
मुश्किल समय में भूलकर भी ना कहें ये 5 बातें, दुख को कर देती हैं डबल
दुख के समय दोस्तों या रिश्तेदारों के कहे गए कुछ शब्द या तो व्यक्ति का मनोबल बनाए रखते हैं या फिर उसकी तकलीफ को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दुख के समय आखिर कौन सी वो 5 बातें होती हैं, जिन्हें कहने से हर व्यक्ति को बचना चाहिए।
किसी प्रियजन की मौत हो, ब्रेकअप हो, नौकरी छूटना हो या कोई बड़ा नुकसान, दुख के समय हर व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो जाता है। ऐसे समय में दोस्तों या रिश्तेदारों के कहे गए कुछ शब्द या तो व्यक्ति का मनोबल बनाए रखते हैं या फिर उसकी तकलीफ को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दुख के समय आखिर कौन सी वो 5 बातें होती हैं, जिन्हें कहने से हर व्यक्ति को बचना चाहिए।
दुखी व्यक्ति के दुख को और बढ़ा देती हैं 5 बातें
1. 'मजबूत बनो' या 'रोना बंद करो'
किसी व्यक्ति का दुख महसूस करने पर रोना या कमजोर महसूस करना एक नॉर्मल प्रकिया है। यह दिमाग और शरीर का, दर्द को बाहर निकालने का अपना एक तरीका होता है। लेकिन जब आप किसी व्यक्ति को उसके दुख में रोने से मना करते हैं या उसे मजबूत बने रहने की सलाह देते हैं तो अनजाने में उसे उसका दुख भीतर दबाने के लिए सलाह दे रहे होते हैं। कई रिसर्च बताती हैं कि दबाया हुआ दुख बाद में व्यक्ति के लिए डिप्रेशन या एंग्जाइटी का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति ने अगर परिवार में किसी अपने को खोया हो तो उसकी मौत पर आपका यह कहना कि 'मजबूत बनो', 'वो नहीं चाहते होंगे कि तुम रोओ' जैसे वाक्य उसके इमोशंस को दबाने का काम करते हैं। आप इसकी जगह दुखी व्यक्ति के कंधे पर हाथ रखकर कुछ देर साथ बैठकर उसकी बातें सुन लें।
2. 'मुझे पता है तुम क्या फील कर रहे हो'
हर व्यक्ति की जीवन यात्रा अलग होती है, इसलिए उसका सुख और दुख का अहसास भी दूसरे व्यक्ति से अलग होता है। वो कभी भी एक जैसा नहीं हो सकता। आपका यह वाक्य उसे और ज्यादा अकेला महसूस करवा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुख में इंसान चाहता है कि उसका दर्द सुना जाए, न कि समझा जाए। आप इस वाक्य की जगह दुखी व्यक्ति को बोल सकते हैं 'मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि तुम पर क्या गुजर रही होगी, लेकिन मैं तुम्हारे साथ हमेशा खड़ा हूं'। आपका यह वाक्य उसे आपके साथ बात करने के लिए ओपन फील करवाता है।
3.'सब ठीक हो जाएगा' या 'टाइम सब हील कर देगा'
अभी दुख ताजा है, और 'समय के साथ ठीक हो जाएगा' सुनकर लगता है जैसे आप उसके वर्तमान दर्द को इग्नोर कर रहे हैं। टाइम हील करता है ये सच है, लेकिन अभी वो यह नहीं सुनना चाहता। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसी बातें 'टॉक्सिक पॉजिटिविटी' हैं, जो दुख को जल्दी खत्म करने की कोशिश करती हैं, लेकिन वो उल्टा असर करती हैं। उदाहरण के लिए, ब्रेकअप के बाद कहना 'टाइम सब ठीक कर देगा, नया प्यार मिल जाएगा'-ये उसके मौजूदा दर्द को छोटा करता है। आप इसकी जगह कह सकते हैं कि 'मैं समझता हूं कि यह आपके लिए बहुत मुश्किल समय है, और मैं तुम्हारे साथ हूं जितना समय लगे'। आपके यह शब्द उसे सपोर्टेड फील करवा सकते हैं।
4. 'ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं' या 'जो होता है अच्छे के लिए होता है'
दुख में इंसान का भरोसा पहले से ही ईश्वर और किस्मत पर से टूटा हुआ होता है। ऐसे में इस तरह की बातों का मतलब यह निकाला जा सकता है कि आप कह रहे हैं कि 'ये दुख अच्छा ही है'। अगर दुखी व्यक्ति धार्मिक नहीं है, तो उसे यह वाक्य और इरिटेटिंग लगता है।
5. 'अब आगे बढ़ जाओ' या 'लाइफ में आगे भी तो बहुत कुछ है'
दुख एक प्रोसेस है, जो महीनों या सालों तक का समय ले सकता है। 'आगे बढ़ जाओ' कहकर आप उसे जल्दबाजी में डालते हैं, जो गिल्ट फील करवाता है। ग्रीफ थेरेपी में ये कहा जाता है कि दुख को 'रिजॉल्व' करने की कोई टाइमलाइन नहीं होती। आपकी ऐसी बातें सुनकर सामने वाले को लग सकता है कि आप उसके दर्द से थक गए हैं। उदाहरण के लिए डिवोर्स के बाद यह कहना कि 'अब आगे बढ़ो', 'नई जिंदगी शुरू करो', भले ही दुखी व्यक्ति अभी उसके लिए तैयार नहीं हो गलत है। आप इसकी जगह कह सकते हैं 'जब तुम तैयार हो, तब आगे बढ़ना, मैं इंतजार करूंगा'।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




