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19 जनवरी, 2021|5:59|IST

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मधुमेह रोगियों के संक्रमित होने पर पांच गुना बढ़ जाती है वेंटिलेटर की जरूरत

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मधुमेह रोगियों को यदि कोरोना संक्रमण हो जाए तो उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पांच गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में उन्हें विशेष चिकत्सकीय निगरानी में रखा जाना चाहिए। किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन के शोध में यह बात सामने आई है। यह शोध हाल में डायबिटीज रिसर्च एंड क्लीनिकल प्रेक्सिटस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 

आईसीयू की जरूरत :
शोधकर्ताओं ने पाया है कि मधुमेह पीड़ितों की आंखों पर सबसे पहले इसका असर दिखता है। ऐसा पहली बार है जब कोविड 19 और मधुमेह पीड़ित आंख के रोगियों के बीच सीधा संबंध सामने आया है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि डायबिटीज और नेत्ररोगी के कोरोना के इलाज में इन्ट्यूबेशन (वेंटिलेटर की जरूरत) का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों के संक्रमित होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है। इससे संक्रमण और अधिक बढ़ जाता है और उनकी जान तक जा सकती है। 

26 फीसदी को वेंटिलेटर की जरूरत :
कोरोना से पीड़ित करीब दो सौ लोगों पर अध्ययन के दौरान पता चला कि 67 लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी के शिकार थे। इनमें से करीब 26 फीसदी को गंभीर स्थिति के कारण वेंटिलेटर पर रखा गया था।

मुख्य शोधकर्ता एंटोनिला कोर्सिलो के अनुसार रेटिनोपैथी होना यानि आपकी आंखों की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे लोगों पर कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से असर करता है। उन्होंने कहा कि मधुमेह पीड़ितों को समय-समय पर अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए ताकि ऐसे संक्रमण के खतरे से बचा जा सके। 

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  • Web Title:covid-19: The need for ventilators increases five times when diabetes patient is infected with coronavirus