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बच्चों के दिनभर के झगड़े से हैं परेशान, जानें कैसे बढ़ सकता है आपसी प्यार

Parenting: भाई-बहन हैं, तो लड़ाई तो होगी ही। यह बात जितनी सच है, उतना ही सच यह भी है कि आप अपनी परवरिश से उनके बीच एक सेहतमंद रिश्ता विकसित कर सकती हैं। कैसे? बता रही हैं शांभवी श्री

बच्चों के दिनभर के झगड़े से हैं परेशान, जानें कैसे बढ़ सकता है आपसी प्यार
Kajal Sharmaहिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 10 May 2024 03:51 PM
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घर में एक से ज्यादा बच्चे हों, तो शुरुआती सालों में माता-पिता की अधिकांश ऊर्जा उनके लड़ाई-झगड़े को खत्म करने में ही लगती है। पर, भाई-बहन सिर्फ लड़ाई ही नहीं करते। वे एक-दूसरे के सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास में अहम भूमिका भी निभाते हैं। जिन भाई-बहनों का रिश्ता बचपन में खुशनुमा होता है, वे एक खुशहाल और आत्मविश्वास से भरपूर युवा के रूप में बड़े होते हैं। वहीं, भाई-बहनों के बीच में होने वाली लड़ाई का असर भावनात्मक सेहत, आत्मविश्वास और सोशल स्किल्स पर जिंदगी भर के लिए देखा जा सकता है। भाई-बहनों के रिश्ते का एक और पहलू भी है। अगर इनके बीच माता-पिता छुटपन से ही सेहतमंद प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दें तो दोनों बच्चे एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हुए न सिर्फ जिंदगी में आगे बढ़ेंगे, बल्कि उनकी जिंदगी के विभिन्न आयामों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। कैसे परवरिश के अपने इस लक्ष्य को हासिल करें, आइए जानें:

एक जैसा नियम, सबके लिए
परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक जैसे नियम-कायदे तय करें और इस बात की तसदीक करें कि सभी सदस्य अपने अलग-अलग उम्र के बावजूद उन नियमों का मानें। नियमों की इस सूची में एक-दूसरे को नीचा ना दिखाना, चीख-चिल्लाकर बात ना करना, बिना अनुमति के किसी का सामान न लेना, एक-दूसरे की मदद करना आदि जैसे नियमों को शामिल करें। बच्चों के सामने अपने आचरण से एक अच्छा उदाहरण पेश करें। घर में जब नया बच्चा आए तो बड़े भाई या बहन को उसकी देखभाल में शामिल करें। इसमें नए बच्चे को लोरी सुनाने से लेकर उसके कपड़े अलमारी से लाने तक की जिम्मेदारी आप बड़े बच्चे को दे सकती हैं। उम्र बढ़ने पर उन्हें साथ मिलकर अपना कमरा ठीक करने, खाना खाते वक्त डाइनिंग टेबल पर पानी की व्यवस्था करने या एक साथ पजल सॉल्व करने जैसी जिम्मेदारियां दें। इससे बच्चों में आपसी जुड़ाव और विश्वास बढ़ेगा।

तुलना करने से बचिए
क्या आप जानती हैं, भाई-बहनों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में जाने-अनजाने में माता-पिता भी अहम भूमिका निभाते हैं। हर बच्चा अलग है और अलग हैं उनके गुण। ऐसे में बच्चों के बीच तुलना करने से बचने की कोशिश करें। एक बच्चे की तारीफ दूसरे बच्चे में दोष निकालकर ही की जाए, जरूरी नहीं। ‘तुम अपनी बहन की तरह कमरे को साफ-सुथरा क्यों नहीं रख सकते’ की जगह बेटे को यह कहें कि ‘मैं जानती हूं कि तुम दोनों का तरीका अलग-अलग है, पर कमरे को साफ और व्यवस्थित रखना भी तो जरूरी है।’ बच्चे की उम्र को ध्यान में रखते हुए उन्हें बार-बार यह बताएं कि भाई-बहन का होना उनकी जिंदगी को किस तरह से बेहतर बनाता है।

बराबरी को दें बढ़ावा
बच्चे को आपसी अनबन को सही तरीके से सुलझाने का तरीका सिखाएं। भाई-बहनों का रिश्ता अन्य रिश्तों के जैसा ही होता है। बच्चों को एक-दूसरे की बात सुनना, अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त करना, सामने वाले के नजरिये को समझने की कोशिश करना और सम्मानजनक तरीके से अपनी बात को सामने रखना सिखाएं। लड़ाई की स्थिति में बच्चों को हमेशा अपनी बात पर अड़ने की जगह सामने वाले के नजरिये को भी समझने की कोशिश करना सिखाएं।

सिखाएं, आपसी संवाद का सही तरीका
बच्चे कई दफा अपने मन की बात को सही शब्द नहीं दे पाते। कई बार इसकी वजह उनका शर्मीला स्वभाव होता है, तो कई बार सामने वाले के प्रति डर का भाव। घर में ऐसा माहौल विकसित करें कि बच्चे इस बात को लेकर निश्ंिचत रहें कि वे अपने भाई या बहन के साथ अपनी हर बात साझा कर सकते हैं और सामने वाला इस वजह से उनके बारे में कोई राय नहीं बनाएगा। छुटपन में अगर आप अपने बच्चों के लिए घर में ऐसा माहौल विकसित कर पाएंगी तो बड़े होने पर भी उन दोनों का आपसी जुड़ाव इतना ही मजबूत रहेगा।