बच्चा 2-3 साल हो गया तो उससे ये 7 काम करने को ना बोले, कॉन्फिडेंस होने लगेगा लूज
Gental Parenting: जेंटल पैरेंटिंग के नाम पर बच्चे के इमोशन के साथ खेलना बंद करे। उसे सिक्योर और सेफ माहौल दें जहां वो आपसे सारी बातें शेयर करें और कॉन्फिडेंस बच्चा बनें। बच्चा जब 3 साल का होने लगे तभी से ये 7 कामों को इग्नोर करें।

बच्चों को उनकी बाउंड्रीज सिखाना, मैनर सिखाना काफी शुरुआती सालों से शुरू कर देना चाहिए। ऐसा लगता है कि अभी बच्चे छोटे हैं लेकिन बच्चों के बिहेवियर, इमोशन और टैंट्रम को 2-3 साल की उम्र से ही अगर सही दिशा दी जाए तो वो ना केवल बड़े होकर कॉन्फिडेंट बनते हैं बल्कि उनका व्यवहार भी पोलाइट और मैनरफुल होता है। बच्चा जब 3 साल का होने लगे तो उसके साथ ये 7 तरह के कामों को करना बिल्कुल बंद कर दें।
बच्चे को हर किसी को हग करने या किस करने को ना बोले
बच्चे को फोर्सफुली किसी से भी हग या किस करने को ना बोले। बच्चे सेंसेटिव होते हैं और अफेक्शन को खुद ही पहचानते हैं। जिस इंसान को वो पसंद करेंगे उसके पास खुद ही जाकर गले लगेंगे। आपको जबरदस्ती बच्चे को फोर्स नहीं करना चाहिए ऐसा करन के लिए, वो अनकंफर्टेबल फील करने लगते हैं और जल्दी ही नये लोगों से मिलना-जुलना बंद कर देते हैं।
बैड गर्ल या बैड ब्वॉय कहना बंद करें
बच्चे ने कुछ गलत हरकत की तो उसकी गलती को सुधारने, बिहेवियर को ठीक करने पर फोकस करें, ना कि उसे बैड ब्वॉय या बैड गर्ल का तमगा देकर उसकी पहचान बना दें। भले ही बच्चा छोटा है लेकिन उसे सही गाइडेंस देंगी तो वो जल्दी सारी चीजें सीख जाएगा।
जबरदस्ती खिलाना बंद करें
काफी सारी मांए बच्चे को मोटा करने के चक्कर में जबरदस्ती मुंह में खाना भरती हैं। बच्चे के साथ ऐसा करना बंद करें, उसे सबके साथ बैठकर खाना खाने को बोलें। इससे बच्चे के अंदर हेल्दी ईटिंग हैबिट डेवलप होगी।
दूसरे बच्चों के साथ कंपेयर बिग नो
हर बच्चे का डेवलप करने का स्टेज अलग होता है। इसलिए बच्चे का कंपेयर किसी दूसरे बच्चे के साथ ना करें।
जरूरी नहीं कि हर बड़े की बात बच्चा मानें। बच्चे को आस-पड़ोस, रिलेटिव्स, घर के हर बड़े की बात मानने के लिए फोर्स ना करें। उसकी मर्जी पर कुछ चीजें छोड़ दें। इससे बच्चे के मन में पैरेंट्स के लिए सेफ्टी और कॉन्फिडेंस फील होता है।
बच्चे के इमोशन को इग्नोर ना करें
बच्चे के इमोशन और फीलिंग्स को इग्नोर ना करें। छोटे बच्चे बड़ों से ज्यादा और पहले चीजों को महसूस करते हैं। बच्चा किसी के पास जाने से रो रहा या नहीं जाना चाह रहा, बात करने से कतरा रहा है या फिर कोई और वजह से गुस्सा है। उसे इग्नोर ना करें बल्कि पूछें और समझें। कई बार चाइल्ड एब्यूज के केस ऐसी छोटी उम्र से ही स्टार्ट होते हैं और पैरेंट्स की अनदेखी फ्यूचर में भारी पड़ती है।
हर समय बच्चा अच्छा बर्ताव नहीं कर सकता
बच्चे को गुड मैनर और गुड बिहेवियर सिखाएं लेकिन ये उम्मीद ना करें कि 2-3 साल का बच्चा हर वक्त आपकी बात मानेगा। कई बार बच्चे लर्निंग प्रोसेस में होते हैं और अपनी क्षमताओं को टेस्ट करते हैं। ये उनका डेवलपमेंट स्टेज होता है।
हर बार टीवी या मोबाइल देना बंद करें
बच्चा जरा सा रोया तो मोबाइल दे दिया, कुछ मांग रहा तो टीवी खोल दी या फिर कुछ बोलना या बताना चाह रहा तो मोबाइल चलाने को बोल दिया, इस आदत को बंद करें। बच्चे के इमोशन को दबाने के लिए स्क्रीन टाइम का बढ़ावा ना दें।
लेखक के बारे में
Aparajitaअपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।
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