DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   लाइफस्टाइल  ›  पोस्ट कोरोना सिंड्रोम स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी चुनौती

लाइफस्टाइलपोस्ट कोरोना सिंड्रोम स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी चुनौती

मदन जैड़ा,नई दिल्लीPublished By: Manju Mamgain
Tue, 01 Jun 2021 08:19 AM
पोस्ट कोरोना सिंड्रोम स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी चुनौती

दुनिया अभी कोरोना महामारी से जूझ रही है लेकिन इस बीमारी से जुड़े कई नए खतरे सामने आ रहे हैं। नए अनुसंधानों के अनुसार कोरोना संक्रमण ठीक होने के कुछ समय बाद कई लोगों में इसके दुष्प्रभावों के कारण अन्य बीमारियां हो रही हैं। इन बीमारियों के दीर्घकालिक उपचार की रणनीति बनानी होगी क्योंकि यह अनुमान है कि इससे मौजूदा स्वास्थ्य तंत्र पर 30 फीसदी का अतिरिक्त भार पड़ेगा। भविष्य में यदि कोरोना महामारी काबू में आ भी जाती है तो भी स्वास्थ्य तंत्र को तत्काल मजबूत बनाना होगा।

लॉन्ग कोविड या पोस्ट कोविड सिंड्रोम को चिकित्सा वैज्ञानिक एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में स्वास्थ्य संसाधनों पर पोस्ट कोविड बीमारियों से 30 फीसदी का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसलिए उन्हें इसके लिए तैयारी करनी चाहिए। 

पांच में से एक मरीजों में समस्या
शोध में कहा गया है कि ब्रिटेन में अस्पताल में भर्ती होकर ठीक हुए पांच में से एक और अमेरिका में 10 संक्रमितों में से एक व्यक्ति को कोरोना ठीक होने के कुछ समय बाद कई तरह की बीमारियों अथवा दिव्यांगता का सामना करना पड़ रहा है। भारत में भी यह पाया गया है। इतना ही नहीं भारत में यह भी देखने में आ रहा है कि जो लोग अस्पताल में भर्ती नहीं हुए और घर में ही ठीक हो गए हैं। उनमें से भी कुछ लोगों को एक-दो महीने के बाद शारीरिक समस्याएं आ रही हैं तथा अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ रही है।

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं पोस्ट कोविड खतरों को लेकर चिंताएं जाहिर की गई हैं। क्योंकि, ठीक होने के बाद भी लोग शारीरिक स्थिलता, आंशिक दिव्यांगता, मानसिक बीमारियों, फेफड़ों एवं दिल संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। जो लोग पहले से मधुमेह और अन्य बीमारियों से ग्रस्त थे उनकी बीमारी का स्तर और खराब हुआ है। इसमें से कई बीमारियों का आगे भी इलाज जारी रखने की जरूरत होगी।

यह तय है कि इससे स्वास्थ्य तंत्र में अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। हालांकि, यह 30 फीसदी होगा या इससे ज्यादा या कम होगा, यह कम से कम भारत के संदर्भ में अभी कहना मुश्किल है, फिर भी यह एक नई चुनौती है और इससे निपटने के लिए तैयारी करनी होगी। लॉन्ग कोविड या पोस्ट कोविड उपचार की रणनीति तैयार करनी होगी।

संबंधित खबरें