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अपने ही भाई-बहन से बुली होकर डरपोक तो नहीं बन रहा बच्चा? हर पेरेंट को इन चीजों पर रखनी चाहिए नजर

कहते हैं कि बचपन में घटी कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो हमेशा के लिए हमें याद रह जाती हैं। इनमें बुरी घटनाएं ज्यादा होती हैं। जैसे, हम में से कई लोग ऐसे हैं, जिनका बड़े होने के बाद अपने भाई-बहनों से...

अपने ही भाई-बहन से बुली होकर डरपोक तो नहीं बन रहा बच्चा? हर पेरेंट को इन चीजों पर रखनी चाहिए नजर
प्रतिमा जायसवाल ,नई दिल्लीSat, 29 Jan 2022 05:08 PM

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कहते हैं कि बचपन में घटी कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो हमेशा के लिए हमें याद रह जाती हैं। इनमें बुरी घटनाएं ज्यादा होती हैं। जैसे, हम में से कई लोग ऐसे हैं, जिनका बड़े होने के बाद अपने भाई-बहनों से रिश्ता अच्छा है लेकिन फिर भी उन्हें आज भी बचपन की कुछ ऐसी बातें याद हैं, जिनके याद आते ही उनके मन में भाई-बहन को लेकर कड़वाहट या गुस्सा भर जाता है। एक अध्ययन के अनुसार जो लोग बचपन में अपने भाई-बहन से बुली (bully) हुए होते हैं, उन्हें छोटी-सी बात पर भी अपने भाई-बहनों पर गुस्सा आ जाता है। कुछ मामले तो ऐसे हैं, जिनमे बचपन में किए गए फिजिकल या मेंटल टॉर्चर की वजह से बड़े होने पर भी लोगों के मन में भाई-बहनों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर नहीं रह पाता। उनके बड़े होने पर भी भाई-बहनों से जुड़ाव नहीं रह पाता। ऐसे में एक पेरेंट होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। 


बुली करने और आम लड़ाई में फर्क समझें 
भाई-बहनों में लड़ाई-झगड़ा होना आम बात है लेकिन पेरेंट को यह देखना चाहिए कि किसी एक बच्चे ने दूसरे के लिए डर का माहौल तो नहीं बना दिया है। इस डर के माहौल की वजह से बच्चा हमेशा अपने बड़े या छोटी भाई-बहन से दबने लगता है। उसे लगता है कि अगर वह अपने गुस्सैल भाई या बहन के खिलाफ कुछ भी बोलेगा, तो उसकी सजा उसे मिलेगी। इस डर के बीच बच्चे की पर्सनैलिटी डरपोक और नेगेटिव हो जाती है। उसके मन में गुस्सा भर जाता है। कई बार तो सिचुएशन इतनी खराब हो जाती है कि डर की वजह से बच्चा कहीं छुपने या फिर भागने की कोशिश करने लगता है, जिससे कि उसका सामना बुली करने वाले भाई-बहन से न हो सके। ऐसे में पेरेंट को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए कि उनकी लड़ाई का असर एक-दूसरे पर क्या पड़ रहा है। कहीं, उनके मन में एक-दूसरे के लिए नफरत तो नहीं पनप रही।

 

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बड़े या छोटे की साइड लेने से बचें 
अक्सर मोरल वैल्यू के नाम पर पेरेंट बड़े बच्चे या छोटे बच्चे की साइड लेते हैं। जैसे, छोटे बच्चे को अक्सर बड़े भाई-बहन की सभी बातें मानने के लिए कहा जाता है या फिर मारने पर भी कहा जाता है कि 'कोई बात नहीं बड़ा है। वहीं, कुछ पेरेंट हमेशा घर के छोटे बच्चे की साइड लेते हुए बड़ों को सहने के लिए कहते हैं, जबकि मोरल वैल्यूज से अलग हर माता-पिता को यह देखने की जरूरत है कि सही और गलत क्या है। बच्चों को पक्षपात के बिना प्यार से समझाने की जरूरत होती है. किसी भी एक बच्चे की साइड लेने से बचें।

 

बच्चों की तुलना करने से बचें 
हर बच्चे की पर्सनैलिटी अलग होती है इसलिए कभी भी एक बच्चे को दूसरे से कम्पेयर न करें। ऐसा करने से बच्चे का कॉन्फिडेंस कम होता है। वहीं, उनके मन में अपने भाई-बहनों के लिए गुस्सा, जलन और नफरत की भावनाएं भी पनपने लगती है। पेरेंट को अपने सभी बच्चों को सिक्योर फील कराना चाहिए, जिससे कि बच्चे किसी दबाव में न रहें।