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जीवन शैलीएंग्जाइटी डिसऑर्डर क्या है जिससे नेगेटिव इमेजिनेशन में जीने लगते हैं लोग! जानें लक्षण और इलाज के उपाय 

लाइव हिन्दुस्तान टीम ,नई दिल्ली Published By: Pratima Jaiswal
Sun, 21 Mar 2021 03:19 PM
एंग्जाइटी डिसऑर्डर क्या है जिससे नेगेटिव इमेजिनेशन में जीने लगते हैं लोग! जानें लक्षण और इलाज के उपाय 

कहते हैं एक छोटी-सी सी बात कभी-कभी जीवन में उलझन खड़ी कर देती है। कोई एक घटना जिसे हम भूलने या इससे सबक लेकर आगे बढ़ने की बजाय इसके बारे में नकारात्मक बातें सोचते हुए अपने भविष्य को जोड़ने लगते हैं। कभी-कभी तो हमारे मन में ऐसी काल्पनिक दुनिया या सोच का फ्लैशबैक चलने लगता है, जिससे हम अपने साथ अपने आसपास के लोगों का जीवन भी खराब कर बैठते हैं। ऐसी परिस्थिति को एंग्जाइटी डिसऑर्डर के नाम पर जाना जाता है, जब हम लगातार घटित-अघटित बातों सोचते हुए अपने नकारात्मक नतीजे निकालने लगते हैं। 


क्या है एंग्जाइटी डिसऑर्डर
हर समय चिंता, बेचैनी, वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित भविष्य का डर  तन और मन, दोनों पर बुरा असर डालता है। एंग्जाइटी के प्रमुख लक्षण थकान, सिरदर्द और अनिद्रा हैं। व्यक्ति विशेष के लिए यह लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं, लेकिन स्थायी डर और चिंता सभी में देखे जाते हैं, अगर यह लक्षण तीव्र नहीं हैं तो समय बीतने के साथ समाप्त हो जाएंगे, वरना एंग्जाइटी डिसऑर्डर हो जाता है और रोजमर्रा का जीवन और कार्य करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।


एंग्जाइटी डिसऑर्डर है के सामान्य लक्षण 
- शारीरिक कमजोरी।
- याददाश्त कमजोर पड़ जाना।
- लगातार चिंतित रहना।
- एकाग्रता में कमी आना, आंख के आगे तैरते हुए बिंदु दिखायी देना।
- घबराहट, डर और असहजता महसूस होना।
- नकारात्मक विचारों पर काबू न होना व अप्रिय सपने दिखना।
- सोने में समस्या होना।
- हाथ-पैरों का ठंडा हो जाना, माथा गर्म रहना , रात में अचानक उठ जाना।
- दिल की धड़कनें तेज हो जाना।
- स्थिर और शांत न रह पाना।
- मांसपेशियों में तनाव होना।
- पेट में हलचल महसूस होना।

 

इन उपायों को आजमाएं 


जीवनशैली में बदलाव
एंग्जाइटी से निजात पाने के लिए अस्त-व्यस्त जीवनशैली को सुधारना बेहद जरूरी है। नियमित समय पर खाएं और सोने तथा उठने का भी एक निश्चित समय बनाएं। नींद की कमी से मस्तिष्क अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा से एंग्जाइटी और अवसाद जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

 

साइकोथेरेपी
साइकोथेरेपी का उपयोग मानसिक रोगों या भावनात्मक आघातों के लिए किया जाता है। मरीज से विस्तार से बात कर मानसिक अवस्था का अध्ययन किया जाता है। इससे रोगी को परिस्थितियों से तालमेल बिठाने व मस्तिष्क को शांत करने में मदद मिलती है।


सोच में बदलाव, मन पर लगाम 
भविष्य किसी ने नहीं देखा है लेकिन दुनिया के सभी लोग एक उम्मीद पर जी रहे हैं कि फ्यूचर, पास्ट से बेहतर ही होगा, इसलिए किसी एक घटना की वजह से नेगेटिव सोचने की वजह पॉजिटिव सोचें। सम्बधित लोगों से बात करें और जीवन को जीना सीखें। 
 

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