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12 अगस्त, 2020|6:54|IST

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डेंगू होने पर ठीक नहीं आती कोरोना की जांच, वैज्ञानिकों ने बताया कैसे मरीजों की स्क्रीनिंग में सावधानी जरूरी

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अगर कोई डेंगू पीड़ित मरीज कोरोना वायरस की चपेट में आ जाए तो उसकी जांच रिपोर्ट ठीक नहीं आतीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों बीमारियों के एंटीबॉडी के मिश्रित असर के कारण ऐसा होता है जो मानसून के मौसम में बड़ी चुनौती बन जाएगा क्योंकि तब डेंगू के मामले बढ़ने लगते हैं।  

यह महत्वपूर्ण जानकारियां एक ताजा अध्ययन से सामने आयी हैं जो चार भारतीय संस्थानों के संयुक्त प्रयास से हुआ। सीएसआईआर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कैमेकल बायोलॉजी, आईपीजीएमईआर, कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के शोधदल ने यह अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने डेंगू और कोरोना की एंटीबॉडी पर परीक्षण में पाया कि जांचों पर इन दोनों की एंटीबॉडी का मिलाजुला असर पड़ता है, जिसके कारण 14 में से 5 जांचों के रिजल्ट गलत आए। 

ऐसे मरीजों की कोरोना स्क्रीनिंग में सावधानी जरूरी 
 ऐसे में वैज्ञानिकों की सलाह है कि कोरोना की स्क्रीनिंग कराने के दौरान यह जान लेना आवश्यक है कि वह अभी या पूर्व में डेंगू से प्रभावित तो नहीं हुआ। अगर उस व्यक्ति को डेंगू हुआ था तो एंटीबॉडी जांच में कोविड पॉजिटिव आने की संभावना कम होगी। ऐसे में जरूरी है कि कोरोना की पुष्टि के लिए उस व्यक्ति की एंटीजन जांच करायी जाए। 

कोविड जांच गलती से पॉजिटिव आयी -
कोलकाता स्थित आईपीजीएमईआर संस्थान की डॉ. केयू बासु ने बताया कि शोध के दौरान कोरोना की एंटीबॉडी की परीक्षण डेंगू के एंटीजन पर किया गया, दो अलग-अलग जांच किट प्रयोग करने पर भी कोरोना रिजल्ट पॉजिटिव निकला जो कि गलत था। उन्होंने बताया कि डेंगू रोगी के एंटीजन में कोरोना वायरस की पहचान करना मुश्किल है।  

कोरोनाकाल : देश में ज्यादा बड़ा खतरा बन सकता डेंगू- 
कोरोना से जूझ रहे भारत समेत दुनिया के दूसरे देश जैसे पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, क्यूबा, आदि के लिए डेंगू एक बड़ा खतरा बन सकता है। विश्वस्वास्थ्य संगठन ने माना है कि महामारी के कारण डेंगू की रोकथाम के कार्यक्रमों पूरी तरह नहीं किए जा सके न ही इन कार्यक्रमों की निगरानी नहीं हो सकी है। जिस कारण घरों व अन्य जगहों पर डेंगू का लारवा ज्यादा मात्रा में पनपने का खतरा पैदा हो गया है। पिछले साल डेंगू के भारत और पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे।  

लॉकडाउन ने दिया लारवा पनपने का मौका -
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के ओलिवर ब्रेडी के मुताबिक, लॉकडाउन में दुकानें, दफ्तर आदि लंबे समय के लिए बंद रहे, जिससे वहां जमा हुए पानी में लारवा पनपने की अनुकूल स्थिति बनी।  

घर रहने से डेंगू का खतरा अधिक-
सिंगापुर राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी के मुताबिक, इस वक्त घरों में रह रहे लोगों को डेंगू का ज्यादा खतरा है। डेंगू का मच्छर घर के साफ पानी में फैलता है, जब लोग घरों में रहते हैं तो वे हर वक्त पूरा तन नहीं ढंकते जिससे इस मच्छर के हमले की आशंका अधिक है।  

खतरा : आंकड़ों की नजर से -
- 2 लाख डेंगू केसों की वृद्धि हुई पिछले साल भारत में, 25 राज्यों में संक्रमण बढ़ा ।    
- 4 अरब डॉलर का हर साल आर्थिक बोझ पड़ता है मच्छर जनित रोगों से भारत पर।
- 42 लाख डेंगू के मामलों के साथ साल 2019 सबसे खतरनाक साल रहा दुनिया में।  
- 7 लाख लोग मरते हैं हर साल मच्छरजनित रोगों से, इनमें डेंगू सबसे जानलेवा। 
(स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ें)

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  • Web Title:Covid-19:dengue patients Corona examination does not come accurate scientists suggests the way how to do careful screening