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बेटी की शादी से पहले बताने में बिल्कुल ना झिझकें ये 5 बातें, खुशहाल रहेगी शादीशुदा जिंदगी

Advice mother should give to daughters: अगर शादीशुदा जीवन से जुड़ी कुछ बेहद जरूरी बातें उससे ना कहीं जाए तो बेटी खुद को ससुराल में अकेला महसूस करने के साथ परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्य बिठाने में भी मुश्किल महसूस करती है।

Manju Mamgain लाइव हिन्दुस्तानTue, 18 June 2024 01:41 PM
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Advice mother should give to daughters: यूं तो सभी माता-पिता के लिए अपने बच्चों की शादी का दिन बेहद खास होता है। लेकिन यह दिन तब और ज्यादा खास बन जाता है, जब वो अपनी लाडली को उसके सपनों के राजकुमार के साथ विदा करने की तैयारी कर रहे होते हैं। आमतौर पर शादी से कुछ दिन पहले ही पेरेंट्स अपनी बेटी को बहुत कुछ समझाने और सिखाने लग जाते हैं, ताकि ससुराल में उनकी बेटी को नए माहौल में एडजस्ट करने में कोई दिक्कत न हो। बावजूद इसके अगर शादीशुदा जीवन से जुड़ी कुछ बेहद जरूरी बातें उससे ना कहीं जाए तो बेटी खुद को ससुराल में अकेला महसूस करने के साथ परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्य बिठाने में भी मुश्किल महसूस करती है।

सम्मान की भावना-

परिवार में कई सदस्य ऐसे होते हैं, जो दूसरों की भावनाओं का विचार किए बिना ही जो मन में आए वो कह देते हैं। ऐसे में अपनी बेटी को पहले से ही समझाकर ससुराल भेजें कि परिवार में होने वाली छोटी-मोटी खटपट पर वो अपना संयम बनाए रखें। अगर बेटी को कोई बात ससुराल में बुरी लगती है तो सभी को सम्मान देते हुए अपने विचार दूसरों के सामने रखें। याद रखें गुस्से में कही गई कोई भी बात अपनी छवि और बात दोनों को ससुराल में खराब कर सकती है।

आर्थिक रूप से स्वतंत्र-

हो सकता है आपकी बेटी का ससुराल आपसे ज्यादा समृद्ध हो या फिर उसके पति की सैलरी इतनी अच्छी हो कि उसे कभी दोबारा काम करने की जरूरत ना पड़े। बावजूद इसके बेटी को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बने रहने का महत्व समझाएं। अगर वह अपनी जरूरतें अपने पैसों से पूरी करेगी तो उसे खासकर यह ताना कभी नहीं सुनना पड़ेगा कि उसने जो पहना हुआ है वह उसका खुद का खरीदा हुआ नहीं है।

रिश्ते को तोड़ना नहीं जोड़ना सीखें-

ससुराल जाने वाली बेटी को समझाएं कि परिवार में लड़ाई-झगड़ा होने पर सामने वाले की गलती निकालने से पहले खुद की गलती के बारे में भी सोचें। कहीं आप तो कोई गलती नहीं कर रहे हैं, रिश्ता तोड़ने की जगह जोड़कर रखने में विश्वास रखें।

रिश्तों को समय दें-

बेटी को समझाएं कि ससुराल में रचने बसने के लिए रिश्तों को थोड़ा समय देना पड़ता है। रातोंरात परिवार के किसी सदस्य के बारे में कोई राय ना बनाएं। एक या दो दिनों में ही यह कहना कि मुझे सास पसंद नहीं या ननद और देवर से चिढ़ है,गलत है।

दूसरे के नजरिए को भी समझें-

शादी के बाद यह जरूरी नहीं कि हमेशा गलती दूसरे लोगों से ही होगी। बेटी को दूसरे के नजरिए से भी चीजें देखना सिखाएं। बेटी को यह सिखाना जरूरी है कि दूसरे के नजरिए से किस तरह चीजों को देखते हैं। बेटी को यह समझाएं कि कभी-कभी उसकी गलती भी हो सकती है और यह समझने के लिए दूसरे व्यक्ति का क्या नजरिया है यह पहचानना जरूरी है।

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