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30 अक्तूबर, 2020|1:36|IST

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Coronavirus Side Effects: शादी करने, परिवार बढ़ाने से कतराएंगे लोग, शोध में दावा

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कोरोना महामारी का हमारे समाज पर दीर्घकालिक असर दिखेगा। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर जन्मदर में कमी आएगी, वहीं युवा सपनों का साथी ढूंढने में परेशानियों का सामना करेंगे, जबकि महिलाएं अपने रंग-रूप पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित होंगी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।

शोधकर्ताओं ने 90 शोधपत्रों के विश्लेषण के आधार पर यह अनुमान लगाया कि कोविड-19 संक्रमण सामाजिक व्यवहार और लैंगिक परिस्थितियों में क्या बदलाव लाएगा। उन्होंने पाया कि संक्रमणकाल में शादियों की रफ्तार पहले ही धीमी पड़ गई है। ऊपर से स्वास्थ्य चिंताओं के चलते बड़ी संख्या में जोड़ों ने परिवार बढ़ाने की योजना टाल दी है। ऐसे में कई देशों की आबादी में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी।

मुख्य शोधकर्ता मार्टी हैसलटन ने बताया कि कोरोना संक्रमण के आर्थिक नतीजे भी सामने आएंगे। एक तरफ जहां युवाओं के लिए रोजगार के अवसर घटेंगे, वहीं स्वास्थ्य तंत्र पर बुजुर्ग आबादी की देखभाल का दबाव बढ़ेगा। यही नहीं, लॉकडाउन में घरेलू कामों का बोझ बढ़ने से लैंगिक भेदभाव की समस्या को भी बल मिलेगा।

हैसलटन ने चेताया कि कोरोना संक्रमण की काट जितनी देरी से मिलेगी, इसके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव उतने ही प्रबल होते जाएंगे। इनसान न चाहते हुए भी एक-दूसरे से दूर होता चला जाएगा। अध्ययन के नतीजे ‘प्रेसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

सपनों का साथी मुश्किल से मिलेगा
हैसलटन के मुताबिक कोरोनाकाल में लोगों को मनपसंद जीवनसाथी चुनने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। ‘वीडियो-डेटिंग’ की मजबूरी इसकी मुख्य वजह है। दरअसल, जूम कॉल पर होने वाली बातों-मुलाकातों में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि सामने वाले से सात जन्मों का रिश्ता निभेगा या नहीं।

ऐसे में शुरुआती दौर में आकर्षित होने के बाद लोग आमने-सामने मिलने का फैसला करते हैं तो मुमकिन है कि उन्हें केमेस्ट्री की कमी महसूस हो और वे पीछे हट जाएं।

महिलाओं की मुसीबत और बढ़ेगी
शोधकर्ताओं ने कहा कि पूर्व में आई महामारियों की तरह कोरोना लोगों को एक-दूसरे के करीब नहीं ला रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल की बाध्यता के चलते दया और अपनेपन का भाव लगातार घटता जा रहा है। महिलाओं पर तो कोरोना कुछ ज्यादा सितम ढा रहा है। यात्रा सहित तमाम तरह की पाबंदियों के चलते वे निजी-पेशेवर जीवन में तालमेल बैठाने में और भी ज्यादा मुश्किलों का सामना कर रही हैं। स्कूल बंद होने और ऑनलाइन पढ़ाई चलने से उनका काम कई गुना बढ़ गया है।

रंग-रूप पर ज्यादा ध्यान देने को होंगी प्रेरित
हैसलटन और उनके साथियों का अनुमान है कि कोरोनाकाल में घर-परिवार की बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते ऑफिस में महिलाओं का काम प्रभावित होगा। इससे वे या तो खुद करियर से ब्रेक लेने को मजबूर होंगी या फिर खराब प्रदर्शन के आधार पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि कोरोनाकाल में शारीरिक और आर्थिक स्तर पर मजबूत पुरुषों की संख्या घटेगी। ऐसे में महिलाएं उन्हें रिझाने के लिए अपने रंग-रूप पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित होंगी।

असर
-कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने 90 शोधपत्रों के विश्लेषण के बाद किया दावा
-लॉकडाउन में घरेलू कामों का दबाव बढ़ने से लैंगिक भेदभाव की समस्या को बल मिलेगा

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  • Web Title:Coronavirus Side Effects: a shocking research claims that due to coronavirus people will stop marrying and raising family here is the reason