इमोशनल मैच्योरिटी: वो 6 हुनर जो आपके बिखरते रिश्तों में जान फूंक सकते हैं

Jan 16, 2026 11:47 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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Emotional Maturity in Love : प्यार में मैच्योर होना मतलब यह नहीं कि आप कभी टूटेंगे नहीं। इसका मतलब है कि टूटने पर आप एक-दूसरे को दोष देने की जगह, साथ मिलकर संभलना जानते हैं। यही प्यार को गहराई देता है और रिश्ते को टिकाऊ बनाता है।

इमोशनल मैच्योरिटी: वो 6 हुनर जो आपके बिखरते रिश्तों में जान फूंक सकते हैं

अक्सर हम रिश्तों में केवल 'प्यार' को ही सब कुछ मान लेते हैं, लेकिन हकीकत में परिपक्वता वह आधार है जो उस प्यार को तूफानों के बीच भी थामे रखती है। यह खुद को सही साबित करने की जिद से ऊपर उठकर, दूसरे को समझने की उदारता दिखाने का नाम है। जब आप अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं और हर बात को व्यक्तिगत रूप से लेने की जगह स्थिति की गहराई को देखते हैं, तब आप सिर्फ एक बेहतर पार्टनर ही नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान भी बनते हैं। आसान शब्दों में समझें तो प्यार में इमोशनल मैच्योरिटी का मतलब यह नहीं होता कि आप कभी दुखी न हों, नाराज न हों या असुरक्षित महसूस न करें। इसका मतलब होता है कि आप अपनी भावनाओं को समझते हैं, उनकी जिम्मेदारी लेते हैं और उन्हें रिश्ते के खिलाफ हथियार नहीं बनाते। इमोशनल मैच्योरिटी वह क्षमता है, जहां प्यार सिर्फ भावना नहीं, बल्कि समझ, स्थिरता और सम्मान का अनुभव बन जाता है।

गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक, निदेशक और एक प्रमुख मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनाइट, कहती हैं कि इमोशनल मैच्योरिटी कोई परफेक्ट स्टेट नहीं है। यह एक प्रक्रिया है। इसमें सीखना भी होता है, गलती करना भी और फिर बेहतर करना भी। प्यार में मैच्योर होना मतलब यह नहीं कि आप कभी टूटेंगे नहीं। इसका मतलब है कि टूटने पर आप एक-दूसरे को दोष देने की जगह, साथ मिलकर संभलना जानते हैं। यही प्यार को गहराई देता है और रिश्ते को टिकाऊ बनाता है।

प्यार में इमोशनल मैच्योरिटी कैसे आती है?

जब प्यार सिर्फ एहसास नहीं, समझ भी हो

शुरुआती प्यार में भावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। सब कुछ नया, गहरा और रोमांचक लगता है। लेकिन जैसे-जैसे रिश्ता आगे बढ़ता है, तब असली परीक्षा शुरू होती है। यहीं इमोशनल मैच्योरिटी की जरूरत पड़ती है। मैच्योर प्यार में इंसान यह समझता है कि सामने वाला भी इंसान है, उसकी सीमाएं हैं, थकान है, डर है। हर बात को व्यक्तिगत अपमान या रिजेक्शन की तरह नहीं लिया जाता।

अपनी भावनाओं की जिम्मेदारी लेना

इमोशनली मैच्योर व्यक्ति यह नहीं कहता कि ‘तुम्हारी वजह से मुझे ऐसा महसूस हुआ।’ वह यह समझता है कि उसकी भावनाएं उसकी अपनी हैं। इसका मतलब यह नहीं कि पार्टनर का व्यवहार मायने नहीं रखता, बल्कि इसका मतलब है कि प्रतिक्रिया देने से पहले खुद को समझना जरूरी है। मैच्योर प्यार में इंसान भावनाओं को दबाता नहीं, लेकिन उन्हें बिना सोचे-समझे बाहर भी नहीं फेंकता।

कम्युनिकेशन में ईमानदारी और स्पष्टता

इमोशनल मैच्योरिटी का बड़ा संकेत साफ बातचीत भी है । इमोशनली मैच्योर लोग इशारों में बात नहीं करते, न ही सामने वाले से उम्मीद करते हैं कि वह सब खुद समझ ले। वे अपनी जरूरतें, परेशानियां और सीमाएं शब्दों में रखते हैं। इसमें दोषारोपण नहीं होता, बल्कि साझेदारी होती है। ‘तुम हमेशा ऐसा करते हो’ की जगह ‘मुझे ऐसा महसूस होता है’ जैसी भाषा इस्तेमाल होती है।

असहमति में भी सम्मान बनाए रखना

हर रिश्ते में मतभेद होते हैं। लेकिन इमोशनल मैच्योरिटी यह तय करती है कि उन मतभेदों को कैसे संभाला जाए। मैच्योर प्यार में लड़ाई जीतने की नहीं, रिश्ता समझने की कोशिश होती है। चुप्पी, ताना या भावनात्मक दूरी की जगह बातचीत को प्राथमिकता दी जाती है। गुस्से में भी अपमान नहीं किया जाता, क्योंकि सामने वाले की गरिमा रिश्ते से ज्यादा अहम होती है।

स्पेस और कनेक्शन का संतुलन

इमोशनली मैच्योर लोग यह समझते हैं कि प्यार में स्पेस का होना दूरी नहीं है। हर इंसान को अपने लिए समय चाहिए, अपनी पहचान चाहिए। मैच्योर प्यार में पार्टनर की दुनिया को खतरे की तरह नहीं देखा जाता। भरोसा होता है कि कनेक्शन स्पेस से कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत होता है।

अटैचमेंट नहीं, चॉइस

मैच्योर प्यार जरूरत से नहीं, पसंद से जुड़ा होता है। इसमें डर नहीं होता कि सामने वाला चला जाएगा, इसलिए उसे पकड़कर रखना जरूरी है। बल्कि यह विश्वास होता है कि दोनों रोज एक-दूसरे को चुन रहे हैं। इमोशनल मैच्योरिटी प्यार को बोझ नहीं बनने देती, वह उसे सुरक्षित बनाती है।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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