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Stress Management: जब जीवन में सबकुछ उलझ जाए तो ऐसे दें खुद का साथ

तनाव कई बीमारियों की वजह है। आप कितना भी पैसा कमा लें अगर स्ट्रेस के लूप में फंस गए तो अच्छी जिंदगी नहीं जी पाएंगे। अपना नजरिया बदलकर हम समस्या का समाधान तो नहीं खोज सकते बल्कि तनाव से जरूर बच सकते है

Stress Management: जब जीवन में सबकुछ उलझ जाए तो ऐसे दें खुद का साथ
Kajal Sharmaहिंदुस्तान,मुंबईMon, 11 Sep 2023 03:54 PM
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जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना पर काबू रख पाना संभव नहीं है। लेकिन, उसके प्रति अपने नजरिये को बदलना हमारे वश में है। तनाव होना सामान्य है, पर ज्यादातर तनाव का बोझ हम इसलिए ढोते रहते हैं कि हम सच से दूर भागते हैं। हम अपनी भावनाओं को ही स्वीकार नहीं करते। मनोवैज्ञानिक और लेखिका लेजली रैल्फ अपनी जिंदगी के अनुभवों से मिली कुछ अच्छी बातें साझा की हैं हम सबकी जिंदगी आसान बना सकती हैं। 

सब कुछ कंट्रोल करना संभव नहीं
धीरे-धीरे मैं दबाव को पहचान कर उस पर नियंत्रण करना सीख रही हूं और साथ ही यह भी समझ रही हूं कि जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना पर काबू रख पाना संभव नहीं है। लेकिन, अपना नजरिया बदलना मेरे वश में है। पहले किसी भी काम का दबाव या तनाव मुझे सामान्य लगता था। तब सोचती थी कि जिम्मेदारियों के दबाव में रहना हमें अनुशासन सिखाता है, आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। पर, बीते कुछ सालों में मैंने अपनी भावनाओं को ईमानदारी से स्वीकार करना सीख लिया है।

ताकि दबाव न हो हावी 
अब मैं जान चुकी हूं कि दबाव में जीने से कुछ हासिल नहीं होता और न ही यह किसी भी रूप में मददगार है। मुझे मालूम है कि मेरे विचार और कर्म या तो मुझे शांति दे सकते हैं या हालात को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं। ऐसा नहीं है कि इस सोच से मेरा जीवन पूरी तरह सरल हो गया, लेकिन अब मैं हालात के सामने घुटने टेकने की बजाय आगे बढ़ने का प्रयास करती हूं। हालांकि, दबाव को पहचानना आसान है। सिरदर्द, तनाव, चिंता और थकान उसके लक्षण थे। पर, मेरी अपनी ही सोच और काम इन लक्षणों को बढ़ा रहे हैं, यह समझने में मुझे कठिनाई हुई।

तनाव की कई वजहें हो सकती हैं
असल में किसी भी प्रकार के दबाव का कारण वास्तविकता से ही जुड़ा होता है। ये रोजमर्रा के जीवन से जुड़े होने से लेकर किसी अन्य गंभीर परेशानी तक कुछ भी हो सकता है। उदाहरण के लिए बेरोजगारी, तलाक, किसी अपने को खो देने का दुख या कोई अन्य बहुत बड़ा आघात तक कोई भी घटना जीवन को दबाव से भर सकती है। कारण, जब आप किसी चीज की परवाह करते हैं तो उसके विपरीत परिणामों से प्रभावित भी होते हैं। जो तनाव हम महसूस करते हैं, उससे हमारे नैतिक मूल्यों, प्राथमिकताओं और उम्मीदों के बारे में भी पता चलता है।

विचारों को करें डायवर्ट
लेकिन, मुझे लगता है कि एक विशेष प्रकार का दबाव हमारे अंतर्मन से उठता है, जो हमें पागल तो नहीं करता लेकिन वास्तविकता से जरूर काट देता है। लोग क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे या मैं क्या हूं-जैसे सवाल दिमाग में लगातार गूंजते रहते हैं। लेकिन इस दबाव को यदि पहचान लिया जाए तो इन सवालों को रोका जा सकता है और अपने विचारों को दूसरी दिशा दी जा सकती है।

