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18 अक्तूबर, 2020|11:01|IST

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Covid-19:कोरोना संक्रमण फैला सकती है आपकी मातृभाषा, जानें क्या कहता है यह चौंकाने वाला अध्ययन

coronavirus

रोजमर्रा की बातचीत करते वक्त लोग मातृभाषा का इस्तेमाल करते हैं। क्या आपको पता है आपकी मातृभाषा कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के लिए जिम्मेदार हो सकती है। दरअसल मॉस्को के आरयूडीएन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के हालिया अध्ययन के मुताबिक किसी देश की मातृभाषा का संबंध कोरोना वायरस के प्रसार से हो सकता है।

मातृभाषा में कुछ शब्द ऐसे होते हैं, जिनका उच्चारण जोर देकर किया जाता है। ऐसे में मुंह से ज्यादा मात्रा में संक्रमित बूंदें निकल सकती हैं, जिनसे संक्रमण का खतरा रहता है। 

विभिन्न पहलुओं पर किया गौर-
पिछले साल के आखिर में चीन में पहली बार कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद शोधकर्ताओं ने अलग-अलग पहलुओं से महामारी को देखा। आरयूडीएन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मानना है कि किसी देश में कोविड -19 मामलों की संख्या वहां संवाद की प्राथमिक भाषा में इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्दों के इस्तेमाल से संबंधित हो सकती है।

उनका पेपर 2003 में जापानी शोधकर्ता साके इनोई द्वारा किए गए उस अध्ययन पर आधारित है, जिसमें संक्रमित लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा के साथ मूल सार्स वायरस के प्रसार को जोड़ा गया। सार्स के प्रकोप के दौरान 26 देशों में कुल 8,000 मामले दर्ज किए गए।

क्या कहा शोधकर्ताओं ने-
अध्ययन में जापानी और अंग्रेजी की तुलना करते हुए शोधकर्ताओं ने इस तथ्य को रखा कि भाषाओं में कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनका उच्चारण जोर देकर होता है। ऐसे में वक्ता के श्वसन मार्ग से कुछ बूंदें निकलती हैं। यह संक्रमण के प्रसार की वजह बन सकती हैं। अमेरिका में इस तरह सार्स के 70 मामले थे, जबकि जापान में कोई मामला नहीं था।

इस तथ्य के बावजूद महामारी के दौरान चीन में जापानी पर्यटकों की संख्या अमेरिका के यात्रियों की तुलना में बहुत अधिक थी। आरयूडीएन के शोधकर्ताओं ने इसी सिद्धांत का प्रयोग कोविड-19 के प्रसार के मामले में भी किया। 

26 देशों के आंकड़ों पर आधारित शोध-
मेडिकल हाइपोथेसिस नामक पत्रिका में अगस्त में प्रकाशित उनके अध्ययन में 26 उन देशों के आधिकारिक आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें 23 मार्च तक संक्रमण के 1,000 से अधिक मामले पंजीकृत थे। इन देशों की भाषाओं को दो समूहों में विभाजित किया गया, जो कि तेज उच्चारण और कम उच्चारण के आधार पर थे।  जिन देशों में मुख्य रूप से समूह कि भाषा में जोर देकर बोलने वाले शब्द थे, उनमें संक्रमण के मामले थोड़े ज्यादा थे।

ऐसे देशों में 10 लाख निवासियों में 255 मामले अधिक देखे गए। इसके विपरीत कम उच्चारण वाले भाषा समूह की आबादी में यह संख्या 206 रही। प्रयोग की सीमाओं के बावजूद शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रयोग महामारी विज्ञानियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

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  • Web Title:Covid-19: Corona infection can be spread through your mother tongue know what this shocking study reveals