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Hindi News लाइफस्टाइल पेरेंट्स गाइडParenting: कई बार बच्चों के लिए लेजी पैरेंटिग भी होती है फायदेमंद, बनते हैं आत्मनिर्भर

Parenting: कई बार बच्चों के लिए लेजी पैरेंटिग भी होती है फायदेमंद, बनते हैं आत्मनिर्भर

Lazy Parenting: कुछ माता-पिता बच्चों के हर काम में दखल नहीं देते तो आजकल की सोसाइटी उन्हें आलसी पैरेंट्स बता देती है। लेकिन ये लेजी पैरेंटिग भी बच्चे के लिए कारगर होती है और उन्हें कॉन्फिडेंट बनाती है

Parenting: कई बार बच्चों के लिए लेजी पैरेंटिग भी होती है फायदेमंद, बनते हैं आत्मनिर्भर
Aparajitaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 10 Dec 2023 10:58 AM
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आजकल की लोग पैरेंटिग को काफी गंभीरता से लेते हैं। बच्चे के पैदा होने और 6 महीने के होने के साथ ही उनके खानपान से लेकर सिखाने तक का ख्याल करना शुरू कर देते हैं। फिर जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं। उन्हें हर छोटी-बड़ी बात सिखाना, बताना, स्कूल लाइफ से जुड़ी पर चीज पर निगाह रखते हैं। लेकिन कई बार बच्चों के लिए  कुछ ना करना भी फायदेमंद होता है। जिसे लेजी पैरेंटिग कहते हैं। ये हेलीकॉप्टर पैरेंटिग से काफी अलग है। हालांकि ऐसा नहीं है कि जिन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को सारे काम खुद से करने और उसमे दखलंदाजी नहीं करते हैं। वो अपने बच्चों के लिए कुछ करना नहीं चाहते। बस फर्क इतना है कि हर वक्त अपने बच्चों के काम में दखल नहीं देते।

क्या है लेजी पैरेंटिग
लेजी पैरेंटिंग में माता-पिता बच्चे के हर काम में दखल नहीं देते हैं और ना ही रोकटोक करते हैं। बल्कि उन्हें खुद से सारे काम करने की छूट देते हैं। इससे बच्चे गलती करते हैं और खुद ही उससे सीखते हैं। जिसकी वजह से बच्चे कई बार खुद से निर्णय लेने में सक्षम हो जाते हैं। 

लेजी पैरेंटिग के फायदे
-लेजी पैरेंटिग के काफी सारे फायदे है। जो उन्हें कॉन्फिडेंस देता है।

-बच्चे को रोजमर्रा के कामों में दखल ना देने और खुद से काम करने देने बच्चों के अंदर आत्मविश्वास आता है।

-लेजी पैरेंटिग में माता-पिता बच्चों को गलती करने की छूट और उससे सीखने की समझ देते हैं। बस इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कहीं बच्चा खुद को नुकसान ना पहुंचा लें।

-कई बार बच्चे खुद से काम करने की वजह से सारे काम पूरे नहीं कर पाते। और, कई बार खुद को थोड़ा बहुत चोट भी लगा लेते हैं लेकिन ये सीखने का नेचुरल प्रोसेस है और बच्चों मजबूत बनाता है। 

-लेजी पैरेंटिग की वजह से बच्चों को हर वक्त पैरेंट्स के इंस्ट्रक्शन लेने और उन्हें फॉलो करने का प्रेशर नहीं होता। जिससे बच्चे मेंटली फ्री रहते हैं। 

-पैरेंट्स हर वक्त बच्चे के पीछे-पीछे उसकी गलतियां सुधारने में नहीं लगे रहते। इससे बच्चे का दिमागी विकास तेजी से होता है क्योंकि उसका पूरा ध्यान अपने ऐक्शन को सही करने में होता है। 

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