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एजेंसी,नई दिल्ली मुंबई। Published By: Anuradha Pandey
Sat, 22 Aug 2020 08:36 AM
कोरोना काल : गणेश चतुर्थी पर सावधानी के साथ पर्यावरण का भी ख्याल, गाय के गोबर और दाल के बीज से बनाए गए इको-फ्रेंडली गणेश

देश में 22 अगस्त से गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है। हर साल गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक पूरे देश खासकर महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की धूम रहती है। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े पंडालों को लगने की अनुमति नहीं दी है। लोगों को घर पर ही भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश है। इस बार लोग गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण का भी खासा ख्याल रख रहे हैं। 

ऐसी जगहों पर जहां मंडलों को छोटे पैमाने पर पंडाल लगाने की अनुमति है, वहां पुजारी के अलावा एक निश्चित संख्या में ही भक्त मौजूद रह सकते हैं। इस दौरान सामाजिक दूरी, मास्क लगाना और सैनेटाइज जैसे कई मानकों का पूरा ध्यान रखना होगा। वहीं, कई आयोजकों ने इस साल फेसबुक, गूगल व जूम वीडियो के जरिए भक्तों को भगवान गणेश के वर्चुअल दर्शन उपलब्ध कराने के लिए तैयारियां की हैं।

गाय के गोबर और दाल के बीज से बनाए गए इको-फ्रेंडली गणेश
गुजरात के वडोदरा और हैदराबाग में गणेशोत्सव के लिए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यहां गाय के गोबर से तैयार की गई इन मूर्तियों का विसर्जन पानी से भरे टब में आसानी से किया जा सकेगा, इससे तैयार घोल खाद के रूप में पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, कोयंबटूर में एक मूर्तिकार ने ऐसे ही दाल के बीज से भगवान गणेश की मूर्ति बनाई है, जो एक घंटे के भीतर पानी में घुल जाएगी।

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