AIIMS doing research on drug addicts - कानून से बचने वाले नशे के आदी लोगों पर एम्स कर रहा शोध DA Image
7 दिसंबर, 2019|12:24|IST

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कानून से बचने वाले नशे के आदी लोगों पर एम्स कर रहा शोध

alchohol is bad, photo : Shutterstock

कानून से बचने के लिए मादक पदार्थों में मिलावट कर नया नशा तैयार कर उसका सेवन करने वालों पर देश के छह शहरों में एम्स शोध कर रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने सोमवार को रेव पार्टियों में नई तरह के मादक पदार्थों के इस्तेमाल पर चिंता जताई।

एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के प्रमुख राकेश चड्ढा ने कहा कि नए ड्रग्स का इस्तेमाल नशे में बदलाव कर कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए होता है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि बाजार में बिकने वाली ‘न्यू साइको एक्टिव न्यू सब्सटेंस’ की खोज की जाए।

ये ड्रग्स गैर कानूनी तरीके से बाजार में बिक रही हैं। दरअसल भांग, हेलोजिंस और स्टिमुलेट तत्वों की मदद से कई तरह के मादक पदार्थ बनाकर बेचे जा रहे हैं। नशे के सौदागर इनकी डिजाइन बदल देते हैं ताकि गैर कानूनी रूप से प्रतिबंधित मादक पदार्थों की सूची में ये न आएं और कानून से बचकर धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल किया जा सके। एम्स में इस तरह के नशे की पकड़ के लिए नई किट लाई गई है। नई किट पेशाब की जांच में इस तरह के मादक पदार्थों का पता लगाएगी।

केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने चिंता जताई-
डॉ. राकेश ने कहा कि केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने चिंता जाहिर करते हुए इस तरह के नशे के आदी लोगों पर शोध के लिए अनुदान दिया है। ‘न्यू साइको एक्टिव न्यू सब्सटेंस’ ऐसी गैर कानूनी दवाएं होती हैं, जिनमें कानूनी रूप से मान्य दवाओं में नशे की ज्यादा मात्रा मिलाकर बेची जाती है।

इन दवाओं पर शोध करने से यह पता चल सकेगा कि रोगी को सही करने के लिए कितनी मात्रा में दवा देनी है और कौन सी मेडिसन रोगी पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को हम युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए तीन स्तर के सुझाव देते हैं।

पहले तो नशे की आपूर्ति बंद की जाए। इसके लिए शराब और तंबाकू उत्पाद को जरूरत से ज्यादा महंगा किया जाए। दूसरा लोगों में जागरुकता बढ़ाना, स्कूलों की किताबों में नशे से होने वाले नुकसान के बारे में छात्रों को जागरूक  किया जाए। तीसरा, काउंसलिंग और बेहतर उपचार मिलना।

20 फीसदी पुरुष नशे के आदी-
एम्स की चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. अंजू धवन ने कहा कि हाल ही में उनकी टीम ने पांच लाख से अधिक लोगों पर 180 जिलों में शोध किया था। इसमें पता चला कि 20 फीसदी पुरुष और 10 फीसदी महिलाएं नशे की लत के शिकार हैं। देश के युवा नशे के कारण गुस्से और अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं।  चिंताजनक बात है कि नशे की लत से 10 से 24 आयुवर्ग के युवा है। इससे वह खेल, पढ़ाई, सही आहार, व्यायाम और समाज से कटते जा रहे हैं।
 

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