FAFO पेरेंटिंग क्या है और क्या ये बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर? जानें इसके फायदे और नुकसान
आजकल पेरेंटिंग के स्टाइल में कई तरह के बदलाव आ चुके हैं और आएदिन नए ट्रेंड्स आते रहते हैं। अब नया ट्रेंड आया है FAFO पेरेंटिंग, ऐसा कहा जा रहा है कि इससे बच्चे आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकते हैं। चलिए जानते हैं क्या है ये ट्रेंड?

बदलते वक्त के साथ पेरेंटिंग स्टाइल भी अब पूरी तरह से बदल चुका है। पहले बच्चों की परवरिश को लेकर साधारण तरीका अपनाया जाता था, जिससे बच्चे मजबूत और समझदार बनते थे। अब तेज दिमाग वाले बच्चों को डील करने के लिए परवरिश के तरीके भी अपडेट होते जा रहे हैं। इन्हीं नए तरीकों में से एक है FAFO पेरेंटिंग ट्रेंड, जो इन दिनों काफी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि यह तरीका बच्चों को मजबूत, आत्मनिर्भर और बेहतर फैसले लेने वाला बनाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई यह पेरेंटिंग स्टाइल बच्चों को जल्दी आत्मनिर्भर बना सकता है? आइए जानते हैं आखिर FAFO पेरेंटिंग क्या है, इसमें पेरेंट्स क्या करते हैं, और इसके फायदे और नुकसान क्या हैं।
क्या है FAFO पेरेंटिंग?
FAFO पेरेंटिंग का मतलब है कि खुद गलती करो और फिर उसका नतीजा भी झेलो। ये पेरेंटिंग स्टाइल आज का नहीं है, पुराना है। बस इसे नए नाम के साथ पेश किया गया है, जिसे लोग नया ट्रेंड समझ रहे हैं। आजकल बच्चा खाना नहीं खाता है, तो पेरेंट्स पीछे लगे रहते हैं। जरा सा रोता है तो उसे चुप कराने के लिए हर जिद मान लेते हैं, ये चीजें FAFO पेरेंटिंग में नहीं आती हैं। FAFO पेरेंटिंग में बच्चे को बार-बार रोकने-टोकने के बजाय छोड़ दिया जाता है कि गलती करो और फिर सीखो। जैसे अगर बच्चे ने खाना नहीं खाया, तो अब खाना नहीं मिलेगा। जब भूख लगेगी तब ही मिलेगा। कोई चीज फेंककर तोड़ दी तो अब वह खिलौना दूसरा नहीं आएगा। इससे बच्चे को भूख, खाने और चीजों की वैल्यू पता चलती है। साथ ही बच्चा समझ लेता है कि उसकी जिद पूरी नहीं होगी।
फायदे क्या होते हैं
FAFO पेरेंटिंग के कुछ फायदे हैं, जो बच्चे के बिहेवियर में देखने को मिलते हैं। अगर पेरेंट्स इसे फॉलो करते हैं, जो बच्चा जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकता है। इसके फायदे क्या हैं-
- जब आप बच्चे पर रोक-टोक नहीं करते हैं, तो वह खुद की सोच-समझ से चीजों को करने लगता है। ऐसे बच्चा खुद के लिए फैसले लेना सीख लेता है।
- बच्चा अपनी गलती से सीखता है, ऐसे में आपके ऊपर कोई ब्लेम-गेम नहीं होने वाला। बच्चा गलती करेगा, नुकसान होगा तो उसे आगे के लिए सीख मिलेगी।
- इसमें पेरेंट्स को बच्चों पर हर समय नजर गड़ाकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। वह समझ लेते हैं कि माता-पिता कुछ नहीं कहेंगे लेकिन नुकसान होने पर चीज दोबारा नहीं मिलेगी।
नुकसान भी हैं
FAFO पेरेंटिंग के कुछ फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं। माता-पिता अगर इस ट्रेंड को फॉलो करते हैं, तो उन्हें कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए। चलिए बताते हैं इसके नुकसान-
- बच्चे को अगर आप बिल्कुल रोक-टोक नहीं करेंगे, ध्यान नहीं देंगे, तो उसे अकेलापन महसूस हो सकता है। उसे लगने लगेगा कि मम्मी-पापा प्यार नहीं करते हैं।
- आप बच्चे को हर चीज खुद करने के लिए छोड़ देंगे तो वह कुछ खतरा भी मोल ले सकता है। जैसे कोई दवाई खा ली, साइकिल चलाई तो गिर गया, बालकनी से गिरना, किचन में कोई जोखिम भरा काम।
- ये पेरेंटिंग स्टाइल 5-6 साल के उम्र वाले बच्चों के लिए बेहतर हो सकता हैं। 3-4 साल के बच्चों को उतनी समझ नहीं होती है, वह हर चीज खेल-शैतानी में करते हैं, जिसका नुकसान बच्चे के साथ आपको भी भुगतना पड़ सकता है।
क्या करना चाहिए
अगर आप इस पेरेंटिंग स्टाइल को फॉलो कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि बच्चा कब क्या कर रहा है। उसे जरूरी चीजों के लिए जरूर समझाएं या फिर डांटें। जैसे होमवर्क सही समय पर करना, मोबाइल न देखना वगैरह। बच्चे को प्यार से समझाकर भी सही रास्ते पर लाया जा सकता है।
लेखक के बारे में
Deepali Srivastavaदीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।
करियर का सफर
दीपाली ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2018 में राजस्थान पत्रिका की डिजिटल टीम से की। करियर के शुरुआती दौर से ही वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी रही हैं। इसके बाद उन्होंने इन्शॉर्ट्स, सत्य हिंदी, बॉलीवुडशादीज.कॉम और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरीज, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की।
एजुकेशन
दीपाली श्रीवास्तव के पास B.Sc (Mathematics) और मास कम्युनिकेशन की डिग्री है। यही शैक्षणिक पृष्ठभूमि उनके काम में तथ्यों की सटीकता, डेटा-आधारित रिसर्च और कंटेंट की विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।
पत्रकारिता का उद्देश्य
दीपाली का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी फैक्ट-चेकिंग और प्रमाणिक जानकारी देना है। उनका उद्देश्य किसी भी बीट पर काम करते हुए पाठकों तक सही, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे बेहतर और जागरूक निर्णय ले सकें।
विशेषज्ञता
हेल्थ, फिटनेस और किचन हैक्स
ट्रैवल, फैशन, रिलेशनशिप और ब्यूटी
एंटरटेनमेंट बीट
सेलेब्रिटी न्यूज
वीडियो स्टोरीज
फिल्मों के रिव्यू
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


