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13 अगस्त, 2020|1:43|IST

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Covid-19:जितना लंबा लॉकडाउन, उतना कमजोर होगा प्रतिरक्षा तंत्र, जानें क्या कहता है ये शोध

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कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन जितना लंबा खिंचेगा, लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र उतना ही कमजोर होता चला जाएगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर सुनेत्रा गुप्ता ने अपने हालिया विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है।

सोशल डिस्टेंसिंग की अति ठीक नहीं-
-सुनेत्रा ने कहा कि जरूरत से ज्यादा सोशल डिस्टेंसिंग भी अच्छी नहीं है। इनसान अगर एक-दूसरे से घुलेगा-मिलेगा नहीं तो वह कीटाणुओं और विषाणुओं के संपर्क में नहीं आएगा। इससे उसके शरीर में संक्रामक रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने वाले एंटीबॉडी नहीं पैदा होंगे।

प्रतिबंधों से पहले बनने लगे थे एंटीबॉडी-
-सुनेत्रा ने एक शोधपत्र के हवाले से दावा किया कि ब्रिटेन में बीते साल दिसंबर में ही सार्स-कोव-2 वायरस की दस्तक हो गई थी। इससे कुछ लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी भी बनने शुरू हो गए थे। लेकिन इंपीरियल कॉलेज के देश में कोरोना से पांच लाख से ज्यादा मौतों होने का अंदेशा जताने के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को लॉकडाउन की घोषणा करनी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सिमटकर रह गई।

वायरस का वार रोकना ही काफी नहीं-
-'द टेलीग्राफ' से बातचीत में सुनेत्रा ने कहा कि ब्रिटेन में लॉकडाउन के बावजूद 40 हजार से अधिक मौतें हुईं। यह इस बात का सबूत है कि लॉकडाउन संक्रामक रोगों से बचाव की गारंटी नहीं है। हम किसी वायरस की चेन को तभी तोड़ सकते हैं, जब सामुदायिक स्तर पर पूरी तरह से सबको अलग करना सुनिश्चित किया जा सके, वो भी काफी लंबे अरसे तक। इससे बेहतर है कि लोगों को बचाव के लिए प्रेरित कर घुलने-मिलने दिया जाए, ताकि उनमें एंटीबॉडी बने।

अतीत का हवाला-
-1918 में स्पैनिश फ्लू के दौरान भी लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लागू थे।
-इस महामारी ने विश्व में 05 करोड़ से अधिक लोगों की जान ली थी।

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  • Web Title:Covid-19: The longer the lockdown the weaker will be the immune system know what this new research says about immunity and lockdown