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जानें डिप्रेशन, तनाव, हाइपरटेंशन, इंसोमेनिया, डायबिटीज, मोटापा योग से कैसे हो जाएगा छूमंतर

रफ्तार जिंदगी में तरह-तरह के मानसिक और शारीरिक रोग हमें घेरे हुए हैं। दवाओं पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। ऐसे में योग ऐसी थेरेपी के रूप में उभर रहा है, जो कई रोगों को ठीक करने में मदद करता है, साथ ही रोगों के होने की आशंका को भी कम करता है। डिप्रेशन, तनाव, हाइपरटेंशन, इंसोमेनिया, डायबिटीज, मोटापा और सांस संबंधी रोगों में तो योग काफी प्रभावी तरीके से काम करता है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में वर्ष 2019 में योग टॉप फिटनेस ट्रेंड के रूप में शामिल है।

तरह तरह के योग

पावर योगा : नब्बे के दशक में पश्चिमी देशों से होते हुए भारत पहुंचा पावर योगा आज सेलिब्रिटीज का पसंदीदा योग बन गया है। दरअसल यह अष्टांग योग का ही प्रकार है, जिसे करने के लिए काफी ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। ज्यादातर डांस स्टाइल में इसे किया जाता है। अलग-अलग योग गुरुओं ने इसे अपने-अपने ढंग से तैयार किया है।

लाभ- यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। अतिरिक्त वसा और कैलरी घटती है। शरीर में लचीलापन बढ़ता है। पेट की मांसपेशियां सुडौल बनती हैं।

यिन योगा : पॉली जिंक द्वारा शुरू की गई इस योग पद्धति की प्रत्येक कक्षा में 6 से 10 तक आसन कराए जाते हैं, लेकिन प्राणायाम नहीं कराया जाता।

लाभ- यह योग विभिन्न अंगों व मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह खिलाड़ियों और डांस करने वालों के लिए खास तौर पर लाभकारी है।

अष्टांग योग : इसे सभी योगों का राजा माना जाता है। महर्षि पतंजलि ने इसे अष्टांग योग का नाम दिया। इसे छोटे-बड़े हर उम्र के लोग कर सकते हैं।

लाभ- वजन घटाने में यह मददगार है। जोड़ मजबूत होते हैं और उनका लचीलापन बढ़ता है। दिमाग शांत रहता है। रक्त-संचार बढ़ता है। सोच में स्थिरता आती है तथा तनाव दूर भागता है। सिर दर्द और पीठ के निचले हिस्से के दर्द में भी असरकारी है।

आयंगर योग : पुणे निवासी बी. के. एस. आयंगर द्वारा स्थापित योग की यह पद्धति परंपरागत योग से अलग है। इसमें विभिन्न आसनों के दौरान बेल्ट, कुर्सी और विभिन्न आकार के ब्लॉकों का प्रयोग किया जाता है। आयंगर योग का अनुसरण करने वाले बताते हैं कि इस योग में प्रत्येक आसन एक निश्चित समयावधि तक किया जाता है। बेल्ट तथा कुर्सी जैसे सामान योग की मुद्राओं को सही ढंग से करने में मदद करते हैं। साथ ही इस योग में मौसम, व्यक्ति की उम्र एवं शारीरिक दशा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।

लाभ- सांस की बीमारियों में इसे लाभकारी माना जाता है। यह योग रक्तचाप और तनाव को कम करता है। स्टेमिना, संतुलन व एकाग्रता बढ़ाता है। गर्दन व पीठ दर्द में भी आराम देता है।

शिवानंद योग : ऋषिकेश के स्वामी शिवानंद सरस्वती द्वारा शुरू की गई यह योग पद्धति प्राणायाम से शुरू होती है। इसका उद्देश्य सांसों पर नियंत्रण पाना है। इसमें सूर्य नमस्कार और संतुलित आहार का भी खास स्थान है। सरल होने के कारण विदेशों में पसंद किया जाता है। इस योग के दौरान पांच मुख्य बिंदुओं संतुलित श्वसन प्रक्रिया, प्राणायाम, आसन, आराम की अवस्था, संतुलित आहार और अच्छी सोच पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

लाभ- सांसों को संतुलित बनाने में मदद मिलती है। अस्थमा और सांस के रोगों में इसके फायदे होते हैं।

कुंडलिनी योग : मनुष्य के शरीर में सात चक्र होते हैं। जब ध्यान के माध्यम से कुंडलिनी को जागृत करते हैं, तो शक्ति सुप्त अवस्था में आकर मस्तिष्क की ओर जाने लगती है। इस पूरी प्रक्रिया में वे सभी सात चक्र भी क्रियान्वित हो जाते हैं। इस पूरे क्रम को कुंडलिनी योग कहा जाता है।

लाभ- इस योग के अभ्यास से मन की अस्थिरता खत्म होती है और एकाग्रता बढ़ती है। इसमें प्राणायाम के साथ मंत्रोच्चारण करते हुए आसन लगाए जाते हैं। .

