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4 अगस्त, 2020|10:26|IST

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पॉजिटिव लोगों के लिए बेहद आसान है तनाव पर काबू पाना, जानें क्या है माइंडफुलनेस थेरपी

positive people

कोरोनावायरस के कारण दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन करना पड़ा। लॉकडाउन में घरों में बंद रहकर लोगों के तनाव का स्तर बढ़ गया है। मानसिक समस्याओं से बड़ी संख्या में लोग पीड़ित हो रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तनाव को दूर करने के लिए लोगों को सकारात्मक होने की जरूरत है। एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग भविष्य के लिए योजना बनाने के साथ अपने हर पल को बेहतर तरीके जीते हैं, वे नकारात्मकता का शिकार हुए बिना रोजमर्रा के तनाव पर काबू पाने में सक्षम होते हैं। यह अध्ययन पर्सनैलिटी एंड इंडिविजुअल डिफ्रेंसेस नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

रोज के तनाव से खराब होता है मूड-
नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शेवुन न्युपर्ट ने कहा, जाहिर है कि रोज के तनाव से नकारात्मक प्रभाव या खराब मूड होने की संभावना अधिक हो सकती है। उन्होंने आगे कहा, हालांकि हमने विशेष रूप से उन दो कारकों को देखा, जिनको तनाव को नियंत्रित करने में प्रभावी समझा जाता है। ये कारक हैं माइंडफुलनेस और प्रोएक्टिव कोपिंग।

ध्यान लगाने से अलग है माइंडफुलनेस की प्रक्रिया-
शोधकर्ता न्युपर्ट ने कहा कि माइंडफुलनेस एक ऐसी थेरपी है, जिसके जरिए हम अपने अंदर व अपने आसपास हो रही घटनाओं या स्थितियों के प्रति जागरुकता पैदा करते हैं। यह एक तरह से ध्यान ही है।

बस फर्क यह है कि ध्यान लगाने के लिए एक तय वक्त पर अलग-से कोशिश करने के बजाय माइंडफुलनेस में हम जिस पल जहां होते हैं, अपना पूरा ध्यान वहीं केंद्रित करना होता है। इसमें अतीत में रहने या भविष्य की चिंता करने के बजाय उस लम्हे को पूरी तरह महसूस करना और जीना होता है। वहीं, प्रोएक्टिव कोपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से लोग संभावित तनावों का पता लगाते हैं और उन्हें रोकने या उनके प्रभाव को खत्म करने के लिए पहले से ही एक्शन लेना शुरू कर देते हैं।

शोधकर्ता न्युपर्ट ने कहा, हमने यह देखने के लिए कि ये कारक तनाव की प्रतिक्रियाओं को कैसे प्रभावित करते हैं, 223 प्रतिभागियों के डाटा की जांच की। अध्ययन में 60 और 90 की उम्र के बीच के 116 लोग और 18 से 36 की उम्र के 107 लोग शामिल थे। सभी प्रतिभागी अमेरिका के निवासी थे।

अध्ययन में स्पष्ट हुई ये बातें-
सभी प्रतिभागियों को एक सर्वेक्षण पूरा करने के लिए कहा गया, जिसमें उनको प्रोएक्टिव कोपिंग और माइंडफुलनेस के प्रभाव को बताना था। इन आठ दिनों में प्रतिभागियों को रोजमर्रा के तनाव और नकारात्मक मूड की रिपोर्ट देने के लिए भी कहा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि रोज के तनावों के प्रभाव को कम करने के लिए प्रोएक्टिव कोपिंग प्रक्रिया फायदेमंद थी।

लेकिन जिन प्रतिभागियों ने दोनों प्रक्रियाओं को अपनाया, उनको तनाव से निपटने में अधिक मदद मिली। शोधकर्ताओं ने कहा, हमारे परिणाम बताते हैं कि सकारात्मक व संतुलित जीवन जीने वाले लोग नकारात्मक विचारों से निपटने में योग्य होते हैं।

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  • Web Title:health tips:It is very easy for positive people to overcome stress know what is mindfulness therapy