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Covid-19: 35 नहीं 90 दिन तक रहता कोरोना का असर, बरतें सतर्कता

प्रमुख संवाददाता ,कानपुरPublished By: Manju Mamgain
Sat, 03 Oct 2020 02:29 PM
Covid-19: 35 नहीं 90 दिन तक रहता कोरोना का असर, बरतें सतर्कता

कोविड हॉस्पिटल से ठीक होकर सामान्य जिन्दगी जी रहे कोरोना मरीजों पर फिर से खतरा पैदा होने लगा है। अब उन्हें सांस लेने और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर असर आने लगा है।

हैलट के कोविड हॉस्पिटल में दस दिनों से रोज कोरोना के पुराने मरीज डॉक्टरों के पास पहुंचने लगे हैं। डॉक्टरों को अब तक 23 मरीजों का फालोअप इलाज करना पड़ा है जिसमें दस मरीजों को मेडिसिन विभाग में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसलिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मरीजों को हालिया स्टडी का हवाला देकर साफ कर दिया है कि अभी खतरा टला नहीं है। कोरोना का असर 35 दिन नहीं 90 दिनों तक रहता है, इसलिए सभी को इतने दिनों तक अलर्ट रहना पड़ेगा। 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के पास जुलाई, अगस्त और दस सितम्बर तक कोविड हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किए गए सिम्टोमेटिक मरीज सांस लेने,कुछ दूर चलने पर थकान के साथ बैठने और सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने लगे हैं। ऐसे मरीजों में मुंह सूखने की भी तकलीफ सामने आ रही है इसलिए डॉक्टरों ने इनके लिए मेडिसिन में अलग बेडों का प्रावधान किया है ताकि उन्हें ड्रग थेरेपी से ठीक किया जा सके।

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों में फेफड़ों की पल्मोनरी धमनी खून के थक्के मिले हैं। एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे में तो कई मरीजों में इसके साक्ष्य सामने आए हैं इसलिए उन्हें निमोनिया की ड्रग थेरेपी दी जा रही है ताकि निमोनिया की स्थिति से उन्हें बचाया जा सके। ऐसे मरीजों को आने वाले सर्दी के मौसम में भी सतर्क रहना पड़ेगा क्योंकि धमनी में पहले बने थक्के एक्टिव होने के लक्षण सामने आ रहे हैं। 

नोट-
कोरोना का असर पहले 35 दिन माना जा रहा था लेकिन वह 90 दिनों तक रहता है। यहां पर जुलाई,अगस्त और सितम्बर के मरीज अब सांस की दिक्कतों पर आ रहे हैं। कई मरीजों का भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इन मरीजों पर स्टडी रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। -डॉ.प्रेम सिंह, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

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