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31 अक्तूबर, 2020|2:39|IST

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सर्दी में बढ़ेंगे डिप्रेशन के मामले, 'फील गुड' का एहसास भी होगा गायब

depression

अमेरिका के ज्यादातर शहरों में कोरोना का कहर थमता नजर आ रहा है। इससे लोग न सिर्फ नौकरी, बल्कि घूमने-फिरने के लिए भी घरों से बाहर निकल रहे हैं। समुद्री तटों से लेकर होटल-रेस्तरां तक में भीड़ देखने को मिल रही है। हालांकि, छह महीने के तनाव के बाद सामान्य जीवन बहाल होने से लोगों में ‘फील गुड’  का जो एहसास जगा है, वह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकने वाला। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीजेज के शोधकर्ताओं ने सर्दियों की दस्तक के साथ डिप्रेशन के मामले एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई है। शोध दल में शामिल राल्फ वाल्डो इमरसन ने बताया कि सर्दियों में आकाश घने कोहरे की चादर में लिपट जाएगा। पारा गिरने से लोगों का घरों से बाहर निकलना भी कम हो जाएगा।

ऐसे में कोरोना के काबू में आने से लौटा ‘ऑल इज वेल’ का एहसास भी धुंधलाने लगेगा। लोग फिर मायूसी और उदासी के दलदल में धंसने लगेंगे। इस अवस्था को ‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’ यानी ‘सैड’ के नाम से जाना जाता है। यह क्लीनिकल डिप्रेशन का ही एक रूप है, जो हर साल औसचन पांच फीसदी अमेरिकी वयस्कों को प्रभावित करता है।

इमरसन के मुताबिक धूप ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने और स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल के स्तर में कमी लाने में अहम भूमिका निभाती है। इससे व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वह डिप्रेशन के प्रकोप से महफूज रहता है। उधर, अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र की मानें तो सर्दियों में मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। 

छह महीने की मशक्कत के बाद प्रशासन ने कोरोना के प्रकोप पर तो काफी हद तक काबू पा लिया है, लेकिन वायरस से पैदा होने वाला डर, आर्थिक संकट और सामाजिक दूरी लंबे समय तक बरकरार रहने वाली है। इससे मानसिक सेहत में गिरावट आना लाजिमी है। ऐसे में लोगों को योग-अध्यात्म के अलावा रचनात्मक कार्यों के लिए समय निकालने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।

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  • Web Title:Depression cases will increase in winter feel good factor will also get disappear