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7 जून, 2020|12:36|IST

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Covid-19: सही सोच और सावधानी कर सकती है करोना का खात्मा, जानें कैसे

meditation

किसी भी बीमारी को दूर करने के लिए, उसके बारे में सही ज्ञान, सकारात्मक सोच एवं स्वस्थ जीवन आचरण आवश्यक है। आज के संघर्ष और तनाव के माहौल मैं, अधिकांश बिमारी साइकोसोमैटिक है। अर्थात ज्यादातर रोग दैहिक कमजोरियों से भी अधिक मानसिक दुर्बलता, नकारात्मकता, तनाव व अस्थिरता की वजह से उत्पन्न  और संक्रमित होते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है, अधिकतम आधुनिक बिमारियों की उपज दूषित सोच, तनाव, अशांति, अस्वच्छता एवं विक्षिप्त मानसिकता के कारण होती है।

समग्र विश्व में कोरोना के कहर को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस महामारी का फैलाव जितना इसके वायरस संक्रमण की वजह से हुआ है, उससे कई गुणा ज्यादा इस बिमारी के बारे में लोगों के बीच फैले भय, चिंता, आशंका, असावधानी व असतर्कता की वजह से भी हुआ है। इस तरह की नकारात्मक सोच एवं वृत्ति से लोगों में रोग प्रतिरोधक शक्ति भी कम हुई है । 

ऐसे में कोरोना संक्रमण के बारे में सही जानकारी व जागरूकता फैलाने के साथ-साथ लोगों में आत्म विश्वास, आशावादी भावना और मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को सदा स्वस्थ, संतुलित एवं सुरक्षित रखने के लिए, जरूरी है उनमें सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उचित आचरण एवं सात्विक जीवन शैली को विकसित किया जाए। 

कोरोना संकट से उभरने के लिए, लोगों को आंतरिक रूप से सशक्त करने की आवश्यक है। अर्थात, तन के रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए उपयुक्त परहेज, शुद्धि, सावधानी एवं सात्विक आहार के साथ साथ मन को भी नकारात्मक, निराशवादी, अशांत एवं अस्थिर  वृत्ति और भावनाओं से मुक्त रखने की आवश्यकता है। कमजोर भावनाएं ही मनबुद्धि को दुर्बल करते हैं, जिससे शरीर की इम्युनिटी पावर कम हो जाती है। तभी बाह्य जीवाणु, कीटाणु व विषाणु सहजता से व्यक्ति को अस्वस्थ एवं कई रोगों से ग्रसित करते हैं।  

दैहिक या भौतिक स्तर पर भी कोरोना संक्रमण की रोक थाम हेतु सभी आवश्यक बातों पर ध्यान देने के साथ, यह भी समझना महत्वपूर्ण है की, कोरोना वायरस के शिकार हुए लोगों के बारे में दुखद तथा भय फैलाने वाली जानकारियां आम जनता को बार-बार न बताई जाएं। बल्कि ऐसी जानकारी प्रसाशन, महामारी नियंत्रक तथा उपचारों को ही विशेष और विस्तृत रूप में उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। 

व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों को, कोरोना के बारे में इनफार्मेशन ओवरलोड यानी कोरोना संक्रमण से हुई हताहत वा नुकसान के बारे में विस्तृत सूचनाएं देने से बचना चाहिए। केवल सरोकारी एवं सकारात्मक जानकारियों को ही सार्वजनिक करें, ताकि पब्लिक की मनोस्थिति आशावादी, स्वस्थ एवं शक्तिशाली बने रहे। 

दूसरी बात, अपनी सुविधा अनुसार नियमित कुछ देर के लिए मैडिटेशन अवश्य करें। इससे मन, बुद्धि एवं शरीर को सम्पूर्ण व सर्वांगीण  स्वास्थ्य प्राप्त होगा। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता, आत्मबल, आत्मविश्वास एवं आत्म निर्भरता में वृद्धि होगी ।

