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माता-पिता के लिए अच्छी खबर, बच्चों में 6 महीने से ज्यादा नहीं ठहरता मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम

हिन्दुस्तान ब्यूरो,नई दिल्लीPublished By: Manju Mamgain
Wed, 26 May 2021 11:35 AM
माता-पिता के लिए अच्छी खबर, बच्चों में 6 महीने से ज्यादा नहीं ठहरता मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम

कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद बच्चों में होने वाले मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम ने अभिवावकों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन इस बीच लंदन से एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। दरअसल एक अध्ययन से पता चलता है कि मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम के गंभीर मामले भी आमतौर पर छह महीने के अंदर ठीक किए जा सकते हैं। 

6 महीने में हल्के पड़ जाते हैं लक्षण
लांसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हुए एक अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है कि मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम के लक्षण छह महीने में मंद पड़ने लगते हैं। यह अध्ययन लंदन के एक अस्पताल में किया गया। इस अध्ययन के तहत अस्पताल में भर्ती 46 बच्चों पर छह महीने तक कड़ी निगरानी रखी गई। इसके बाद एक रिर्पोट तैयार की गई जिसमें पाया गया कि मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम के गंभीर लक्षण होने के बावजूद ये बच्चे छह महीने के भीतर स्वस्थ्य होने की दिशा में अग्रसर दिखे।

समस्याओं में दिखी निरंतरता की कमी
छह महीने उपरांत अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद देखा गया कि अध्ययन में शामिल अधिकांश बच्चों में पेट की समस्याओं, सूजन, हृदय संबंधी असामान्यताओं और तंत्रिका संबंधी जैसे गंभीर समस्याओं की निरंतरता में काफी कमी थी। हालांकि कुछ बच्चों में इसके कुछ लक्षण मिले लेकिन यह गंभीर नहीं थे। इससे इन्हें अपने रोजमर्रा के कार्यों को करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी। कुछ बच्चों में लगातार थकान के कारण व्यायाम करने में भी कठिनाई महसूस की गई। 

जारी रहेगा अनुसंधान 
अध्ययन से बेहतर परिणाम हासिल करने के बावजूद रिपोर्ट जारी करने वाले लेखकों ने इसे आगे जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि चूंकि यह अध्ययन एक ही अस्पताल और एक छोटी संख्या पर आधारित है इसलिए इसको और अधिक बेहतर ढ़ग से समझने के लिए इस अनुसंधान का विस्तार करना महत्वपूर्ण होगा। बाल चिकित्सा संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जस्टिन पेनर ने कहा कि यह रिसर्च काफी उम्मीद भरा है और इससे हमें बहुत आशाएं हैं बावजूद इसके हमें अभी और इसपर बारीकी से निगरानी रखने की जरूरत है।

चिल्ड्रन नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ बर्नहार्ड विडरमैन ने कहा कि हालांकि यह अध्ययन छोटा है लेकिन इसका निष्कर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। सामान्य तौर पर अधिकांश बच्चों में छह महीने में बहुत अच्छे परिणाम देखे गए लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एक अन्य संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ऐनी रोवले ने कहा कि सचमुच यह परिणाम खुशी देने वाले हैं लेकिन अभी यह रिसर्च खत्म नहीं हुआ है। हम आगे भी इन रोगियों पर अगले एक वर्ष तक निगरानी रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चे को टीका लगाने की भी अपील की।

मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम
मल्टी इन्फ्लामेटरी सिन्ड्रोम में शरीर में जहरीले तत्व उत्पन्न होने लगते हैं। ये पूरे शरीर में फैल जाते हैं इसका असर शरीर के अंगों पर पड़ता है। इससे शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं जिसकी वजह से बच्चों की मौत भी हो जाती है। यह बीमारी कोरोना वायरस से जूझ रहे बच्चों या फिर कोविड 19 से ठीक हुए बच्चों को हो सकती है। इस बीमारी में तेज बुखार आता है। इसके अलावा पेट में दर्द, लाल आंखे, लाल चकते, हाथ पैरों में सूजन, कमजोरी, उल्टी, डायरिया, ब्लड प्रेशर बढ़ना आदि भी इसके लक्षण हैं।

 

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