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हिंदी न्यूज़ लाइफस्टाइलकोरोना वायरस: जानें संक्रमण के लिहाज से कैब-मेट्रो में ट्रैवल करना कितना सुरक्षित?

कोरोना वायरस: जानें संक्रमण के लिहाज से कैब-मेट्रो में ट्रैवल करना कितना सुरक्षित?

Corona Virus- How safe it is to be travel by metro or cabs: चीन के वुहान शहर से निकलकर दुनियाभर में मौत का तांडव मचाने वाला कोरोना वायरस अब तक लगभग 70 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। इस वायरस से...

कोरोना वायरस: जानें संक्रमण के लिहाज से कैब-मेट्रो में ट्रैवल करना कितना सुरक्षित?
Manjuहिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSun, 15 Mar 2020 03:23 PM
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Corona Virus- How safe it is to be travel by metro or cabs: चीन के वुहान शहर से निकलकर दुनियाभर में मौत का तांडव मचाने वाला कोरोना वायरस अब तक लगभग 70 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति में थकान, सूखी खांसी, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अब तक के सबसे खतरनाक इंफेक्शन्स में अपना नाम दर्ज करवा चुके कोरोना की वजह से दुनिया भर में अब तक करीब 91 हजार से ज़्यादा लोग इस इंफेक्शन का शिकार हो चुके हैं, जबकि 3000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है। लोगों में इस वायरस का डर इतना ज्यादा है कि वो अब कैब और मेट्रो से भी ट्रैवल करने में संकोच महसूस कर रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि क्या वाकई कैब-मेट्रो में ट्रैवल करने से व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है? या फिर कैब और मेट्रो में ट्रैवल करते समय खुछ खास उपाय करके कोरोना नाम के वायरस से बचा जा सकता है। 

क्या कैब-मेट्रो में ट्रैवल करना सुरक्षित है?
कोरोना वायरस पर किए गए अब तक के सभी शोध में इस बात का पता नहीं चल पाया है कि इस वायरस के फैलने का ठोस कारण क्या है। हालांकि कोरोना से मिलते जुलते वायरस पर किए गए शोध में इस बात का खुलासा हो चुका है कि इस तरह का वायरस संक्रमित व्यक्तियों के खांसने या छींकने से हवा में आए उनकी लार के छींटों के संपर्क में आने से फैल सकता है। गौरतलब है कि संक्रमित व्यक्तियों के मुंह से निकले ये छींटें जब ट्रेन के हैंडल, सीटें, कैब का दरवाजा खोलते समय उसकेले हैंडल आदि पर लगते हैं तो इन जगहों को छूने वाला व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है।

कैसे होता है कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित-
संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकलें ये छींटें जब ट्रेन के हैंडल, सीट, कैब के खोलने वाले हैंडल आदि पर गिरते हैं तो इन जगहों को छूने वाला व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का पता चला है कि व्यक्ति एक घंटे में ही अंजाने में कई बार अपने हाथों से अपने मुंह, नाक और दांत को छूता है। संक्रमित जगह को छूने के बाद जब व्यक्ति अपनी आंख,नाक और मुंह को छूता है तो खुद भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है। इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ से जुड़ीं डॉ. लारा गोस्के के अनुसार उनके द्वारा किए गए एक शोध में इस बात का पता चला है कि जो लोग रोज मेट्रो से सफर करते हैं, उनके फ़्लू जैसे रोग से ग्रसित होने की संभावना ज़्यादा बनी रहती हैं। ब्रिटेन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र की गाइड लाइन के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति के पास होने का मतलब 15 मिनट तक संक्रमित व्यक्ति से दो मीटर की दूरी में अंदर रहने से है। ऐसे में बस या ट्रेन में सफर करने से इस वायरस की चपेट में आने का खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बस या ट्रेन लोगों से कितनी भरी हई है।