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17 जनवरी, 2021|5:48|IST

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Covid-19: नाक से दिया गया कोविड का टीका होगा ज्यादा असरदार, शोध में दावा

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संक्रमण से सुरक्षा के लिए अगर कोविड-19 का टीका नाक या मुंह के जरिए दिया जाए तो यह ज्यादा कारगर होगा। महामारी विज्ञान से कई प्रख्यात वैज्ञानिकों ने ऐसा कहा है। उनका कहना है कि चूंकि कोरोना वायरस एक श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, इसलिए इंजेक्शन के बजाय अगर नाक से टीके की खुराक दी जाए तो यह नाक, गले और फेफड़ों में मौजूद वायरस पर सीधे हमला करेगी।  

इंपीरियल कॉलेज लंदन के महामारी रोग विशेषज्ञ रॉबिन शाटॉक का कहना है कि अगर कोरोना महामारी से पूरी तरह सुरक्षा पानी है तो हमें ऐसे टीके की जरूरत होगी, जिसके शरीर में जाने से नाक, गला और फेफड़ों में वायरस के खिलाफ ज्यादा एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा हो जाए। इसका सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीन का नाक के जरिए छिड़काव या नेजल स्प्रे है।

वहीं, वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के महामारी रोग विशेषज्ञ माइकल लुइस कहते हैं कि कोविड का शुरुआती टीका भले सुई से दिया जाएगा, लेकिन हमें इसकी दूसरी व तीसरी पीढ़ी का टीका नेजल स्प्रे वाला ही बनाना होगा, तब ही कोरोना संक्रमण को पूरी तरह थामा जा सकेगा वरना दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कम्युनिटी ट्रांसमिशन दिखता रहेगा।

असर जानने को ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक कर रहे शोध
नेजल स्प्रे वाला कोविड-19 का टीका बनाने पर क्या लाभ होंगे, यह पता लगाने के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शोध चल रहा है। 2021 की शुरुआत में इस शोध के परिणाम सामने आ जाएंगे। दूसरी ओर, इंपीरियल कालेज लंदन में जारी अध्ययन के शुरुआती परिणाम से पता लगा कि इंफ्लूएंजा की वैक्सीन नाक के जरिए दी जाए तो यह लोगों को इंफ्लूएंजा फ्लू से सुरक्षा देकर संक्रमण घटा सकती है। अब वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि क्या ऐसा कोविड-19 के टीके में भी संभव होगा। इस शोध के परिणाम 2021 के मध्य तक आएंगे।  

दूसरी पीढ़ी का कोविड टीका हो सकता है नेजल स्प्रे
कोरोना वायरस का पहला टीका बनाने की रेस में जितनी निर्माता कंपनियां लगी हैं, वे सभी इंजेक्शन विधि द्वारा दिया जाने वाला टीका तैयार कर रही हैं। इन्हीं कंपनियों ने दूसरी जेनरेशन का टीका बनाने के लिए नेजल स्प्रे के विकल्प पर शोध शुरू कर दिया है। टीका निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनिका ने भविष्य में नेजल स्प्रे वैक्सीन बनाने की बात कही है।

सुई लगाने की जगह स्प्रे से टीका देने के कई लाभ
कम खर्च : सिरिंज की जरूरत नहीं पड़ेगी, कम तापमान पर स्टोर नहीं करना पड़ेगा। कम खर्च होगा और ऐसी वैक्सीन को ज्यादा आसानी से दूर तक पहुंचाया जा सकेगा।
कम मेहनत : स्प्रे वाला कोविड वैक्सीन के टीकाकरण में बहुत बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मियों की जरूरत नहीं पड़ेगी और यह टीका कम समय में लग सकेगा।
एक खुराक काफी:  अभी जो कोविड के टीके बन रहे हैं, उनमें से ज्यादातर टीकों की दो खुराक दिए जाने की जरूरत है, जबकि नेजल स्प्रे में ऐसा नहीं होगा। एक खुराक काफी होगी।
डर नहीं : कई सर्वे बता चुके हैं कि कोरोना के संभावित टीके को लेकर लोगों में बहुत आशंकाएं हैं। ऐसे में सुई की जगह स्प्रे विधि का टीका लोगों का डर कम करेगा।

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  • Web Title:Coronavirus Nasal Vaccine Research: recent research claims coronavirus vaccine given by nose will be more effective