Doctors are suffering from burnout syndrome know its symptoms - बर्नआउट सिंड्रोम का शिकार हो रहे डॉक्टर,जानें क्या हैं इसके लक्षण DA Image
7 दिसंबर, 2019|2:58|IST

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बर्नआउट सिंड्रोम का शिकार हो रहे डॉक्टर,जानें क्या हैं इसके लक्षण

burnout syndrome

काम की लंबी अवधि, सुविधाओं के अभाव और वरिष्ठों की ओर से होने वाले दुर्व्यवहार के चलते सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर बर्नआउट सिंड्रोम का शिकार हो रहे हैं।

एक सप्ताह में रेजिडेंट डॉक्टरों को औसतन 88 घंटे काम करना पड़ता है, जो कि अन्य पेशों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। इंडियन जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में यह खुलासा किया गया है।  मुंबई के सरकारी अस्पतालों में हुए अध्ययन में शामिल रेजिडेंट डॉक्टरों की औसत आयु 27 वर्ष थी। इसमें 62 फीसदी डॉक्टर पुरुष और 38 फीसदी महिला डॉक्टर थीं।

रेजिडेंट डॉक्टरों के बर्नआउट को तीन मानकों में बांटा गया था, व्यक्तिगत बर्नआउट, कार्य संबंधी बर्नआउट और मरीज संबंधी बर्नआउट। अध्ययन के दौरान हुए सर्वेक्षण में 56.66 फीसदी रेजिडेंट में बर्नआउट के लक्षण दिखाई दिए। सबसे अधिक 66.67 फीसदी मामले व्यक्तिगत बर्नआउट के रहे। 

कार्य-संबंधी बर्नआउट के 57.14% मामले पाए गए। वहीं 16.67% मामले मरीज-संबंधी बर्नआउट के पाए गए। अध्ययन में पाया गया कि पुरुष डॉक्टरों के मुकाबले महिला डॉक्टरों में बर्नआउट के मामले ज्यादा हैं।

क्या है बर्नआउट सिंड्रोम
बर्नआउट सिंड्रोम ऐसी अवस्था को कहते हैं, जिसमें व्यक्ति शारीरिक रूप से थका होने के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी थक जाता है। इससे व्यक्ति की काम करने की क्षमता घट जाती है।  

भयावह है स्थिति
अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों का इतनी बड़ी संख्या में बर्नआउट होना बहुत भयावह है। अस्पतालों को काम और निजी जिंदगी का संतुलन बैठाना चाहिए। 

प्रमुख लक्षण- 
-आठ घंटे की नींद लेने के बाद भी थकान
-गहरी उदासी और डिप्रेशन
-ऑफिस पहुंचते ही तनाव बढऩा
-अति परफेक्शन की आदत
-गहरी असंतुष्टि की भावना

कैसे करें बचाव
-हमेशा अच्छा सोचें, अपने काम करने की जगह के आस-पास कुछ अच्छे मोटिवेशनल कोट्स लगाएं।
-सुबह उठने के बाद खुद से यह वादा करें कि आज चाहे कितनी भी समस्याएं आएं मैं शांतिपूर्ण ढंग से उनका समाधान ढूंढ लूंगा।
-अपनी रुचि से जुड़ कार्य करें, ऑफिस से बाहर दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने-जुलने का समय निकालें।
-जब कोई प्रोजेक्ट पूरा हो जाए तो छुट्टी लेकर कहीं घूमने-फिरने निकल जाएं।

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