विशेषज्ञ : दिव्य सुनील योगाचार्य, संस्थापक, प्रणव ऊर्जा। ऋतु मल्होत्रा, योगऋतु की संस्थापक।

सूर्य नमस्कार, अर्धमत्स्येंद्रासन, गोमुख आसन और मर्कटासन जैसे आसन शरीर के दाएं और बाएं, दोनों हिस्सों से करें। इस संबंध में प्रशिक्षक के बताए नियमों का पालन करें।

1. ’अर्धमत्स्येंद्रासन, शुगर के मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि इससे पैंक्रियाज में इंसुलिन बनने लगता है। मर्कटासन, कमर से चर्बी दूर करने के साथ-साथ निचले हिस्से में होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है। ’गोमुखासन से स्पॉन्डिलाइटिस और सर्वाइकल के दर्द में बहुत आराम मिलता है। ’पवनमुक्तासन पेट संबंधी रोगों से निजात दिलाता है। ’सूर्य नमस्कार एक ऐसा आसन है, जो समय कम होने पर भी प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है। ’बच्चों के लिए हलासन और सर्वांगासन, विशेष रूप से लाभकारी होते हैं। इससे एकाग्रता बढ़ती है। रक्त-संचार तेज होता है। ’युवाओं को वक्रासन, भुजंगासन, मर्कटासन, पवनमुक्तासन और शशांकासन जैसे आसन करने चाहिए, जो उन्हें फिट रखने के साथ-साथ मजबूती भी प्रदान करेंगे। ’गर्भवती महिलाएं सुखासन, ताड़ासन और पूर्ण यौगिक आसन कर सकती हैं, पर योग प्रशिक्षक और डॉक्टर की सलाह से ही करें।

2. हठ योग यह योग की बहुत प्राचीन भारतीय पद्धति है। आज भी इसका चलन समाप्त नहीं हुआ है। यह व्यायाम तन और मन दोनों को स्वस्थ और संयमित रखता है। लाभ: इसे करने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। तनाव दूर होता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है तथा ग्रंथियों की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से कार्य करती है।

3. योग करने पर कई बार समस्या कम होने की बजाय बढ़ जाती हैं। इसका एक बड़ा कारण है सही तरीके से योग न करना। योग शुरू करने से पहले कुछनियमों को जान लेना जरूरी है...

-योग के लिए सबसे अच्छा समय सूर्योदय से पहले माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध और ताजगी से भरपूर होता है। यह संभव नहीं है तो भी साफ-सुथरी, शांत व धूल-धुएं से रहित जगह पर योग करें।

-सूर्यास्त के बाद योग करना है तो उससे 3-4 घंटे पहले कुछ भी न खाएं। खाली पेट योग करने से शरीर में लचीलापन अधिक रहता है। पेट में भारीपन नहीं रहता।

-योग से पहले हल्के-फुल्के व्यायाम जरूर करें, ताकि शरीर खुल जाएं।

-ढीले व आरामदायक कपड़े पहनकर ही योग करें।

-नित्य कर्मों से निवृत्त होकर ही योग करें। योग के तुरंत बाद स्नान नहीं करें।

-स्नान करने के बाद योग करने से ज्यादा लाभ मिलता है। रक्तसंचार सही होता है। शरीर में चुस्ती रहती है।

-नियमित योग करने वालों को दिनभर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। इससे योगाभ्यास करने से पहले और योग के दौरान पानी की कमी महसूस नहीं होती। अगर योग करते हुए प्यास लग रही है, तो बहुत कम मात्रा में ही पानी पिएं, ताकि गला न सूखे व पानी से पेट भी न भरे।

-तेज हवा वाली जगह पर श्वास संबंधी योग क्रियाएं करना संभव नहीं होता। इसलिए ऐसी जगह योग करें, जहां धीमी हवा चल रही हो।

-समतल जमीन पर दरी या योगा-चटाई बिछाकर ही योग करें।

-योग के दौरान ठंडा पानी न पिएं।

-प्रत्येक आसन में सांस लेने और छोड़ने का अपना नियम होता है, उसका पालन अवश्य करें।

-योग के दौरान शाकाहारी भोजन करें।

-योग की केवल वही क्रियाएं करें, जिन्हें आपका शरीर आसानी से करने में सक्षम हो।

-योगासन के अंत में शवासन करने से तन और मन पूरी तरह शांत हो जाता है।

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