समझदारी से करें चुनाव 
मैंने अपने जीवन में बहुत सारे तनाव और दबाव सिर्फ इस उम्मीद में झेले हैं कि मुझे लगता है कि एक दिन मैं स्वयं को उनसे मुक्त कर लूंगी, चीजें मेरे नियंत्रण में आ जाएंगी। लेकिन, समस्या यह है कि ऐसा कब करना है, यह बताने के लिए कोई नहीं होता, क्योंकि अपने जीवन के प्रति आप स्वयं ही जिम्मेदार होते हैं। लिहाजा यह कोई नहीं बता सकता कि कब किस बात को सीने से लगा कर रखा जाए या कब खुद को किसी बंधन से मुक्त किया जाए। जब जीवन बेहतर और सुरक्षित होता है तो आगे का रास्ता सरल ही लगता है। यह आपको तय करना होता है कि आप डर व दबाव के साए में जीना चाहते हैं या दुखदाई रिश्तों और यादों को त्याग देना चाहते हैं। मेरे विचार से हमें स्वयं को अपने मूल रूप में स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए।

 जब परिस्थितियां हों विपरीत
● संकट के समय दिमाग में उलझनें पैदा होना स्वाभाविक है। तब पूछें कि क्या मुझे इस तनाव पर ध्यान देना चाहिए?

● यदि सफल होने के लिए मुझे इस दबाव की जरूरत पड़ी तो क्या होगा?

● तमाम जिम्मेदारियों के बावजूद क्या मुझे थोड़ा आराम से बैठ जाना चाहिए?

● क्या मुझे अच्छा महसूस करने का अधिकार है? क्या मुझे अपना खयाल रखने के लिए समय निकालना चाहिए?

● मैं अपने विचारों की इस प्रक्रिया से रोजाना गुजरती हूं और धीरे-धीरे खुद को ज्यादा बहादुर और मजबूत महसूस करने लगी हूं। हालांकि स्थितियां कभी-कभी मुझ पर अभी भी हावी हो जाती हैं और मुझे रुक कर अपने विचारों को स्थिरता देने की जरूरत पड़ती है। पर, अब यह सब पहले की तरह जटिल नहीं है। अब दबाव के क्षणों में मैं अपने अंतर्मन से पूछती हूं कि वह क्या चाहता है और समस्या सरल लगने लगती है। अब मैं अपने डर, और दुविधा को छिपाने की बजाय उसे खुले दिल से स्वीकार कर लेती हूं। जिन बातों को लेकर हम दबाव महसूस करते हैं, उनसे जुड़े कुछ सवाल हमारे मन की गहराइयों में बने रहते हैं।

● मैं कौन हूं?

● क्या मैं योग्य हूं?

● क्या मैं प्रेम और संबंधों के लायक हूं?

● क्या मेरे लिए इन हालातों से बाहर निकल पाना संभव होगा?

चुनें शांति की राह
दूसरों के प्रति धारणा न बनाएं आंख बंद करके दूसरों के प्रति अच्छी या बुरी कैसी भी राय कायम न करें। यह समझने की कोशिश करें कि किसी भी मौके पर आप कैसा महसूस करते हैं। क्या आप तनाव में आ जाते हैं। अपनी भावनाओं को नजरअंदाज न करें।

स्वयं को स्वीकारें दबाव और तनावभरे अवसरों पर अपनी भावनाओं को तवज्जो दें और उन्हें समझें। हालात को अपनी भावनाओं से ऊपर रखने पर आप ज्यादा असहज महसूस कर सकते हैं। कुल मिलाकर, खुद पर भरोसा कायम रखें।

मूल कारण को समझें एक बार जब आप समझ जाएं कि दबाव महसूस हो रहा है तो समस्या की तह तक जाने का प्रयास करें, सही समाधान निकाल सकेंगे।

नए विचारों को दें जगह अपनी प्राथमिकताएं याद करें और उन्हीं के अनुरूप फैसले लें। इससे आप में साहस का संचार होगा और आप अपना संयम नहीं खोएंगे

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