यह मैडिटेशन एक सकारत्मक चिंतन प्रक्रिया है। इसमें मानसिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक रूप से इमेजिन (दृश्य निर्माण), विजुअलाइजेशन (चित्रण) एवं पॉजिटिव अफर्मेशन (पुष्टिकरण) किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में, जो भी स्वस्थ एवं सुखद जीवन व वातावण बनाना हम चाहते हैं, वह हम बना सकते हैं । दृढ़ संकल्प शक्ति के प्रयोग के साथ मन की एकाग्रता और बुद्धि में लक्ष्य को बार-बार चित्रित करके इच्छित लक्ष्य पा सकते हैं ।

ऐसी मैडिटेशन प्रक्रिया जिसका अभ्यास हम सहजता से उठते बैठते, चलते फिरते कर सकते हैं, उसे आध्यात्मिक ध्यान भी कहते है। उसे हम 'संकल्प से सृष्टि' रचने का प्रक्रिया भी कह सकते हैं। यह एक आध्यात्मिक विधि है, जिसके द्वारा हम जीवन में सभी प्रकार की सिद्धि को प्राप्त करते हैं।

चलें, कुछ देर के लिए हम इस मैडिटेशन विधि का अभ्यास करते हैं :-
इस आध्यात्मिक ध्यान प्रक्रिया में, सर्व प्रथम हम खुद को, भृकुटि के बीच एवं मस्तिष्क के मध्य भाग में विद्यमान एक अति सूक्ष्म चेतन दिव्य ज्योतिबिन्दु स्वरूप आत्मा देखें या विजुअलाइज करें। मनबुद्धि को अन्तरात्मा की उस दिव्य स्वरूप दर्शन में थोड़ी देर एकाग्र करें।

आगे, आत्मा का कोई एक मूल गुण जैसे कि आत्मिक शांति, प्रेम, पवित्रता, सुख या आनंद की चिंतन व अनुभूति में थोड़ी देर बुद्धि को स्थिर रखें।

धीरे धीरे अपने चिंतन को सभी मनुष्य आत्माओं के रूहानी पिता निराकार दिव्य ज्योतिबिन्दु स्वरूप परमात्मा के तरफ आकाश-महाकाश से परे पावन प्रकाश की दुनिया में ले जाएं। जहां मनबुद्धि द्वारा सभी आत्मिक गुणों के शास्वत स्रोत, परमपिता परमात्मा से असीम शांति और शक्ति को महसूस करें।

अनुभव करें जैसे कि ज्ञान सूर्य परमात्मा से पवित्रता, शांति व शक्ति की दिव्य किरणें मेरे चारों तरफ और अंदर उपस्थित सभी अशुद्धता, नकारात्मकता, जीवाणु, कीटाणु एवं विषाणुओं को जलाकर भस्म कर रही हैं। 

आगे महसूस करें, ये पावन किरणे मेरे शरीर, संसार एवं पृथ्वी के चारों तरफ एक शक्तिशाली आभा मंडल निर्माण कर सभी को सर्व, प्रकार के विकार, बुराई, बीमारी, व्यसन, विघ्न एवं समस्याओं से मुक्त कर रहा हैं।

मैडिटेशन में पुष्टि करें : 
"मैं आत्मा, परमात्मा के स्नेह और शक्ति के सूक्ष्म छत्रछाया के अंदर स्वस्थ एवं सुरक्षित हूं। मेरे परिवार, परिवेश, समाज, देश और समग्र विश्व, प्रकृति, पर्यावरण, वातावरण एवं जलवायु 'आत्मा-परमात्मा योग' की शक्ति से शुद्ध, स्वच्छ, स्वस्थ, समरस व सुखशांति सम्पर्ण बनते जा रहे हैं ।"

"कोरोना का नामो निशान समाप्त होता जा रहा है। यह महामारी अचानक आई है, अचानक इसे गायब हो जाना है। हमारे शक्तिशाली स्वस्थिति से संसार की विकट परिस्थिति, स्वस्थ व सुखद परिवेश में परिवर्तित होती जा रही है । शुभता, शुद्धता, स्वास्थ्य एवं समृद्धि का आगमन हुई है । सब कुछ ठीक होता जा रहा है।" 

ब्रह्मा कुमारी शिवानी

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  • Web Title:Covid-19: Know how Right thinking and caution can end corona virus tells Sister Shivani or Brahma Kumari Shivani