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रिलेशनशिप को नाम देने में लगता है डर, जानें क्यों होता है कमिटमेंट फोबिया और कैसे करें दूर?

यंग जनरेशन इन दिनों कमिटमेंट को लेकर समस्या से ग्रस्त है। जिसमे उसे किसी रिश्ते में बंधने और जिम्मेदारी उठाने और जवाबदेही से डर लगता है। ऐसे में क्या करें?

Aparajita लाइव हिन्दुस्तानWed, 12 June 2024 01:18 PM
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यंग जनरेशन इन दिनों कमिटमेंट फोबिया से जूझ रहा है। फोबिया यानी डर, जब किसी इंसान को जिम्मेदारी लेने, निभाने और किसी इंसान के प्रति जवाबदेही से डर लगने लगे तो यहीं कमिटमेंट फोबिया है। कमिटमेंट फोबिया इन दिनों यंग जनरेशन की प्रॉब्लम बनती जा रही है। इसलिए जानना जरूरी है कि आखिर इसका कारण क्या है और कमिटमेंट फोबिया को दूर कैसे किया जा सकता है। खासतौर पर लोग शादी जैसे लांग टर्म रिश्ते के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार नहीं समझते।

क्या है कमिटमेंट फोबिया

कमिटमेंट फोबिया को केवल रिश्ते से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। एक इंसान जब किसी फैसले को लेने में डरे जैसे कि कार खरीदना है या फिर नौकरी बदलना है। जो उसे कमिटमेंट फोबिया ही कहेंगे। ऐसे इंसान किसी से वादा करने और उसे पूरा ना कर पाने के डर से ग्रस्त होते हैं।

कमिटमेंट फोबिया के लिए ये कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

आत्मविश्वास की कमी

फैसला लेने और उसे पूरा ना कर पाने के डर का सबसे बड़ा कारण आत्मविश्वास की कमी है। जब इंसान को खुद के ऊपर, खुद के फैसलों पर भरोसा नहीं होता। तो वो कमिटमेंट फोबिया का शिकार हो जाता है।

लाइफ के कुछ अनुभव

कुछ लोगों की लाइफ में ऐसे अनुभव मिलते हैं जो काफी निगेटिव होते हैं। ऐसे एक्सपीरिएंस से डरकर इंसान आगे लेने वाले फैसलों के बारे में काफी दुविधा महसूस करता है और कमिटमेंट फोबिया का शिकार हो जाता है।

आसपास का माहौल

अपने घर या आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और समाज से अपने फैसले के तालमेल ना मिलने की वजह से भी अक्सर लड़के-लड़कियां जिम्मेदारी लेने और निभाने से डरते हैं।

कैसे दूर करें कमिटेंट फोबिया

कमिटमेंट फोबिया दूर करने का तरीका केवल खुद अपने पास होता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे में केवल अपने मन को समझाकर ही कमिटमेंट फोबिया को दूर किया जा सकता है।

अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने पर फोकस करें। ऐसे काम को पूरा करें जो आप कर सकते हैं। ये सारी चीजें कॉन्फिडेंस बढ़ाने में मदद करती हैं और आप फैसले आसानी से ले पाते हैं।

खुद को समझाएं कि जरूरी नहीं कि एक फैसला गलत हो गया तो सारे फैसले गलत ही हो।

इसके साथ ही कई बार अपने दोस्तों, माता-पिता या सबसे खास रिश्तेदारों से बात करना भी मदद कर सकता है।

अपनी बातों को, मन में आ रहे डर को साथी के साथ शेयर करें। जिससे कि उसे समझाकर दूर किया जा सके।

मनोचिकित्सक की थेरेपी भी इसमे मदद करती है और कमिटमेंट फोबिया को दूर करती है। इसलिए काउंसिलिंग से दूर ना जाए।

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