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Hindi News लाइफस्टाइल पेरेंट्स गाइडग्रैंड पैरेंट्स की मौत टीनएज बच्चों पर डालती है गहरा असर, इस तरह सदमे से निकाले बाहर

ग्रैंड पैरेंट्स की मौत टीनएज बच्चों पर डालती है गहरा असर, इस तरह सदमे से निकाले बाहर

Parenting Tips: टीनएज बच्चे कई बार घर में अपने किसी प्रिय की मौत से सदमे में चले जाते हैं। ऐसे में जरूरी है माता-पिता टीनएज बच्चों के मानसिक स्थिति का ध्यान रखें। जिससे कि वो डिप्रेशन में ना जाएं।

ग्रैंड पैरेंट्स की मौत टीनएज बच्चों पर डालती है गहरा असर, इस तरह सदमे से निकाले बाहर
Aparajitaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 02 Jun 2023 12:45 PM
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आजकल माता-पिता के वर्किंग होने पर बहुत सारे बच्चे अपने ग्रैंड पैरेंट्स के साथ बड़े होते हैं। ऐसे में उनका अपने दादा-दादी या नाना-नानी से लगाव होना लाजिमी है। लेकिन बच्चों के टीन एज तक पहुंचते ही बूढ़े ग्रैंड पैरेंट्स की मौत नेचुरल है। लेकिन ये मौत बहुत सारे टीनएज बच्चों के मन पर गहरा असर डालती है। 13-14 साल की उम्र में उन्हें अपने प्यारे ग्रैंड पैरेंट्स का यूं चले जाना कई बार डिप्रेशन में डाल देता है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों की मनोस्थिति को समझने का प्रयास करें और उन्हें समझाएं। जिससे कि वो डेथ को एक्सेप्ट कर सकें और लाइफ में आगे बढ़ सकें। 
कई बार तो बच्चे अपने पालतू जानवर कुत्ते या बिल्ली की मौत से भी सदमे में चले जाते हैं। बच्चा अगर टीनएज है और उसके किसी लव्ड वंस की डेथ हो गई है तो जरूरी है कि बच्चे को मेंटली स्ट्रांग बनाएं। जिससे कि वो डिप्रेशन में ना जाए। 

बच्चे को रिचुअल्स में करें शामिल
ग्रैंड पैरेंट्स या किसी लव्ड वंस की मौत से टीनएज बच्चा बिल्कुल शॉक में है तो उसे लास्ट रिचुअल्स में शामिल करें। जिससे कि वो समझ सकें कि डेथ होना नॉर्मल है और हर किसी को एक दिन जाना होता है। 

उसके इमोशन को एक्सेप्ट करें
माता-पिता होने के नाते आपको बच्चे के इमोशन को एक्सेप्ट करना होगा। एकदम से उसे नॉर्मल होने या फिर भूल जाने के लिए कहना उसे चिड़चिडा बना देगा। लेकिन उसे धीरे-धीरे दूसरे कामों में व्यस्त करें। जिससे कि वो नॉर्मल हो जाए। कई बार इस काम में वक्त भी लग जाता है। बच्चे को समझाएं कि लाइफ में आगे बढ़ने का मतलब अपने लव्ड वंस को भूलना नही है। बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट देना है। 

बच्चे से बात करें
कई बार बच्चों को बात करना अच्छा लगता है। इसलिए बैठकर कुछ देर बात करें। 

मेमोरी रखने को कहें
बच्चे से कहें कि वो चाहे तो अपने लव्ड वंस की याद में मेमोरी रख सकती है। जैसे उनकी फोटोज का कोलाज या फिर उसका सामान। मेमोरी बॉक्स बनाकर रखने को कहें।

डायरी लिखने को कहे
बच्चे को कहें कि वो अपने मन की बात लिखने को कहें। एक डायरी दें। जिससे कि वो मन की बात लिखे। इससे बच्चे के मेंटल स्थिति पर असर पड़ेगा। और धीरे-धीरे वो लाइफ में नॉर्मल हो सके।

बच्चे को करें सपोर्ट
बच्चों के बढ़ते मन पर उनके किसी प्रिय की मौत गहरा असर डालती हैं। ऐसे में वो डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। इस तरह की स्थिति में बच्चे के साथ ज्यादा से ज्याद वक्त बिताएं। और उसे समझाएं। बच्चा अगर यादों से बाहर नहीं आ पा रहा है तो किसी काउंसलर या फिर किसी मेंटर की मदद लें। जो उससे बात करके समझाएं कि डेथ होना नेचुरल है और एक उम्र के बाद हर किसी को जाना होता है।