
बुरी नजर से बचने के लिए क्या आप भी कहते हैं 'Touch Wood'? अंधविश्वास नहीं प्राचीन सभ्यता से जुड़ा है कनेक्शन
अगर आप सोच रहे हैं कि 'टच वुड' कहकर एकदम से लकड़ी छूने के लिए दौड़ना, किसी अंधविश्वास का हिस्सा है तो आपको बता दें, ऐसा बिल्कुल नहीं नहीं है। दरअसल, यह इंग्लिश फ्रेज अंधविश्वास से ज्यादा एक बहुत पुरानी मान्यता से जुड़ा हुआ है।
रोजमर्रा के जीवन में अकसर कई बार व्यक्ति के सामने कई ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं, जब उसे लगता है कि कहीं उसे खुद उसकी ही नजर ना लग जाए। भारत में लोग नजर उतारने के लिए कभी नींबू-मिर्ची का सहारा लेते हैं तो कभी थू-थू करना ही बेहतर समझते हैं। अगर आप इस विषय को थोड़ा और गहराई से देखें तो कुछ लोग खुद को नेगेटिविटी से दूर रखने के लिए अंग्रेजी के एक शब्द 'टच वुड' का जाने-अनजाने अकसर दिन में कई बार इस्तेमाल करते हुए नजर आते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि 'टच वुड' कहकर एकदम से लकड़ी छूने के लिए दौड़ना, किसी अंधविश्वास का हिस्सा है तो आपको बता दें, ऐसा बिल्कुल नहीं नहीं है। दरअसल, यह इंग्लिश फ्रेज अंधविश्वास से ज्यादा एक बहुत पुरानी मान्यता से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं उसके बारे में-
क्या है 'टच वुड' शब्द का इतिहास
'टच वुड' शब्द का जिक्र विदेशी लोककथाओं में सुनने को मिलता है। इतिहासकारों के अनुसार 'टच वुड' शब्द की शुरुआत प्राचीन 'पगान' सभ्यताओं से हुई थी। जिसमें सेल्टिक लोगों का विश्वास था कि पेड़ों पर आत्माएं और देवी-देवता वास करते हैं। ऐसे में किसी पेड़ को छूने पर वो खुद दैवीय शक्ति से जुड़ रहे होते हैं या बुरी आत्माओं की नजर से अपनी अच्छी किस्मत को बचा रहे होते हैं। लकड़ी को छूना उनके लिए एक तरह की सुरक्षा की प्रार्थना या आभार प्रकट करने का तरीका था।
क्रॉस से जोड़कर देखा जाता है 'टच वुड' की प्रथा को
कैथोलिक मान्यताओं के अनुसार, 'टच वुड' शब्द ईसाई धर्म की एक मान्यता से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें ईसा मसीह के क्रूस से जुड़ी 'पवित्र लकड़ी' को छूना शुभ माना जाता था। जिसकी वजह से चर्च या क्रॉस की लकड़ी को छूकर लोग ईश्वर का आशीर्वाद मांगते थे। धीरे-धीरे यह धार्मिक परंपरा यूरोप में फैलती गई और 'टच वुड' एक आम कहावत बन गई।
लकड़ी ही क्यों?
माना जाता था कि लकड़ी को छूने से व्यक्ति के भीतर की शुभ शक्तियां जाग जाती हैं, जो उसका नकारात्मकता से बचाव करती हैं। यह आदत इंसान और प्रकृति के बीच सम्मान और सामंजस्य का प्रतीक भी थी।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
ब्रिटिश फोल्कलोरिस्ट स्टीव राउड की किताब 'The Lore of the Playground' में इस शब्द का जिक्र मिलता है। 19वीं सदी का एक प्रचलित गेम 'टिगी टचवुड' था जिसमें बच्चे अगर लकड़ी को छू लेते थे, तो वह किसी भी तरह गेम से आउट होने से बच जाते थे। यह गेम उस दौरान बड़े लोगों के बीच भी काफी प्रसिद्ध रहा। स्टीव की किताब के अनुसार इस शब्द की शुरुआत को वहां से भी देखा जा सकता है। हालांकि, इस शब्द 'टच वुड' की शुरुआत कहां से हुई इसके बारे में कोई भी ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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