Shayari in hindi: स्वैग से भरी 2 लाइनों में 15 एटीट्यूड शायरी, सोशल मीडिया पर शेयर करते ही छा जाएंगे आप
सोशल मीडिया पर फोटो के साथ कैप्शन में एटीट्यूड वाली शायरी लिखने का ट्रेंड इन दिनों खूब चल रहा है। लोग फोटो के साथ 2 लाइनों वाली शायरी लिखकर अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी दिखा रहे हैं। अगर आप भी ऐसा कुछ लिखना चाहते हैं, तो यहां से बेस्ट शायरी चुनें।

आज के समय में सोशल मीडिया सिर्फ फोटो शेयर करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह अपनी पर्सनैलिटी और एटीट्यूड दिखाने का एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन चुका है। हम अक्सर अपनी पोस्ट के जरिए लोगों को यह बताते रहते हैं कि हम कौन हैं और हमारा स्टाइल कैसा है। खास बात यह है कि अब सिर्फ तस्वीर ही नहीं, बल्कि उसके साथ लिखा गया कैप्शन भी उतना ही मायने रखता है। लोग अपनी बोल्डनेस, कॉन्फिडेंस और मूड को 2 लाइनों की शायरी के जरिए आसानी से जाहिर कर देते हैं। चाहे किसी से नाराजगी हो या खुद का स्वैग दिखाना हो, एक दमदार एटीट्यूड शायरी सब कुछ बयां कर देती है। अगर आप भी अपनी फोटो के साथ स्वैग से भरी एटीट्यूड शायरी शेयर करना चाहते हैं, तो यहां दी गई शायरी आपके लिए परफेक्ट हैं। इन्हें चुनें और अपनी किलर फोटो के साथ लिखकर सोशल मीडिया पर शेयर करें और अपनी अलग पहचान बनाएं।
2 लाइनों वाली एटीट्यूड शायरी-
1) नोटों पर फोटो तो हमारी भी हो सकती थी
पर किसी की जेब में रहना हमें पसंद नहीं।
2) हम जैसा बनने की कोशिश छोड़ दो,
शेर पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते।
3) क्या तुम हमारी जात पर उंगली उठाओगे
तुम कब इस काबिल हो गए।
4) तेरा घमंड एक दिन तुझे ही हराएगा,
मैं क्या हूं, यह तो तुझे वक्त ही बताएगा।
5) मस्ती में रहूं तो मिट्टी से भी खेलता हूं
अना परस्ती में आ जाऊं तो चांद को भी नजरअंदाज कर दूं।
6) शायद तुम नावाकिफ हो मेरे मिजाज से
तेरी उम्मीद से भी ज्यादा सनकी हूं।
7) जिन्हें तुम उस्ताद मानते हो
वो हमारे नालायक शागिर्द हैं।
8) तुम घमंड की बात करते हो जनाब,
हम लोगों को नजर में रखकर नजरअंदाज करते हैं।
9) दूसरों की चापलूसी का शौक नहीं मुझे
जैसा भी हूं, अपने नाम से जाना जाता हूं।
10) दूसरों की चापलूसी का शौक नहीं मुझे
जैसा भी हूं, अपने नाम से जाना जाता हूं।
11) आदत नहीं पीठ पीछे वार करने की
दो शब्द कम बोलता हूं, पर सामने बोलता हूं।
12) हमसे टकराने से पहले सोच लेना,
क्योंकि हम वहीं खड़े हैं जहां मुश्किलें खत्म होती हैं।
13) भीड़ में खड़े रहना हमारी आदत नहीं,
हम अलग खड़े होकर पहचान बनाते हैं।
14) हमारी पहचान हमारे काम से है,
नाम तो लोग वैसे भी जान जाते हैं।
15) शेर अपना शिकार खुद करता है,
हम भी किसी के सहारे नहीं जीते।
लेखक के बारे में
Deepali Srivastavaदीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।
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