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जीवन शैलीCovid-19: इलाज ना मिलने से ज्यादा मौतें खराब उपचार से हुई, अध्ययन में खुलासा

मदन जैड़ा,नई दिल्लीPublished By: Manju Mamgain
Mon, 01 Feb 2021 05:15 PM
Covid-19: इलाज ना मिलने से ज्यादा मौतें खराब उपचार से हुई, अध्ययन में खुलासा

देश में स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर स्थिति और खराब गुणवत्ता पर आर्थिक सर्वेक्षण में किए गए उल्लेख चौंकाने वाले हैं। इसमें अनेक अध्ययनों का जिक्र कर कहा गया है कि देश में इलाज नहीं मिलने के कारण होने वाली मौतों से ज्यादा खराब इलाज से होने वाली मौतें हैं। इसलिए ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सिस्टम की भांति स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मानक तय करने पर जोर दिया गया है। 

रिपोर्ट में वर्ष 2018 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि देश में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता नहीं होने के कारण 8,38,473 मौतें हुईं। लेकिन खराब इलाज के कारण 15,99,870 मौतें हुईं, जो करीब-करीब दोगुनी संख्या है। इसमें कहा गया कि देश में खराब स्वास्थ्य सेवाओं के कारण प्रति एक लाख पर 119-208 मौतें होती हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया कि यह संख्या पड़ोसी देशों में सबसे ज्यादा है। पाकिस्तान में इलाज नहीं मिलने से इसी अवधि में 6,53,334 तथा खराब इलाज के कारण 2,25,389 मौतें हुईं। जबकि बांग्लादेश में इलाज मिलने से 50,708 तथा खराब इलाज से 1,53,327, नेपाल में इलाज न मिलने से 73,047 तथा खराब इलाज से 1,31,744 तथा श्रीलंका में इलाज न मिलने से 45,547 तथा खराब इलाज से 51,422 मौतें हुई। 

निजी अस्पतालों में मृत्यु दर अधिक:
रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र जहां शहरी क्षेत्रों में 74 फीसदी ओपीडी एवं 65 फीसदी अस्पताल सेवाएं प्रदान कर रहा है, लेकिन वह विनियमित नहीं है। इसलिए निजी अस्पतालों में मृत्यु दर, पुन: भर्ती के मामले तथा उपचार की कीमत ज्यादा है। निजी अस्पतालों में नवजातों की मृत्यु दर 3.81 फीसदी पाई गई है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह महज 0.61 फीसदी है। इसी प्रकार निजी अस्पताल में पुन: भर्ती होने वाले मरीजों का प्रतिशत 70 फीसदी और सरकारी में 64 फीसदी है। 

दोबारा भर्ती पर इलाज अवधि अधिक:
सर्वे में कहा गया है कि पीएमजेएवाई के वर्ष 2019 के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पुन: भर्ती होने वाले मरीज अस्पताल में औसत 7.5 दिन ठहरते हैं, जबकि पहली बार भर्ती होने वाले औसतन 6.6 दिन। इसी प्रकार पुन: भर्ती होने वाले उपचार का प्रति मरीज क्लेम 19,295 रुपये दर्ज किया गया है, जबकि पहली बार में यह महज 12,652 होता है। 

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