Mother's Day: मां के लिए मदर्स डे स्पेशल 4 छोटी कविताएं, पढ़कर हर कोई होता है भावुक

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मदर्स डे आने वाला है और इस खास दिन से पहले हर कोई अपनी मम्मी को खास शायरी, मैसेज और कविताएं भेजना पसंद करता है। ऐसे में यहां हम 3 ऐसी कविताएं लेकर आए हैं जिन्हें पढ़कर हर कोई भावुक हो जाता है। 

Mother's Day: मां के लिए मदर्स डे स्पेशल 4 छोटी कविताएं, पढ़कर हर कोई होता है भावुक

बच्चा हो या जवान, जब भी कोई समस्या आती है, तो हर किसी की जुबान से सबसे पहला शब्द 'मां' ही निकलता है। मां ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही मन में ममता, सुरक्षा और प्यार की भावना जाग उठती है। मां सिर्फ हमें जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन जीने का सही मतलब और संस्कार सिखाने वाली पहली गुरु होती है। मां का प्यार किसी भी शर्त या उम्मीद के बिना होता है। साल में एक बार आने वाला मदर्स डे मां को स्पेशल फील करवाने का एक खास मौका है। इस दिन हर बच्चा अपनी मां के प्यार के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहता है। इस साल मदर्स डे 10 मई को मनाया जाएगा और अगर आप भी अपनी मां को स्पेशल फील करवाने के लिए कुछ बेहतरीन शब्द खोज रहे हैं तो यहां देखिए मां पर लिखी गईं ऐसी कविताएं जो भले ही छोटी हैं लेकिन हर शब्द भावुक कर देने वाला है।

1) जिसने दिया मुझे सबसे प्यारा और सच्चा नाम,

वो कोई और नहीं, मेरी मां का है मुकाम।

खुद के सारे सपने उसने हमारे लिए त्याग दिए,

हमारी एक मुस्कान के लिए सारे गम सह लिए।

उसकी ममता का कोई मोल नहीं इस दुनिया में,

मां के चरणों में ही बसता है मेरा सारा संसार।

-हरिवंश राय बच्चन जी

2) भूखा न सोए कोई, यह सोचकर वो रात भर जागती है,

मेरी हर छोटी खुशी के लिए वो दुनिया से लड़ जाती है।

वो आंचल है जो हर धूप को छांव में बदल दे,

वो मां है जो हर अंधेरी रात को उजाले में बदल दे।

हे ईश्वर! रखना सदा सलामत मेरी मां को,

जिसके बिना यह जीवन बिल्कुल सूना लगता है।

3) जब भी दुनिया की भीड़ में खुद को अकेला पाता हूं,

हे मां! बस तेरी ही याद में सुकून पाता हूं।

तूने ही सिखाया मुझे इस जीवन में लड़ना,

तेरी ममता के आगे फीका है ये सारा संसार।

न जाने कितनी दुआएं उसने मेरे लिए मांगी हैं,

मां की उन दुआओं की ही बदौलत आज मेरी जिन्दगी संवरी है।

4) किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई,

मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में मां आई।

अभी जिंदा है मां मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा,

मैं जब घर से निकलता हूं, दुआ भी साथ चलती है।

पसीने की जगह बच्चे के माथे पर अगर मां का

कोई आंचल गिरा हो, तो वो शबनम बन के बहता है।

-मुनव्वर राना की प्रसिद्ध गज़ल

Avantika Jain

लेखक के बारे में

Avantika Jain
अवंतिका जैन ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री ली है। फिलहाल वह बतौर सीनियर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर लाइव हिंदुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। एंटरटेनमेंट से जुड़ी खबरों को लिखने और वीडियोज बनाने में भी इनकी रुचि है। 5 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहीं अवंतिका लाइव हिन्दुस्तान से पहले ईटीवी भारत के दिल्ली डेस्क पर काम कर चुकी हैं। नई जगहों को एक्सप्लोर करना, नए लोगों से जुड़ना और फिल्में/वेब सीरीज देखने की शौकीन हैं। और पढ़ें

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