पैरेंट्स! आपकी इन 5 आदतों की वजह से बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता, रह जाते हैं कमजोर!
Parenting Mistakes: जरूरी नहीं है कि बच्चा सिर्फ अपने मन की वजह से नहीं पढ़ता। कई बार पैरेंट्स की कुछ आदतें भी वजह बनती हैं, जिस कारण बच्चे पढ़ाई में अक्सर इंटरेस्ट नहीं लेते। भारतीय घरों में तो ये काफी कॉमन हैं, आइए जानते हैं।

अक्सर पेरेंट्स की ये शिकायत रहती है कि उनके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कहीं आपकी ही कोई आदत तो बच्चे का पढ़ाई से मन हटा रही? कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका असर सीधे बच्चे की सोच, आत्मविश्वास और पढ़ाई पर पड़ने लगता है। बच्चा धीरे-धीरे पढ़ाई को बोझ समझने लगता है और उसका फोकस भी कमजोर होने लगता है। सिर्फ डांटना या बार-बार समझाना हर बार काम नहीं करता, क्योंकि बच्चों पर घर के माहौल और व्यवहार का असर सबसे ज्यादा पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते उन आदतों को पहचाना जाए जो बच्चे को पढ़ाई से दूर कर सकती हैं। चलिए जानते हैं पेरेंट्स की कौन सी आदत, बच्चे का पढ़ाई से मन हटा देती हैं।
सिर्फ नंबरों पर ध्यान देना
कई पेरेंट्स बच्चों की मेहनत से ज्यादा उनके मार्क्स पर ध्यान देते हैं। अगर नंबर कम आ जाएं तो बच्चे को डांटना, दूसरों के सामने उसकी कमी बताना या हर समय पढ़ाई का दबाव बनाना शुरू हो जाता है। इससे बच्चा पढ़ाई को लेकर स्ट्रेस लेने लगता है और धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कम होने लगता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे की मेहनत और कोशिशों की भी तारीफ की जाए। जब बच्चा खुद को सपोर्ट महसूस करता है, तो उसका मन पढ़ाई में ज्यादा लगने लगता है।
दूसरों से तुलना करना बच्चे को कमजोर बनाता है
कई पेरेंट्स अक्सर अपने बच्चों का कंपैरिजन करते रहते हैं। 'शर्मा जी के बेटे को देखो' जैसी बातें सुनना किसी भी बच्चे को अच्छा नहीं लगता। बार-बार तुलना होने से बच्चे के मन में यह भावना आने लगती है कि वह दूसरों जितना अच्छा नहीं है। इससे उसका आत्मविश्वास टूटने लगता है और वह खुद को पीछे समझने लगता है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा होता है तो कोई किसी और चीज में। इसलिए बच्चे की तुलना किसी और से करने के बजाय उसके अपने प्रोग्रेस पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
घर का खराब रूटीन भी बड़ी वजह बनता है
अगर बच्चे का सोने और उठने का समय तय नहीं है या वह घंटों मोबाइल और टीवी में लगा रहता है, तो इसका असर भी उसकी पढ़ाई पर साफ दिखाई देता है। बिना सही रूटीन के बच्चे का ध्यान जल्दी भटकने लगता है और वह पढ़ाई में फोकस नहीं कर पाता। पढ़ाई के साथ-साथ सही दिनचर्या भी बहुत जरूरी होती है। बच्चे के लिए ऐसा रूटीन बनाइए जिसमें पढ़ाई, खेल और आराम तीनों के लिए समय हो। इससे बच्चा मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करेगा।
माता-पिता की आदतें भी बच्चों पर असर डालती हैं
बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। अगर माता-पिता खुद हर समय फोन में बिजी रहते हैं, तो बच्चा भी उसी आदत को अपनाने लगता है। कई बार पेरेंट्स बच्चों को पढ़ाई के लिए कहते हैं, लेकिन खुद लगातार स्क्रीन में लगे रहते हैं। ऐसे में बच्चा बातों से ज्यादा व्यवहार को अपनाता है। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा पढ़ाई पर ध्यान दे, तो पहले घर का माहौल वैसा बनाइए जहां स्क्रीन टाइम सीमित हो और परिवार साथ में समय बिताए।
हर समस्या खुद हल करना
कई माता-पिता बच्चों का होमवर्क खुद कर देते हैं या उनकी हर छोटी गलती तुरंत सुधार देते हैं। शुरुआत में यह मदद लगती है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चा खुद कोशिश करना छोड़ देता है। उसे हर काम में दूसरों की जरूरत महसूस होने लगती है। जरूरी है कि बच्चे को अपनी गलतियों से सीखने दिया जाए। जब बच्चा खुद मेहनत करता है और अपनी गलती सुधारता है, तभी उसमें जिम्मेदारी की भावना और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
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