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कोरोना से जंग जीतने में मदद कर सकती है नेजल वैक्सीन, जानें क्या है नेजल वैक्सीन और कैसे करती है काम

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Manju Mamgain
Thu, 10 Jun 2021 11:15 AM
कोरोना से जंग जीतने में मदद कर सकती है नेजल वैक्सीन,  जानें क्या है नेजल वैक्सीन और कैसे करती है काम

भारत में आखिरकार कोरोना की दूसरी लहर में गिरावट दिख रही है और सरकार लोगों को टीका लगाने और उन्हें घातक वायरस की तीसरी लहर से बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इसी क्रम में टीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और उन्हें जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि देश में नेजल वैक्सीन (नाक से दी जाने वाली) बनाने पर शोध जारी है। उन्होंने कहा कि अगर यह शोध कामयाब हुआ तो टीकाकरण की मुहिम में और तेजी आएगी। आइए जानते हैं कि नेजल वैक्सीन क्या है और यह कैसे काम करती है।

क्या है नेजल वैक्सीन और कैसे काम करती है
नेजल स्प्रे का लक्ष्य होता है कि वैक्सीन के डोज को सीधा सांस के रास्ते पहुंचाया जाए ताकि यह वैक्सीन सीधा उस जगह को अपना निशाना बनाए जहां से कोविड-19 इंफेक्शन शरीर को अपने चपेट में लेना शुरू किया था। कोरोना के ज्यादातर मामलों में यह देखने को मिला है कि वायरस म्यूकोसा के माध्यम से शरीर मे प्रवेश करता है और म्यूकोसल मेमब्रेन में मौजूद कोशिकाओं और अणुओं को संक्रमित करता है। ऐसे में हम अगर नाक के माध्यम से वैक्सीन देंगे तो यह काफी प्रभावी हो सकती है। इसीलिए दुनिया भर में नेजल यानी नाक के जरिए भी इस वैक्सीन को देने के विकल्प के बारे में सोचा जा रहा है और इस पर शोध चल रहा है। 

चार बूंद लेनी होगी
सूई वाले टीके केवल निचले फेफड़ों तक की रक्षा करते हैं, ऊपरी फेफड़े और नाक की रक्षा नहीं की जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आप नेजल वैक्सीन की एक खुराक भी लेते हैं तो आप संक्रमण को रोक सकते हैं। इससे आप संक्रमण की चेन को तोड़ सकेंगे। इसलिए केवल चार बूंद लेनी होगी। यह ठीक पोलियो की तरह, एक नथुने में दो और दूसरे में देा ड्रॉप।

यह हैं फायदे
- इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- इंजेक्शन नहीं होगा तो हेल्थवर्कर्स को ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होगी।
- नाक के अंदरूनी हिस्सों में प्रतिरक्षा तैयार होने से सांस से संक्रमण का खतरा कम होगा।
- नेजल वैक्सीन का उत्पादन आसान होगा, जिससे वैक्सीन वेस्टेज की संभावना घटेगी।
- इसे अपने साथ कहीं भी ले जा सकेंगे, स्टोरेज की समस्या कम होगी।

इंजेक्शन वाली वैक्सीन से अलग कैसे
टीका लगाने के अलग-अलग तरीके होते हैं।। कुछ टीके इंजेक्शन के जरिए दिए जातें है तो कुछ ओरल दिए जाते हैं। जैसे पोलियो और रोटावायरस वैक्सीन। वहीं कुछ वैक्सीन नाक के जरिए भी दी जाती हैं। इंजेक्टेड वैक्सीन को सुई की मदद से हमारी त्वचा पर इंजेक्ट कर लगाया जाता है। वहीं नेजल वैक्सीन को हाथों से या मुंह के जरिए नहीं नाक के जरिए दिया जाता है। इसके माध्यम से म्यूकोसल मेम्ब्रेन में मौजूद वायरस को निशाना बनाया जाता है। वहीं, इंट्रामस्क्युलर टीके या इंजेक्शन, म्यूकोसा से ऐसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने में सफल नहीं हो पाते हैं और शरीर के अन्य भागों से प्रतिरक्षा पर निर्भर करते हैं।

भारत बायोटेक बना रहा है नाक वाली वैक्सीन
भारत बायोटेक देश में नेजल वैक्सीन बना रहा है। वर्तमान में इसका पहल़े चरण का ट्रायल चल रहा है। अप्रैल में ही हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी की इंट्रानेजल वैक्सीन, बीबीवी154 के पहले चरण के परीक्षण की मंजूरी मिली थी। यह मंजूरी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की विशेषज्ञ समिति द्वारा दी गई है। माना जा रहा है कि तीन से चार महीने में दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण हो जाएगा। गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने कोरोना की इंजेक्शन वाली वैक्सीन कोवैक्सीन बनाई है। कोवैक्सीन का इस्तेमाल देश में टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है।


नेजल वैक्सीन अगर सफल हो जाती है तो यह हमारे लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि इसे आप खुद भी ले सकते हैं।
डॉ. वीके पाल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग 

कनाडा की सैनोटाइज ने भी नेजल स्प्रे बनाया 
 कनाडा की कंपनी सैनोटाइज ने दावा किया है कि उसने ऐसा नेजल स्प्रे बनाया है जो 99.99 फीसदी कोरोना वायरस को खत्म कर देता है। इस कंपनी का दावा है कि यह स्प्रे कोरोना से बीमार लोगों को जल्दी ठीक कर देगा। कंपनी ने कहा कि उनका नाक में डालने वाला स्प्रे हवा में ही कोरोना वायरस को खत्म करना शुरू कर देता है। इस नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे को मरीजों को खुद अपनी नाक में डालना होता है। यह नाक में वायरल लोड को कम कर देता है.।इससे न तो वायरस पनप पाता है और न ही फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचा पाता है। इस नेजल स्प्रे का परीक्षण अमेरिका और ब्रिटेन में सफल रहा है। सैनोटाइज का दावा है कि नेजल स्प्रे ने 24 घंटे के भीतर वायरल लोड को 95 फीसदी घटाकर कम कर दिया। इतना ही नहीं 72 घंटों में 99 फीसदी वायरल लोड कम हो गया। 

कोडाजेनिक्स सीरम के साथ मिलकर बना रही 
पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और अमेरिकी कंपनी कोडाजेनिक्स मिलकर नाक से दी जाने वाली वैक्सीन बना रही हैं। वैक्सीन कैंडिडेट ने जानवरों पर अपना प्री क्लिनिकल ट्रायल पूरा कर लिया है। वर्तमान में इसका पहले चरण का परीक्षण चल रहा है। कोडाजेनिक्स के अनुसार कोवी वैक ने प्री-क्लिनिकल स्टडी में सेफ और इफेक्टिवनेस दिखाई है। 

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