बच्चों को प्री स्कूल भेजना क्या घाटे का सौदा है? एक टीचर से जानें सही जवाब
Pre school worth for child or not: काफी सारे पैरेंट्स बच्चों को प्री या प्ले स्कूल में नहीं भेजते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चे तो घर में भी खेल सकते हैं फिर उन्हें खेलने के लिए प्ले स्कूल क्यों भेजना, तो जान लें इस स्कूल टीचर का जवाब।

बच्चों को स्कूल भेजने से पहले प्री स्कूल या प्ले स्कूल में भेजना काफी कॉमन हो गया है। बड़े शहरों में तो एकल फैमिली या अकेले रहने वाले पैरेंट्स अपने बच्चों को दो से ढाई साल की उम्र में प्री स्कूल में डाल देते हैं क्योंकि ज्यादातर पैरेंट्स वर्किंग होते हैं और उनके पास बच्चे को दिनभर संभालने का वक्त नहीं मिलता। लेकिन वो घर जहां पर बच्चे के ग्रैंड पैरेंट्स साथ होते हैं या फिर छोटे शहरों में जहां महिलाएं वर्किंग नहीं होती अक्सर वो बच्चों के प्ले या प्री स्कूल को स्किप कर देते हैं। उन्हें लगता है कि इतने छोटे बच्चे को घर से बाहर केवल 3 घंटे खेलने के लिए भेजना ठीक नहीं या फिर कई बार उन्हें ये फिजूलखर्ची भी लगती है। अगर किसी भी पैरेंट्स के मन में इस तरह के सवाल आते हैं तो उसका जवाब इस प्री स्कूल की टीचर से जरूर जान लें। तब आपको पता चलेगा कि आखिर बच्चे के डेवलपिंग एज में प्री स्कूल का क्या योगदान होता है।
आखिर क्यों बच्चों को प्री स्कूल भेजना बच्चे की ग्रोथ से जुड़ा मामला है
मन में सवाल उठता है कि बच्चे को प्री स्कूल क्यों भेजना चाहिए तो उसका जवाब बहुत सिंपल है। ये बच्चे की ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए अच्छा है। कुछ लोग का मानना है कि बच्चे को जब प्री या प्ले स्कूल में खिलाते ही हैं तो वो काम तो घर में भी बच्चे करते हैं। लेकिन बता दें कि बच्चे के घर और स्कूल में खेलने में बहुत अंतर होता है।
- बच्चे को स्कूल में खेलने के साथ डिसिप्लिन मेंटेन करना सिखाया जाता है।
- बच्चे को स्कूल में अपने हम उम्र दूसरे बच्चों के साथ इंटरैक्शन करने का मौका मिलता है। ग्रुप में काम करने, सोशल बिहेवियर सीखने का मौका मिलता है।
- बच्चों को कोई रैंडम गेम नहीं खिलाया जाता। हमेशा गेम टीचर डिसाइड करती हैं। जिससे बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
- छोटे बच्चों को खेल तय टाइम लिमिट में खेलना होता है जिससे उन्हें टाइम मैनेजमेंट सीखने में मदद होती है।
- एक के बाद दूसरे की बारी, आउट हो जाने के बाद गेम से बाहर हो जाना, बच्चों को बिहेवियर में धैर्य यानी पेशेंस सीखने का मौका मिलता है।
- बच्चों को ग्रुप एक्टीविटी कराई जाती है। जिससे बच्चों में सोशल स्किल डेवलप होती है।
- बच्चों में कॉन्फिडेंस लेवल डेवलप होता है।
- साथ ही गेम में जीतने पर जो प्राइज और तारीफ मिलती है। उससे बच्चों को मोटिवेशन मिलता है कि वो और भी ज्यादा अच्छे से चीजों को करें। जिससे बच्चे की फ्यूचर ग्रोथ डेवलप होती है।
- यहीं नहीं बच्चा जब किसी बड़े स्कूल में पढ़ने के लिए जाता है तो उसे स्कूल में सेटल होने में ज्यादा समय नहीं लगता और वो आसानी से चीजों को सीख पाता है क्योंकि वो पहले से ही प्ले स्कूल में जाता है तो एनवायरमेंट बिल्कुल नया सा नहीं लगता और वो आसानी से सेटल हो पाता है।
लेखक के बारे में
Aparajitaअपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।
विशेषताएं:
सेहत और फिटनेस से जुड़ी समस्याओं के निदान और कारण पर विशेषज्ञों की तथ्यपरक जानकारी
बॉलीवुड फैशन और आम लोगों की स्टाइल से जुड़ी जानकारी
ट्रैवल, रिलेशनशिप, कुकिंग टिप्स एंड हैक्स के साथ लाइफ की समस्याओं के निदान पर सरल भाषा में लिखना
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


