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Daughter’s Day : बेटियों को कभी नहीं कहनी चाहिए ये 6 बातें, वरना डॉटर्स डे का नहीं रहेगा कोई मतलब

प्रतिमा जायसवाल ,नई दिल्ली Published By: Pratima Jaiswal
Sun, 26 Sep 2021 03:11 PM
Daughter’s Day : बेटियों को कभी नहीं कहनी चाहिए ये 6 बातें, वरना डॉटर्स डे का नहीं रहेगा कोई मतलब

बेटियां, बेटों से कम नहीं है। हम सभी यह बात कई बार कहते और सुनते हैं, लेकिन सिर्फ कहने-सुनने की बजाय बेटियों को भी इस बात का एहसास दिलाना बहुत जरूरी है कि वे किसी से भी कम नहीं हैं। कई बार ऐसा होता है कि गुस्से में माता-पिता बच्चों खासकर बेटियों को कुछ ऐसी बातें बोल देते हैं, जिन्हें सुनकर उनका हौंसला टूटता है। कई बार बेटियां खुद को बेटों से कमतर भी समझने लग जाती हैं। वहीं, रिश्तेदारों या आस-पड़ोस की मजाक में कही हुई बातें भी बेटियों को हीन भावना का शिकार बना देती हैं। ऐसे में हर माता-पिता ही नहीं बल्कि हर किसी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कुछ बातें मजाक में भी बेटियों से नहीं कहनी चाहिए। 

यह तो पराया धन है, दूसरे घर जाना है 
शादी करना या न करना भविष्य की बात है लेकिन हर बात पर बेटियों को यह नहीं कहना चाहिए कि वे पराया धन है और उन्हें दूसरे घर जाना है। ऐसा कहने से लगता है जैसे बेटियों का जन्म ही शादी करने के लिए ही हुआ है। 

 

पढ़-लिखकर क्या करेगी? घर ही संभालना है 
बेटियों को कभी न कहें कि उनके पढ़ने लिखने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि एक दिन तो उनकी शादी ही होनी है। ऐसी सोच रखने वाले माता-पिता को जान लेना चाहिए कि पढ़ना-लिखना सिर्फ नौकरी करने के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि खुद के विकास और दुनिया की समझ के लिए भी पढ़ाई जरूरी है। 


 

पति के घर से अर्थी ही उठेगी 
इस सीख में एक दकियानूसी सोच भी छुपी हुई है, जिसका सीधा-सा मतलब होता है कि ससुराल में चाहे कोई कुछ भी कहे या मारे-पीटे लेकिन आवाज न उठाना और घर छोड़कर मायके मत आना। यह बात आदर्शवाद बहू बनने के नाम पर लड़कियों के दिमाग में बैठा दी गई है, जिससे लड़कियां अत्याचार सहने को अपनी नियति मानकर चुप रह जाती हैं। 

 

लड़की हो, तो लड़की की तरह रहो 
महिला सशक्तिकरण की सारी बातें यहां पानी भरने लगती हैं। इसका मतलब यह है कि लड़की चुप और कमजोर ही सही लगती है इसलिए लड़की की काया की तरह नाजुक बनकर रहो। हिम्मत दिखाना लड़कियों का काम नहीं है। 

 

लड़कियों के लिए यह प्रोफेशन ठीक नहीं 
आज के समय में ऐसा कोई प्रोफेशन नहीं है, जो लड़कियों के लिए न हो। लड़कियां स्पेस में जाती हैं, प्लेन उड़ाती हैं। लड़कों की तरह ही उनके पास भी कई कॅरियर ऑप्शन हैं, इसलिए कभी भी लड़कियों को कमतर फील न कराएं। आपकी यह बात उन्हें निराश करती हैं। 

 

हमारे तो कर्म ही फूटे हैं
आमतौर पर कई लोग जाने-अनजाने लड़की पैदा होने पर ऐसी जली-कटी बातें बोलकर लड़कियों को एहसास दिलाते हैं कि लड़की होना बुरे कर्म की निशानी है। सच्चाई यह है कि लड़का हो या फिर लड़की, दोनों को अच्छी एजुकेशन और परवरिश चाहिए, जिससे कि वे आगे जाकर किसी अच्छे मुकाम पर पहुंच सकें। 

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