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भूख ही नहीं इन वजहों से भी रोता है बच्चा, अनदेखी सेहत पर पड़ सकती है भारी

जन्म के बाद धीरे-धीरे बच्चे की रोग प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है, इसलिए शुरुआती कुछ माह तक उसे जरूरत होती है, बेहद खास देखभाल की। नवजात शिशुओं को होने वाली आम बीमारियां क्या हैं और कैसे उन्हें रखें सेहतमंद, बता रही हैं शमीम खान।

Manju Mamgain हिन्दुस्तानFri, 14 June 2024 12:42 PM
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बच्चे का जन्म जितनी सामान्य-सी प्रक्रिया है, उनकी सेहत पर नजर बनाए रखना उतना ही नाजुक काम। बच्चे तो रोते ही हैं...कहकर नवजात की सेहत से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी करना कई मामलों में भारी पड़ जाता है। इस बात को समझना जरूरी है कि वह नन्ही-सी जान पूरी तरह से आप पर निर्भर है। ऐसे में उसकी सेहत से जुड़े हरेक संकेत को गंभीरता से लें। बच्चों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में पीलिया, सर्दी-जुकाम, फ्लू, कोलिक आदि हैं। इनमें से अधिकतर समस्याएं गंभीर नहीं होतीं, लेकिन उन्हें अपने माता-पिता से विशेष देखभाल की जरूरत होती है। अगर नवजात शिशु लगातार रो रहा हो, तो समझिए बच्चा किसी ऐसी समस्या से जूझ रहा है जो उसके लिए असहनीय है। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। नवजात शिशुओं को कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना इसलिए भी करना पड़ता है क्योंकि वे नए वातावरण से सामंजस्य बैठा रहे होते हैं। ऐसे में नये बने माता-पिता को यह पता होना चाहिए कि नवजात शिशु को होने वाली समस्याओं से कैसे निपटा जाए:

क्यों इतना रो रहा है बच्चा?

नवजात शिशु बोल नहीं सकते, इसलिए कोई भी समस्या होने पर वो रोते हैं। अगर समस्या मामूली है तो वो थोड़ी देर रोकर चुप हो जाते हैं, लेकिन अगर बच्चा लगातार रो रहा हैऔर ऐसा लंबे समय से हो रहा हो तो जांच कराएं। इस बात की बहुत आशंका है कि बच्चा कोलिक से पीड़ित हो। यह स्थिति गैस्ट्रोइसोफैगियल रिफ्लक्स से संबंधित होती है, जब पेट का एसिड आहारनाल में आ जाता है। डॉक्टरी परामर्श के अनुसार दवा देने और कुछ खास तरह की गतिविधियां बच्चे के साथ करने से इस दर्द से उसे आराम मिलेगा।

सर्दी-जुकाम और फ्लू की बातें

बच्चे का रोग प्रतिरोधक तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है। ऐसे में उनके सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे संक्रमण की चपेट में आने का खतरा काफी अधिक होता है। अगर बच्चे में नाक बहने, खांसी और छींकने के लक्षण दिखाई दें तो समझें कि वो संक्रमण की चपेट में आ गया है। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि मामूली सर्दी-जुकाम और फ्लू बहुत तेजी से बच्चे में निमोनिया में तब्दील हो जाता है।

कानों का संक्रमण

बच्चों में कानों का संक्रमण बहुत होता है, जो उनमें बेचैनी और रोने का कारण बन सकता है। यह कानों में रोगाणुयुक्त तरल पदार्थ के जमा होने के कारण होता है। इस वजह से शिशु को ना सिर्फ कान में दर्द होता है बल्कि उसे बुखार भी हो सकता है।

कब्ज की परेशानी

एक साल से कम उम्र के बच्चों में कब्ज की समस्या बहुत देखी जाती है। डाइट में बदलाव इसका सबसे प्रमुख कारण बनता है। ठोस आहार खिलाना शुरू करने से शिशु की मल त्यागने की आदतों में बदलाव आता है। कब्ज की वजह से बच्चा लगातार परेशान रह सकता है और इसके कारण उसके मल के साथ रक्त भी आ सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों के साथ-साथ डॉक्टरी परामर्श जरूरी है।

