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26 अक्तूबर, 2020|12:08|IST

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Covid-19:नाक बहने, छींक आने का मतलब कोरोना नहीं, जानें किस आयुवर्ग में दिखाई देते हैं कौन से लक्षण

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बच्चे को नाक बहने, बार-बार छींक आने या सीने में जकड़न की शिकायत हो तो घबराएं नहीं। जरूरी नहीं कि ये लक्षण आपके जिगर के टुकड़े के कोरोना संक्रमण की जद में आने का संकेत हों। मुमकिन है कि वह साधारण सर्दी-जुकाम या फ्लू से जूझ रहा हो। किंग्स कॉलेज लंदन के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर टिम स्पेक्टर ने ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है।

स्पेक्टर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे सर्दी-जुकाम से परेशान होकर बच्चे को कोरोना जांच के लिए अस्पताल लेकर न दौड़ें। इससे न सिर्फ टेस्टिंग की प्रक्रिया में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है, बल्कि संक्रमितों की समय रहते पहचान कर वायरस के प्रसार पर लगाम लगाने की कोशिशें भी प्रभावित हो रही हैं।

एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना जांच करवाने वाले कुल संदिग्धों में 25 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें टेस्टिंग की जरूरत ही नहीं थी। मामूली सर्दी-जुकाम होने पर भी उन्होंने मन की तसल्ली के लिए कोरोना जांच करवाई।

हर आयुवर्ग में अलग लक्षण
-स्पेक्टर ने बताया कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित अलग-अलग उम्र के मरीजों में अलग-अलग लक्षण उभर सकते हैं। 18 साल से कम और 65 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में बुखार, खांसी और सूंघने-स्वाद चखने की क्षमता कमजोर पड़ जाए, यह जरूरी नहीं जबकि इन तीनों ही लक्षणों को व्यक्ति के कोरोना पीड़ित होने की मुख्य निशानी करार दिया जाता है। ऐसे में नाक बहने या छींक आने मात्र पर कोरोना जांच के लिए दौड़ने का कोई फायदा नहीं है। यह समय और संसाधनों की बर्बादी भर है।

52% बच्चों को बुखार-जुकाम नहीं
-‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्रिटेन में 18 साल से कम उम्र के 52 फीसदी संक्रमितों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सूंघने की शक्ति कमजोर पड़ने जैसे लक्षण नहीं पनपे। वहीं, 33 प्रतिशत बच्चों में तो ऐप में दर्ज 20 में से एक भी लक्षण नहीं दर्ज किए गए। इसका मतलब यह है कि वे ‘एसिम्टोमैटिक’ थे। उनकी पहचान संक्रमित के संपर्क में आने के बाद हुई जांच के चलते की जा सकी। ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ पर ढाई लाख बच्चों का डाटा दर्ज है। इनमें 198 में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है।

90% स्वैब जांच के नतीजे नेगेटिव
-ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो देश में रोजाना दो लाख से अधिक संदिग्धों के स्वैब नमूने इकट्ठे किए जा रहे हैं। इससे जांच प्रक्रिया में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों का काम धीमा पड़ रहा है और रिपोर्ट में देरी की शिकायत लगातार बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि लगभग 90 फीसदी मामलों में स्वैब जांच की रिपोर्ट नेगेटिव आती है। यानी लोग जल्दबाजी में कोरोना जांच करवा रहे हैं। इससे जो वास्तविक रूप में संक्रमित हैं, उन लोगों की पहचान में देरी हो रही है और कोरोना की रोकथाम में मुश्किल आ रही है।

बच्चों में सबसे आम लक्षण-
-55% बच्चों को थकान, सुस्ती की शिकायत होती है
-54% में सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण उभरते हैं
-49% तेज बुखार और बदनदर्द का सामना करते हैं
-38% के गले में खराश होती है, 35% की भूख मिट जाती है

व्यस्कों में संक्रमण की निशानी
-87% वयस्कों में थकान, सुस्ती की समस्या पनपती है
-72% को सिरदर्द और चक्कर की शिकायत सताती है
-60% की सूंघने, स्वाद महसूस करने की क्षमता खो जाती है
-54% लगातार खांसी तो 49% गले में खराश की समस्या से परेशान रहते हैं

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  • Web Title:Covid-19: Runny nose sneezing does not mean person infected with coronavirus know which symptoms appear in which age group