं 
-(राउटर व अमेरिकी सरकार के आंकड़ों पर आधारित)

मध्य एशिया, एशिया और लातिन अमेरिका में रुझान अधिक

-25% कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए कानून लाकर अमेरिका ने इसे लागू किया था

रोज दफ्तर नहीं जाना पड़ता-
‘वर्क फ्रॉम होम’ का असल नाम ‘टेलीकम्यूटिंग’ है।  इसका मतलब इलेक्ट्रॉनिक या मोबाइल संवाद के जरिए   घर से ही दफ्तर का काम करना है। इस व्यवस्था में कर्मचारी को रोज दफ्तर नहीं जाना पड़ता। जरूरी बैठकें   भी टेलीकॉन्फ्रेंसिंग से की जाती हैं।

इन सेक्टर में अपनाया गया-
पर्यावरण इंजीनियर, क्वालिटी इंप्रूवमेंट, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बिजनेस डिवलपमेंट, रिसर्च बॉयोलॉजिस्ट, ऑडिट मैनेजर जैसे क्षेत्रों में घर से काम करने की सुविधा मिलने लगी है।

देश में सुविधा देने वाली कंपनियां-
भारत में प्रद्यौगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां इंफोसिस, आईबीएम-इंडिया, डेल-इंडिया, एसेंचर, याहू-इंडिया समेत कई अन्य कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देती हैं।

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