डायरिया को न लें हल्के में

डायरिया की समस्या कब्ज के बिल्कुल विपरीत होती है। इसमें बच्चा बार-बार मल त्यागता है और मल में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण यह पतला होता है। बच्चों में यह समस्या संक्रमण, दवाइयों या फूड एलर्जी के कारण हो सकती है। डायरिया होने के कारण बच्चे को डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। शिशुओं के लिए यह एक गंभीर स्थिति होती है, इसलिए तुरंत उपचार कराएं। अगर मल के साथ रक्त भी आ रहा हो तो इसे अधिक गंभीरता से लें।

त्वचा से संबंधित समस्याएं

नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद कई तरह की त्वचा की समस्याएं विकसित हो सकती हैं। इनमें से अधिकतर बहुत कम समय के लिए होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। पर, त्वचा पर रैशेज आदि होने या डायपर की वजह से त्वचा में किसी तरह की समस्या होने पर डॉक्टरी परामर्श में देरी ना करें।

पीलिया है आम समस्या

पीलिया नवजात शिशुओं को होने वाली एक आम समस्या है। पीलिया में त्वचा और आंखें पीली पड़ जाती हैं। पीलिया के सामान्य मामले अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में उपचार की जरूरत पड़ती है। पीलिया के गंभीर मामलों में बच्चा दूध नहीं पीता और उसमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखते हैं।

क्यों हो रहा है बुखार?

नवजात शिशुओं में बुखार संक्रमण का पहला और एकमात्र लक्षण है। शिशु के व्यवहार में बदलाव जैसे बहुत रोना या बहुत सोना इस बात का संकेत है कि वह बीमार है। कई शिशुओं में संक्रमण से लड़ने में शरीर का तापमान कम भी हो जाता है। अगर बच्चे के शरीर का तापमान 101 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक और 95.5 डिग्री फॉरेनहाइट से कम हो जाता है तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें।

फीडिंग से समझें संकेत

शिशु बार-बार दूध पीते हैं। यह अंतराल डेढ़ से तीन घंटे का हो सकता है। अगर नवजात शिशु को शुरुआत में र्फींडग में कोई समस्या हो रही हो तो परेशान न हों क्योंकि र्फींडग पैटर्न विकसित होने में 3-4 सप्ताह लगते हैं। अगर बच्चा दिन में कम से कम दो बार मल त्यागता है और मल का रंग पीला है तो समझिए बच्चे को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल रहा है।

क्यों हो रही है उल्टी?

उल्टी करना या मुंह से दूध बाहर निकालना सामान्य है। पर, उल्टी में दूध के साथ आपको हल्का हरा रंग भी दिखाई देता है, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। संक्रमण या पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं के कारण भी बच्चा ऐसा करता है।

(फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार और र्मैंरगो एशिया हॉस्पिटल में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. लोकेश महाजन से बातचीत पर आधारित)

इनसे बनेगी परवरिश आसान

-बच्चे को शुरुआती छह महीनों में सिर्फ ब्रेस्ट र्फींडग करवाएं।

-बच्चे का शरीर कपड़ों से ठीक तरह से ढका होना चाहिए, खासतौर से पैर, सिर और हाथ।

-जन्म के बाद शुरुआती 3-4 दिनों में अगर बच्चा र्फींडग के बाद पतला मल त्यागता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह बिल्कुल सामान्य है।

-जिस बच्चे को ठीक तरह से र्फींडग कराई जा रही हो वो एक दिन में कम से कम 8 बार युरीन पास करता है।

-वैक्सीनेशन समय पर करवाएं।

-फीड कराने के बाद बच्चे को बैठाने की स्थिति में गोद में पकड़ें या छाती से लगाएं और पीठ को थपथपाएं।

-पीलिया जैसे लक्षणों पर नजर रखें।

-अस्पताल से घर आने से पहले बच्चे की गर्भनाल के बारे में पूरी जानकारी ले लें। वैसे सूखी गर्भनाल 10 दिन से तीन सप्ताह के बीच गिर जाती है। अगर गर्भनाल लाल हो गई हो, उसमें से दुर्गंध आ रही हो या रक्त निकल रहा हो तो उपचार की जरूरत हो सकती है। गर्भनाल गिरने के बाद ही बच्चे को नहलाना शुरू करें।

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