आधे सिर में क्यों होता है दर्द? कंफ्यूजन दूर करने के लिए जान लें ये बातें
सिरदर्द होने के कई कारण होते हैं। ज्यादातर लोगों को कभी न कभी सिरदर्द होता ही है, लेकिन यह नॉर्मल होता है और अक्सर कुछ देर या कुछ घंटों में ठीक भी हो जाता है लेकिन आधे सिर का दर्द बहुत ही खतरनाक माना...

सिरदर्द होने के कई कारण होते हैं। ज्यादातर लोगों को कभी न कभी सिरदर्द होता ही है, लेकिन यह नॉर्मल होता है और अक्सर कुछ देर या कुछ घंटों में ठीक भी हो जाता है लेकिन आधे सिर का दर्द बहुत ही खतरनाक माना जाता है। इस तरह के सिरदर्द में बैचेनी और आंखों में भी दर्द होने लगता है। आधे सिर में दर्द होने के कई कारण हैं और ज्यादातर आधे सिर का दर्द तीन तरह का होता है।
आधे सिर में दर्द के कारण
साइनस इंफेक्शन।
ठीक से नींद ना ले पाना।
गहरी नींद आने के उपाय।
मोटापा।
गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव या गांठ बनना।
चिंता।
सिर दर्द की दवाएं अधिक लेना।
कैफीन युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करना।
डिप्रेशन।
एक समय का भोजन छोड़ना।
अन्य कई समस्याएं जो लंबे समय तक रहती हैं, जिसकी वजह से सिरदर्द हो सकता है।
टेंशन सिरदर्द
यह थकान इमोशनल स्ट्रेस और गर्दन व जबड़े से जुड़ी मांसपेशी या जोड़ में किसी प्रकार की समस्या होने के कारण होता है। यह दर्द सिर के किसी एक हिस्से में भी हो सकता है। यह दर्द किसी एक समस्या के बारे में सोचते रहने या बुरे अनुभवों को बार-बार सोचते रहने से होता है।
माइग्रेन
टेंशन वाले दर्द से ज्यादा खतरनाक दर्द माइग्रेन का होता है। माइग्रेन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में दो से तीन गुना ज्यादा होता है। हर व्यक्ति में माइग्रेन होने का कारण अलग-अलग हो सकता है, लेकिन माइग्रेन के शिकार लोगों में दर्द के अलावा कुछ लक्षण भी सामान्य होते हैं। इनमें थकान, नींद की कमी, इमोशनल स्ट्रेस जैसे लक्षण शामिल हैं।
क्लस्टर सिरदर्द
इसके मामले काफी कम देखे जाते हैं, लेकिन यह सभी प्रकार के सिर दर्द के मुकाबले ज्यादा गंभीर होता है। यह पुरुषों में महिलाओं से पांच गुना ज्यादा बार होते देखा गया है। क्लस्टर सिरदर्द किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह दर्द उन लोगों को ज्यादा होता है, जो स्मोकिंग करते हैं।
लेखक के बारे में
Pratima Jaiswalप्रतिमा जायसवाल एक दशक से ज्यादा वक्त से मीडिया क्षेत्र में काम कर रही हैं। जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ एनिमल वेलफेयर डिप्लोमा प्रोग्राम से जुड़ी हुई हैं। इनकी 'सत्यानाशी' और 'संजीवनी' नाम से कहानी संग्रह की दो किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रतिमा 'लाइव हिंदुस्तान' में जुड़ने से पहले 'दैनिक जागरण' डिजिटल में काम करती थीं। ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
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