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शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, महाशिवरात्रि पर न करें ये गलतियां

शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, महाशिवरात्रि पर न करें ये गलतियां

संक्षेप:

आस्था और परंपरा के इस मेल के दौरान यह जानना बेहद जरूरी है कि शिव पूजा के दौरान 'क्या करें और क्या नहीं। आइए जानते हैं शिव पूजन के दौरान किन 5 गलतियों को करने से बचना चाहिए।

Feb 11, 2026 06:46 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के व्रत का बेहद खास महत्व माना गया है। इस दिन भोले बाबा के भक्त शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें कई तरह के फल और फूल अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान शिव की पूजा करने के कुछ खास नियम बताए गए हैं। जिसमें 5 ऐसी गलतियों का भी जिक्र किया जाता है, जिन्हें शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए करने से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ये 5 गलतियां शिव पूजा के दौरान वर्जित मानी गई हैं। ऐसे में आस्था और परंपरा के इस मेल के दौरान यह जानना बेहद जरूरी है कि शिव पूजा के दौरान 'क्या करें और क्या नहीं। आइए जानते हैं शिव पूजन के दौरान किन 5 गलतियों को करने से बचना चाहिए।

शिवलिंग पर ये 5 चीजें चढ़ाना वर्जित माना गया है

1. केतकी के फूल

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करना बहुत शुभ माना गया है। लेकिन इसके विपरीत शास्त्रों में केतकी के फूल से भगवान शिव की पूजा करने की मनाही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था क्योंकि उसने ब्रह्मा जी के एक झूठ में उनका साथ दिया था। इसलिए, शिवलिंग पर कभी भी केतकी का फूल अर्पित न करें।

2. सिंदूर या कुमकुम

शिवलिंग वैराग्य और त्याग का प्रतीक है, जबकि सिंदूर और कुमकुम को सौभाग्य और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है जिसे स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं। महादेव संहारक और योगी हैं, इसलिए उन पर सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता।

3. तुलसी की पत्तियां

भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में इसका निषेध है। पौराणिक कथा के अनुसार, शिव जी ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था, जिसके बाद क्रोधित होकर तुलसी ने शिवजी की पूजा से खुद को दूर कर दिया। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं।

4. हल्दी चढ़ाना है वर्जित

सिंदूर व कुमकुम की तरह ही हल्दी का संबंध भी स्त्री सौंदर्य और सौभाग्य से माना जाता है। जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसलिए इस पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती। ऐसे में शिवरात्रि के दिन भूलकर भी शिवलिंग पर हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए।

5. शंख से जल

भगवान शिव ने शंखचूड़ राक्षस का वध किया था और शंख उसी की हड्डियों का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवजी के अभिषेक में शंख का प्रयोग वर्जित माना गया है।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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