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12 जनवरी, 2021|6:10|IST

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अक्सर महसूस करते हैं बेचैनी तो रोजाना खुद से करें 10 मिनट पॉजिटिव बातें, दूर होगी परेशानी

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क्या कोरोनाकाल में अपनों से दूर रहने की मजबूरी ने आपको अकेला कर दिया है? क्या आप दिन-रात नौकरी गंवाने, वायरस की जद में आने या करीबियों से बिछड़ने के ख्याल से घिरे रहते हैं? अगर हां तो परेशान मत होइए। मन में आने वाले नकारात्मक विचारों पर काबू पाने के लिए रोज कम से कम दस मिनट खुद से सकारात्मक बातें करें। येल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ मनोविज्ञानी डैनियल कैसियोपो ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह सलाह दी है।

कैसियोपो के मुताबिक सकारात्मक सोच भविष्य को लेकर उम्मीदों का दामन नहीं छूटने देती। यह परेशानियों को अवसर के रूप में देखने का जज्बा पैदा करती है, जिससे इनसान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारता। कैसियोपो ने बताया कि सकारात्मक सोच स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर नियंत्रित रखने और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने में भी कारगर है। इससे उदासी, बेचैनी, जीवन से नाउम्मीदी और यहां तक कि खुदकुशी का ख्याल दूर रखने में मदद मिलती है। रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रल का स्तर काबू में रखने और महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने में भी इसकी अहम भूमिका पाई गई है।

नकारात्मक सूचनाओं से रहें दूर -
-कैसिपियो कहते हैं, सोशल मीडिया अपनों के संपर्क में रहकर ‘फील गुड’ करने का बेहतरीन जरिया है। बशर्ते इनसान दूसरों की खुशियों और जीवनस्तर से तुलना न करने लगे। न ही वह बुलिंग और नफरत भरे संदेशों के संपर्क में आए। अगर फेसबुक, व्हॉट्सएप या इंस्टाग्राम के इस्तेमाल से आपके मन में नकारात्मकता का भाव पैदा हो रहा है तो इन साइटों से कुछ दिन का ब्रेक लेने में ही भलाई है।

अपने सर्वश्रेष्ठ रूप की कल्पना करें-
-बकौल कैसिपियो, हर किसी के मन में अपने रंग-रूप, करियर, जीवनस्तर और संबंधों को लेकर एक सुनहरी तस्वीर खींची होती है। लगातार दो हफ्ते तक रोज पांच मिनट आंख मूंदकर उस तस्वीर को हकीकत में तब्दील होते देखना मूड सुधारने और सकारात्मक सोच अख्तियार करने में खासा असरदार साबित हो सकता है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए आत्मविश्वास और इच्छा-शक्ति में इजाफा होना इसकी मुख्य वजह है।

अच्छे अनुभवों को डायरी में उतारें-
-निजी या पेशेवर जीवन में मिली जिन चीजों के लिए ऊपरवाले के शुक्रगुजार हैं, उनके बारे में कुछ शब्द डायरी में जरूर दर्ज करें। कैसिपियो की मानें तो मन उदास होने पर जब आप इस डायरी के पन्ने पलटने बैठेंगे तो आपको भावनात्मक स्तर पर काफी मजबूती मिलेगी। आपमें भरोसा जगेगा कि पहले की तरह सब अच्छा होगा।

उदासी की वजहों से ध्यान भटकाएं-
-कैसिपियो सेहत, करियर या रिश्तों के उन पहलुओं को पहचानने की नसीहत देते हैं, जो रोजमर्रा के जीवन में उदासी का सबब बनते हैं। वह प्रत्येक समस्या की जड़ समझने को भी कहते हैं। अगर समस्या समाधान से परे नजर आए तो उस पर माथापच्ची करने के बजाय योग-व्यायाम या अन्य उपायों के जरिये ध्यान भटकाना ही बेहतर है।

सकारात्मक लोगों के संपर्क में रहें-
-आपकी खुशियों और जीवन से संतुष्टि का स्तर बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किन लोगों के संपर्क में रहते हैं। हर वक्त नकारात्मक भावों से घिरे वाले लोग आपको कभी यह महसूस ही नहीं होने देंगे कि आगे सबकुछ ठीक हो जाएगा। वहीं, सकारात्मक सोच का धनी व्यक्ति आपको हमेशा अच्छे की उम्मीद पाले रखने के लिए प्रेरित करेगा।

कोरोनाकाल में बढ़ा डिप्रेशन-
-कोरोनाकाल में 53 फीसदी वयस्कों ने मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट की बात स्वीकारी। 
-47 फीसदी में अकेलेपन, 36 फीसदी में अनिद्रा, 32 फीसदी में भूख मिटने की शिकायत पनपी।
(स्रोत : अमेरिका में हाउसहोल्ड पल्स सर्वे)

फायदेमंद-
-येल यूनिवर्सिटी के शीर्ष मनोवैज्ञानिक ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह नसीहत लोगों को दी है।
-नकारात्मक भावों पर काबू पाने, सुनहरे भविष्य की उम्मीद बनाए रखने में भी लोगों को मदद मिलेगी। 

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  • Web Title:Anxiety Disorders Stress and Anxiety: get rid of Constant restlessness just by doing 10 minutes positive talks with yourself Relaxation Skills for Anxiety feeling restless