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17 अक्तूबर, 2020|2:57|IST

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गर्भावस्था में कॉफी पीने से 36 फीसदी बढ़ जाता है गर्भपात का खतरा, बच्चों में बनता है मोटापे का कारण

tea coffee lovers

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कॉफी पीने से परहेज करनी चाहिए क्योंकि इससे न सिर्फ उनके बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है बल्कि गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। एक हालिया शोध में यह खुलासा किया गया है। शोध में बताया गया है कि गर्भावस्था या गर्भवती होने का प्रयास करने वाली महिलाओं में कॉफी पीने का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है। 20 साल में हुए 48 शोधों की समीक्षा करने के बाद शोधकर्ताओं ने कहा है कि कैफीन के सेवन से गर्भपात, मृतजन्म और कम वजन वाले बच्चे का जन्म जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

कोई सुरक्षित स्तर नहीं-
नए शोध ने उन पुराने शोधों को चुनौती दी है जिसमें कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं को दिन में दो कप से ज्यादा कॉफी नहीं पीनी चाहिए। रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सट्रीटिशियन एंड गाइनाकोलॉजिस्ट के प्रोफेसर जैक जेम्स ने कहा कि न्यूनतम मात्रा में पी गई कॉफी से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल सुरक्षित स्तर तक कॉफी पीने वाली हजारों महिलाओं के बच्चों को भी नुकसान पहुंचता है।

न्यूनतम मात्रा में कॉफी पीने से भी गर्भपात का खतरा 36 फीसदी तक बढ़ जाता है। मृत प्रसव का खतरा 19 फीसदी और कम वजन वाले जन्म का खतरा 51 फीसदी तक बढ़ जाता है। गर्भावस्था में कॉफी के सेवन से शिशु में ल्यूकेमिया और मोटापे का खतरा भी बढ़ता है। 

लंबे समय तक रहता है असर-
शोधकर्ता ने कहा कि सामान्य समय में एक कप कॉफी के कैफीन के स्तर को कम होने में पांच घंटे का समय लगता है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान इससे भी लंबा समय लगता है। गर्भावस्था के 38 वें हफ्ते में शरीर को कैफीन के स्तर को कम करने में 18 घंटे का समय लगता है।

कैफीन से शिशु के दिल की गति बढ़ जाती है और दिमाग की रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि महिलाओं को गर्भावस्था और बच्चों को दूध पिलाने के दौरान कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। 

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  • Web Title:health tips:Drinking coffee during pregnancy increases 36 percent risk of miscarriage and causes obesity and Leukemia in children